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Shiv Sagar Restaurant

शिव सागर रेस्टोरेंट: कभी कैंटीन में थे सफाई कर्मचारी, आज 50 करोड़ का है टर्नओवर

काम की तलाश में कर्नाटक से मुंबई आए, नारायण पुजारी ने कैंटीन में सफाई करने से की थी अपने काम की शुरुआत। आज शहर के मशहूर Shiv Sagar Resaturant सहित कई रेस्टोरेंट के मालिक बनकर सलाना 50 करोड़ का टर्नओवर कमा रहे हैं।

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भारत के हर राज्य में अलग तरीके का खाना पकाया जाता है और हर एक व्यंजन का स्वाद अलग होता है। कहा तो यह भी जाता है कि भारत में हर 100 किलोमीटर पर खाने-पीने का स्वाद बदल जाता है। ऐसे में, बात अगर मुंबई के लजीज व्यंजनों की करें, तो सबसे पहला नाम पाव भाजी का आता है। यह मुंबई वालों के सबसे प्रिय व्यंजनों में से एक है। कहा जाता है कि सालों पहले, इसे कपड़ा मिल में काम करने वाले लोगों के दोपहर के भोजन के रूप में तैयार किया जाता था। आगे चलकर तो यह व्यंजन हमारे देश के हर भाग में लोकप्रिय हो गया। भाजी एक ऐसा व्यंजन था,  जिसे कभी बची हुई सब्जियों के साथ बनाया जाता था। समय के साथ, पाव भाजी के स्वाद और इसे बनाने के तरीके में भी बदलाव आया। अब यह एक ऐसी डिश बन गई है, जिसे भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के रेस्टोरेंट्स में परोसा जा रहा है। पाव भाजी की ऐसी कई कहानियों में से, एक कहानी 54 वर्षीय नारायण पुजारी से भी जुड़ी हुई है। जिन्होंने एक वेटर के रूप में अपने काम की शुरुआत की थी और आज मुंबई के फेमस शिवसागर रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) के मालिक हैं। 

शिवसागर (Shiv Sagar Restaurant) के सभी आउटलेट्स में, आज वह हर दिन 3000 प्लेट्स पाव भाजी परोस रहे हैं। उनका साल का टर्नओवर लगभग 50 करोड़ रुपये है।  

संघर्ष से सफलता तक की कहानी 

आंखों में सपने लिए नारायण 13 साल की उम्र में मुंबई आ गए थे। उन दिनों को याद करते हुए नारायण  कहते हैं, “मैं कर्नाटक के गुज्जडी (Gujjadi) में पैदा हुआ था। पांचवी की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही, मुंबई आ गया। मुझे आज भी याद है, जब मैं यहां आया, तो कुछ लोगों ने मुझे प्रभावित किया और मैं भी उन लोगों जैसा ही बनना चाहता था।”

नारायण अपने छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। इसलिए छोटी उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गई। उनके पिताजी खेती से जुड़े थे। लेकिन नारायण छोटी उम्र में भी बड़े सपने देखते थे। उन्हें जीवन में कुछ बड़ा करना था।

owner of Shiv sagar restaurant
Narayan Poojari and his wife.

नारायण 1980 में अपनी नानी के साथ मुंबई आ गए। उस वक्त उनकी जेब में केवल 30 रुपये थे। मुंबई के सांताक्रूज इलाके में, उनकी मौसी का घर था। वह अपनी मौसी के साथ रहने लगे।

नारायण ने बताया, “इस शहर में आकर, मैंने सबसे पहले बलार्ड इस्टेट (Ballard Estate) की एक कैंटीन में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करना शुरू किया था। उन दिनों, मैं सुबह काम करता था और रात की स्कूल में पढ़ने जाता था। ताकि काम के साथ-साथ पढ़ाई भी पूरी कर सकूं। मैं हर महीने 40 रुपये कमाता था और क्लास खत्म करने के बाद कई बार कैंटीन में ही सो जाता था।”

इस तरह रात की स्कूल में जाकर, नारायण ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दूसरी नौकरी पीडब्ल्यूडी ऑफिस कैंटीन में शुरू की। यहां उन्होंने दो साल काम किया। 

नारायण कहते हैं, “जब मैं पीडब्ल्यूडी की कैंटीन में काम कर रहा था, उस दौरान मुझे मुंबई के कफ परेड में खुद से एक कैंटीन चलाने और उसे मैनेज करने का अवसर मिला। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ा मौका था, जहां मुझे कैंटीन चलाने की बारीकियों को अच्छे से समझने में मदद मिली। उस समय मैंने जो कुछ सीखा था, वह आज भी मेरे काम आ रहा है।” 

यहां काम करने के दौरान ही, नारायण कई ऐसे लोगों से मिले, जिनमें से कुछ लोगों ने आगे चलकर उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नारायण की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट 

साल 1990 में इसी कैंटीन में काम करते हुए वह बाबूभाई पटेल से मिले, जिन्होंने नारायण की किस्मत को बदलने में बहुत मदद की। इस बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “बाबूभाई के पास रेस्टोरेंट खोलने के लिए अच्छी पूंजी थी लेकिन उन्हें किसी के साथ की जरूरत थी।  उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं उनके  साथ काम करूंगा। और इस तरह उनके साथ केम्प्स कॉर्नर नाम का हमारा पहला आउटलेट खुला। सबसे मजे की बात यह है कि जब हमने शुरुआत की थी तब पाव भाजी हमारे मेन्यू में थी ही नहीं। हमने बाद में इसे रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) के मेन्यू में शामिल किया जो आगे चलकर एक हिट डिश शाबित हुई।”

shiv sagar famous pavbhaji
The famous pav bhaji of Shiv Sagar

नारायण कहते हैं, “उस समय पाव भाजी हमारे यहां की एक ऐसी डिश थी, जिसे डेट पर आए युवा जोड़े भी ऑर्डर करते थे। वहीं, कई लोग सपरिवार भी इस डिश का आनंद उठाने आते थे। इसके अलावा, शहर के सेलिब्रिटी भी इस डिश के लिए ऑर्डर किया करते थे।”

जब नारायण से पूछा गया कि उनके रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) में कौन-कौन सी बड़ी हस्तियां अक्सर आते रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए सचिन तेंदुलकर, जैकी श्रॉफ, तनुजा, काजोल और तनीषा का नाम लिया। 

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90 के दशक की शुरुआत के बारे में बात करते हुए, नारायण कहते हैं, “1993 मुंबई बम विस्फोट घटना से पहले, हमारा रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) देर रात तक खुला रहता था। उस समय शहर में रात का कर्फ्यू नहीं था। लेकिन मुंबई हमले के बाद बहुत सारी चीजें बदल गईं।”

उनका कहना है कि उस दौरान, लोगों के बीच पाव भाजी और पिज्जा की बहुत मांग थी। वह एक दिन में अपने एक आउटलेट में लगभग 700 प्लेट पाव भाजी की बिक्री करते थे। 1990 में पाव भाजी की एक प्लेट की कीमत में 8 रुपये थी, वहीं आज यह 180 रुपये हो गई है।
वह कहते हैं, “1994 से बिज़नेस में कई सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो गए। मैंने कंपनी में एक बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया। यह साल मेरे लिए निजी रूप से काफी अच्छा था। क्योंकि, उसी साल मेरी शादी भी हुई थी, जिसके बाद मेरी पत्नी भी बिज़नेस में शामिल हो गईं।”

famous vegetarian restaurant in mumbai
Shiv Sagar

पिछले दो दशकों में शिव सागर रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट्स (Shiv Sagar Restaurant) के 15 से अधिक आउटलेट्स, देश के तीन से अधिक राज्यों में खुल गए हैं। इन सभी जगहों में उनकी पाव भाजी, बेस्ट सेलिंग डिश है। नारायण कहते हैं कि इसके अलावा लोगों को यहां की इडली भी काफी पसंद है। वहीं लोग डोसा, पिज्जा, सैंडविच, जूस और मिल्कशेक जैसी अन्य चीजें भी खूब आर्डर करते हैं।

बिग-बी को मानते हैं अपनी प्रेरणा 

उन्होंने बताया,” इतने सालों में जो एक चीज आज तक नहीं बदली वह है- मेरा डेली रूटिन। मैं भले ही कितने देर से काम से वापस आऊं, सालों से मैं नियमित रूप से सुबह 5.30 बजे उठता हूं। जिसके बाद जिम जाता हूं।”
एक बार सुबह 9.30 बजे घर से नाश्ते के बाद वह काम पर निकल जाते हैं। लेकिन उनका घर लौटने का कोई निश्चित समय नहीं है। दिन भर वह अपने अलग-अलग आउटलेट्स का दौरा करते रहते हैं। 

Narayan poojari with his family
Narayan Poojari and his family.

इस बारे में द बेटर इंडिया से बात करते हुए उनकी बेटी, निकिता पुजारी कहती हैं, “मैंने अपने पिता को इस ब्रांड को बनाने और इसे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत करते देखा है। मैंने उनसे जो सबसे बड़ी सीख पाई है, वह यह है कि कैसे ज्यादा लोगों को मैनेज करके उनसे सही तरीके से काम कराना चाहिए। आज भी वह रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) की रसोई में जाकर सभी डिश को चखते हैं। नियमित रूप से शेफ की पीठ थपथपाकर उनकी तारीफ करते हैं। उन्हें प्रोत्साहन देते हैं। उनका इन छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देना, शिव सागर के कर्मचरियों के दिल को छू जाता हैं।”

मुंबई में नारायण ने अपने रेस्टोरेंट (Shiv Sagar Restaurant) का काफी विस्तार किया है। आज उनके पास फिश एन बैट (Fish N Bait), बटरफ्लाई (Butterfly) और हाल ही खुला क्यमा (Kyma) जैसे कई रेस्टोरेंट्स मौजूद हैं। इन सभी रेस्टोरेंट्स में वह एक से बढ़कर एक लजीज डिश परोसते हैं।  

अंत में नारायण कहते हैं,  “आज मैं जो हूं, वही मैं बनना चाहता था। मेरा सपना हमेशा से ही कुछ बड़ा काम करना था। अपने सपने को पूरा करने के लिए और यहां तक पहुंचने के लिए मैंने दिन-रात कड़ी मेहनत की है। मैं अपने जीवन में अमिताभ बच्चन की फिल्मों से प्रेरित हूं और उनकी ही तरह एक बड़ा आदमी बनना चाहता हूं।”

मूल लेख- विद्या राजा 

संपादन- जी एन झा

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