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इस महिला ने की एक पहल और शहर के 40% लोग आए साथ, अब जीरो वेस्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर महाड

शिक्षिका ममता मेहता ने अपने स्तर पर एक मुहिम की शुरुआत की थी, जिससे शहर के 40 प्रतिशत लोग जुड़े और अब महाराष्ट्र के महाड शहर से हर महीने तकरीबन एक टन प्लास्टिक वेस्ट रीसायकल होने के लिए भेजा जाता है।

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प्लस्टिक वेस्ट हमारे लैंडफिल और पर्यावरण के लिए कितना हानिकारक है, यह तो हम सभी जानते हैं। बावजूद इसके प्लास्टिक का उपयोग हर जगह किया जा रहा है। हमारे घर से निकलकर यह कचरा शहर के पास की नदी या जंगल को दूषित करता है। 

यही वजह है कि शहर तो शहर अब ग्रामीण इलाकों में भी प्रदूषण बढ़ गया है। लेकिन आज हम आपको महाराष्ट्र के महाड शहर के बारे में बताने वाले हैं, जहां लोग मिलकर कचरा प्रबंधन का काम कर रहे हैं। इस सकारात्मक बदलाव के पीछे इसी शहर की एक टीचर ममता मेहता का हाथ है। जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर, अपने स्तर पर काम करना शुरू किया था। धीरे-धीरे लोग उनसे जुड़ते गए और आज एक लाख आबादी वाले इस शहर के तकरीबन 40 प्रतिशत लोग जीरो वेस्ट के लिए प्रयास कर रहे हैं।  

कैसे हुई शुरुआत?

ममता, साल 1995 से महाड के कोंकण एजुकेशन सोसाइटी में टीचर के तौर पर काम कर रही थीं। वह अक्सर अपने बेटे को लेकर शहर की सावित्री नदी के किनारे जाया करती थीं। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया, “हम सभी नदी के किनारे वक्त गुजारते थे, क्योंकि वहां शांति मिलती थी। लेकिन नदी किनारे लोग प्लास्टिक कचरा फेंक दिया करते थे। कचरा देखकर मैं हमेशा यही सोचती थी कि अगर यह कचरा ऐसे ही बढ़ता रहा, तो हमारे जैसे लोग नदी के किनारे आना ही छोड़ देंगे।” 

ममता ने महसूस किया कि लोगों में जागरूकता की कमी है, जिसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर कुछ प्रयास करने की ठानी। ममता ने 2008 में नौकरी छोड़कर घर पर ही ट्यूशन शुरू किया। साथ ही वह लोगों को वेस्ट मैनजमेंट के बारे में बताने लगीं। उनके इस फैसले में उनके पति विजय मेहता और बेटे तन्मय मेहता ने पूरा साथ दिया। उनके पति और बेटे दोनों ही पेशे से वकील हैं।  

Mamta mehta working for waste management
Mamta Mehta

बनाई गईं अध्यक्षा

ममता ने गीले और सूखे कचरे प्रबंधन के बारे में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने गीले कचरे के लिए घर के गार्डन में दो फुट का गड्ढ़ा बनवाया। वह खुद के साथ आस-पास के लोगों और ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चों को भी गीला कचरा लाने को कहती थीं।  

ममता कहती हैं, “मैं खुश थी कि धीरे-धीरे लोग मुझसे जुड़ रहे हैं। गीले कचरे का प्रबंधन तो आसन था। वहीं बड़ी प्लास्टिक की बॉटल्स को कबाड़ीवाला ले जाया करता था। मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या लाइट वेस्ट प्लास्टिक को रीसायकल करना था।”

उनके स्वच्छता के काम को देखकर, 2013 में उन्हें अपनी कॉलोनी का अध्यक्ष भी बनाया गया। जिसके बाद उन्होंने महाड की प्रभात कॉलोनी में जोर-शोर से कचरा प्रबंधन का काम शुरू कर दिया। वहीं साल 2014 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में स्वच्छता अभियान को शुरू किया। ममता कहती हैं, “मैं लोगों को समझाती थी कि अपना कचरा घर से बाहर फेंकना इसका प्रबंधन नहीं है बल्कि अपने घर को जीरो वेस्ट बनाना सही स्वच्छता अभियान है।”

मिला प्लास्टिक वेस्ट का प्रबंधन का रास्ता

हालांकि शुरुआत में उन्हें लाइट प्लास्टिक वेस्ट के रीसायकल से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी। साल 2017 में उन्हें पुणे स्थित रूद्र फाउंडेशन का पता चला। रूद्र फाउंडेशन की संस्थापक मेधा ताड़पत्रीकर लाइट प्लास्टिक वेस्ट के रीसायकल पर काम करती हैं। उनके बारे में ममता कहती हैं, “पहली बार जब मैं मेधा से मिलने पुणे गई थी तब मेरे पास 700 ग्राम प्लास्टिक वेस्ट था। वहीं आज हम हर महीने एक टन से ज्यादा का प्लास्टिक वेस्ट कलेक्ट कर रहे हैं। यह सबकुछ महाड के लोगों के सहयोग की वजह से संभव हुआ है। हम कचरे को अब बाहर नहीं फेंकते हैं।”

citizens of Mahad city collect plastic waste for  recycling
Mamta With Her Team

साल 2017 से ही ममता,  अपने साथ शहर के दूसरे लोगों का प्लास्टिक वेस्ट स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस से पुणे भेजने लगीं। वह बस के ऊपर कचरे को बांधकर भेजती थीं। इस काम में उनका बेटा और दूसरे लोग भी मदद करते थे। जिसके बाद उन्होंने शहर के लोगों में जागरूकता लाने के लिए वर्कशॉप करना शुरू किया। जिसमें वह लोगों को प्लास्टिक को सूखा कर जमा करने के तरीके और गीले कचरे को कम्पोस्ट करना सिखाती थीं।

ममता शहर में पॉली प्रोसेसर ग्रुप के नाम से अपने स्तर पर काम कर रही थीं। लेकिन ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए, वह चाहती थीं कि इसे एक संस्था का नाम मिले। इस दौरान वह नवी मुंबई में सस्टेंबिलिटी और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए काम करने वाली श्रृंखला संस्था की सह संस्थापक अश्मिता शर्मा से मिलीं।  

प्लास्टिक के अलावा करते हैं और भी चीज़ें कलेक्ट

ममता कहती हैं, “मैंने अस्मिता को बताया कि मैं शहर के लोगों के साथ एक ग्रुप में काम कर रही हूं। लेकिन अगर मुझे बड़े बैनर के तहत काम करने का मौका मिले तो हम और बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। जिसके बाद हमने 2018 में श्रृंखला संस्था को महाड में लॉन्च किया।”

ममता के कामकाज के बारे में अस्मिता शर्मा कहती हैं, “महाड जैसे छोटे से शहर में जन-जागृति से शुरू हुआ स्वच्छता अभियान काबील-ए-तारीफ है। इस जागरूकता अभियान के पीछे और कोई नहीं बल्कि ममता हैं। उनके जज्बे को देखकर ही श्रृंखला ने मदद करने का फैसला किया।”

श्रृंखला जैसे बड़े बैनर के तहत ममता के साथ शहर के कई लोग जुड़े, जिनमें कई गृहिणियां भी शामिल हैं। आज उनके साथ उज्जवला कोलेकर, डॉ विजय, विजया देसाई, शलाखा वारंगे, अस्मिता मेहता, अंजली मोरे, निहार वडाके जैसे कई लोग मिलकर महाड को जीरो वेस्ट शहर बनाने के लिए काम कर रहे हैं ।

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लॉकडाउन में भी शहरवालों ने जमा किया वेस्ट 

अब श्रृंखला की एक गाड़ी महीने में शहर में प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन का काम करती है। प्लास्टिक वेस्ट के साथ वह ई-वेस्ट और पुराने जूते आदि भी इकट्ठा करते हैं। शहर से जमा प्लास्टिक वेस्ट को पुणे भेजा जाता है, जबकि बांकि वेस्ट को पनवेल (मुंबई) के पास एक रीसाइक्लिंग कंपनी में भेजा जाता है।

plastic waste collection center in mahad city
Shrunkhala plastic waste Collection Center

अब चूंकि लोगों को वेस्ट को फेंकने के बजाय जमा करने की आदत लग गई थी, इसलिए शहर के लोगों ने लॉकडाउन के दौरान अपने लाइट वेस्ट प्लास्टिक को जमा कर लिया था। उस दौरान स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस नहीं चल रही थी। अक्टूबर के महीने में प्लास्टिक वेस्ट को श्रृंखला की गाड़ी से रीसायकल के लिए भेजा गया। ममता ने बताया कि उन्होंने पिछले साल लॉकडाउन के बाद, तकरीबन आठ टन प्लास्टिक वेस्ट कलेक्ट किया था। यह कचरा महाड और इसके पास के कुसगाव से जमा किया गया था। 

‘सम्पूर्ण अर्थ’ को अपना सारा वेस्ट देना किया शुरू

ममता ने इस साल सितंबर महीने से महाड में एक कलेक्शन सेंटर भी शुरू किया है। जहां शहर के प्लास्टिक वेस्ट को जमा किया जाता है। लॉकडाउन के बाद पनवेल (महाराष्ट्र) की जिस कपंनी को रीसायकल के लिए वेस्ट भेजा जाता था वह बंद हो गई। जिसके बाद ममता ने मुंबई की ही एक दूसरी कंपनी ‘सम्पूर्ण अर्थ’ को अपना सारा वेस्ट देना शुरू किया है।

Mamta taking workshop for waste management
Workshop For Bio-Enzyme

ममता के साथ आज महाड के कई लोग काम कर रहे हैं। इसी शहर की साक्षी उपाध्याय कहती हैं, “मैं तीन साल पहले यहां आई थी। शहर में ममता का काम देखकर मैं काफी प्रभावित हुई। मैंने उनके वर्कशॉप में हिस्सा लिया है। उनकी मेहनत से हमारे शहर में काफी बदलाव आए हैं।”

अगर आप भी कचरा प्रबंधन के बारे में ममता से जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें 9820143060 पर संपर्क कर सकते हैं। यदि स्वच्छता की इस मुहिम में उनका साथ देना चाहते हैं, तो इस पते पर संपर्क कर सकते हैं- 

Shrunkhala Organisation For sustainable development

Registration number :U93000MH2018NPL304217

Yes Bank Account Number 021694600001151

IFSC Code : YESB0000216 

संपादन- जी एन झा

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