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जेब में बचे आखिरी 300 रुपये से शुरू किया ‘बिनधास्त वड़ापाव’ बिजनेस, 1 साल में हुआ मशहूर

माता-पिता को खोने और लॉकडाउन में नौकरी जाने के बाद, मुंबई (डोम्बिवली) के ओमकार गोडबोले ने घर से ही ऑनलाइन ऑर्डर्स के जरिए वड़ापाव बेचना शुरू किया। पढ़ें, कैसे यह बिजनेस साल भर में ही हिट हो गया।

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अक्सर मुश्किल समय में हमें माता-पिता की सिखाई बातें याद आती हैं और उसी सीख के सहारे हमें चुनौतियों से लड़ने की शक्ति भी मिलती है। मुंबई से लगे ठाणे जिले के डोम्बिवली में रहनेवाले ओमकार गोडबोले का जीवन भी एक साल पहले कई मुश्किलों से भरा था। ऐसे में उन्हें माँ की सिखाई वड़ापाव रेसिपी ने सहारा दिया। 

ओमकार ने 2018 में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। उनके पिता बैंक में क्लर्क थे और माँ एक गृहिणी थीं। अपनी माँ को याद करते हुए वह कहते हैं, “जब मैं आठवीं में पढ़ता था, तब से ही मेरी माँ बीमार रहती थीं। बीमारी की वजह से माँ खाना नहीं बना पाती थीं। ऐस समय में मैंने उनसे खाना बनाना सीखा और इस काम में उनकी सहायता करने लगा।”  

साल 2018 में माता-पिता के गुजर जाने के बाद, ओमकार अपनी बहन के साथ रहने लगे। इसी बीच उन्होंने पढ़ाई छोड़कर एक इवेंट कंपनी में काम करना शुरू किया। उनकी बहन टूर कंपनी में काम करती थीं। पिछले साल कोरोना के दौरान उनकी बहन काम के सिलसिले में घर से दूर थीं। ऐसे में ओमकार घर में अकेले थे और वह भोजन बनाने में ढेर सारे प्रयोग करने लगे।

300 रुपये से शुरू किया बिज़नेस 

ओमकार ने बताया, “मुझे खाने से ज्यादा खाना बनाने का शौक है। मुंबई का होने के कारण मुझे वड़ापाव से विशेष लगाव है। लॉकडाउन के दौरान मैं और मेरे सभी दोस्त बाहर जाकर वड़ापाव खाना बहुत याद कर रहे थे। तभी मुझे इस बिज़नेस का ख्याल आया।”

Omkar godbole
Omkar Godbole

लॉकडाउन में जब उनके पास आखरी 300 रुपये बचे थे, तब उन्होंने सोचा की इसे खर्च करने के बजाय, क्यों न इससे कुछ बिज़नेस शुरू किया जाए? वह कहते हैं, “मैं बस एक कोशिश करना चाहता था क्योंकि मुझे नौकरी के बजाय अपना खुद का काम करना था। मेरे दोस्तों को मेरे हाथों का मिसल पाव, वड़ापाव, नान और बिरयानी बहुत पसंद है।”

पिछले साल 20 मई को उन्होंने ऑनलाइन पोस्ट के जरिए बिनधास्त वड़ापाव (Bindhasta Vada Pav) नाम से बिजनेस की शुरुआत की थी और पहले ही दिन उन्हें 102 वड़ापाव के ऑर्डर मिले। यह उनके लिए एक बड़ी सफलता थी। ऑर्डर मिलने के बाद, उन्होंने अपने पास पड़े 300 रुपये से, वड़ापाव बनाने के लिए बेसन, आलू और अन्य जरूरी सामान खरीदा था।  

पहले ऑर्डर के पैसों से उन्होंने दूसरे ऑर्डर के लिए सामान खरीदा और इस तरह से उनका बिजनेस चल पड़ा। शुरुआत में उनके पास फ्रिज भी नहीं था, इसलिए वह ऑर्डर्स के अनुसार ही वड़ापाव बनाते थे। वहीं आज उन्होंने इस बिजनेस के कमाए पैसों से फ्रिज भी खरीद लिया है। 

दोस्तों ने संभाला डिलीवरी और मार्केटिंग का काम 

ओमकार अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ के हाथों के स्वाद और अपने दोस्तों के साथ को देते हैं। उनके सभी दोस्तों के पास कोरोना के समय ज्यादा काम नहीं था। इसलिए वे सभी उनके लिए डिलीवरी का काम करने को तैयार थे। उनके वड़ापाव की मार्केटिंग के पीछे भी उनके दोस्तों का बहुत बड़ा हाथ है।

ओमकार के एक दोस्त वेदांत बताते हैं, “मुझे फोटोग्राफी का शौक है। इसलिए मैं ओमकार की रेसिपीज़ की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डाल देता हूं। वहीं ज्यादा से ज्यादा युवा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हम फनी मेम बनाते हैं। इन छोटे-छोटे प्रयासों से हम ओमकार की मदद करते हैं।”

Bindhasta Vada Pav omkar's business
Bindhasta Vada Pav

हालांकि लॉकडाउन के दौरान डिलीवरी करने में उनके दोस्तों को थोड़ी दिक्कत भी होती थी। लेकिन ओमकार कहते हैं कि उनके दोस्तों ने हमेशा समय पर ऑर्डर डिलीवर करने में उनकी पूरी मदद की थी। 

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सोशल मीडिया पर हिट हुआ बिजनेस 

अक्सर लोग ओमकार से बिनधास्त वड़ापाव के स्वाद का राज पूछते हैं। इसके जवाब में वह कहते हैं, “खाना बनाना मेरे बचपन का शौक है। सबकुछ मैंने माँ से सीखा है। मुझे याद है, जब वह बीमार थीं तो कहती थीं कि जो भी बनाओ उसे मन से बनाओ, स्वाद अपने आप आ जाएगा। यह सबकुछ माँ की ही देन है।” 

ओमकार की एक छोटी सी कोशिश को एक साल के अंदर ही लोगों का इतना प्यार मिलेगा, उन्होंने इसकी कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन आज उनका वड़ापाव डोम्बिवली इलाके में मशहूर हो गया है। पिछले साल उन्होंने घर से ही ऑनलाइन बिजनेस की शुरुआत की थी। जिसमें उन्हें हर दिन नियमित ऑर्डर्स मिल रहे थे।  

vadapav business
Bindhast vadapav business

फिलहाल ओमकार ने डोम्बिवली में 7500 रुपये किराए पर एक स्टॉल लिया है। जिसके बाद उनका ऑनलाइन काम बंद हो गया है। वह शाम के चार बजे से रात के10 बजे तक स्टॉल लगाते हैं। उन्होंने बताया, “लॉकडाउन के बाद मेरे सभी दोस्त अपने-अपने काम पर लौट गए हैं। इसलिए मेरे पास डिलीवरी का काम करने के लिए कोई नहीं था। यही वजह है कि मैंने स्टॉल शुरू करने का फैसला किया। बिनधास्त वड़ापाव के स्टॉल को हमने काफी आकर्षित रूप से सजाया है।”

ओमकार अब इस बिजनेस से हर महीने 20 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। हालांकि इसे वह अपने सफर की शुरुआत मानते हैं और आने वाले दिनों में इसे बड़े स्तर तक ले जाने के प्रयास में लगे हैं। 

अगर आप ओमकार के बिनधास्त वड़ापाव के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, तो उनका इंस्टाग्राम पेज देख सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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