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Side Business Idea With Job Growing And Selling Cactus Fruit Juice by Sanjay Hathwani of rajkot, gujarat

बैंक की नौकरी के साथ बने किसान, खुद उगाये कैक्टस और जूस बेचकर कमाए लाखों

गुजरात के एक ग्रामीण बैंक में गार्ड की नौकरी करनेवाले संजय हथवाणी, आयुर्वेदिक जूस का बिज़नेस करते हैं। कैक्टस फ्रूट, जिसे पहले लोग जंगली फल समझकर फेंक दिया करते थे, उसके आयुर्वेदिक फायदों की जानकारी मिलते ही, उन्होंने इससे पार्ट टाइम बिज़नेस करने का फैसला किया।

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प्रकृति में ऐसी कई वनस्पतियां हैं, जिनका उपयोग दवाओं के रूप में किया जाता है। एलोवेरा, आंवला, नीम जैसी चीजों का इस्तेमाल तो हर कोई कर रहा है। लेकिन कुछ पौधे हैं जिनके गुणों के बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। इसी कारण उनका इस्तेमाल भी कम होता है। खासकर गांव में तो ऐसी कई वनस्पतियां उगती हैं। लेकिन जानकारी के आभाव में किसान या गांव के दूसरे लोग इसका उपयोग नहीं करते। ऐसा ही पौधा हैं Prickly Pear यानी कांटेदार नागफनी। चूंकि इसका पौधा कैक्टस जैसा होता हैं इसलिए इस Cactus Fruit भी कहा जाता है। आमतौर पर कैक्टस को सजावटी पौधे की तरह ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इस वैरायटी के कैक्टस में उगने वाला यह फल फाइबर का खजाना है। इसमें विटामिन और दूसरे पौषक तत्वों की मौजूदगी के कारण, कई जगह इसका इस्तेमाल बिमारियों को दूर करने के लिए किया जा रहा है।

गुजरात के राजकोट ज़िला के जसदण इलाके में अधिकांश लोग खेती करते हैं। लेकिन यहां गांव में उगते इस कैक्टस के फल की जानकारी ज्यादा किसानों को नहीं थी। वे इसे खेत में उगने वाला जंगली फल समझकर फेंक दिया करते थे। लेकिन यहां के ही एक युवक, संजय हथवाणी ने इस कांटेदार फल की उपयोगिता समझी और इसे बिज़नेस के अवसर में बदल दिया।

संजय एक ग्रामीण बैंक में काम करते हैं, लेकिन उनकी रुचि खेती-बाड़ी में है। ऐसे में जब उन्हें Cactus Fruit की उपयोगिता का पता चला, तो वह अपने परिवारवालों के साथ मिलकर इसका जूस बनाने और बेचने का काम करने लगे।

नौकरी के साथ करते हैं खेती भी

cactus fruit juice

मूल रूप से हिंगोलगढ़ के रहनेवाले संजय खेती में रूचि रखते हैं। ‘अजय नेचर फार्म’ नाम से,10 बीघा ज़मीन पर उनका एक छोटा सा फार्म भी है। जहां वह पिछले एक साल से 24 से अधिक प्रकार के हर्बल उत्पाद बनाते हैं। वहीं वह अपने परिवार के साथ मिलकर Cactus Fruit का जूस तैयार करते हैं। संजय राजकोट ग्रामीण बैंक में काम करने के साथ-साथ यह बिज़नेस भी कर रहे हैं। उन्होंने द बेटर इंडिया को अपने इस पूरे सफर के बारे में विस्तार से बताया।

संजय कहते हैं, “बीस साल पहले हमारे गांव के पास स्थित एक और गांव, गुंडाला में कम हीमोग्लोबिन वाले लोगों के लिए Cactus Fruit सिरप मिलता था। कुछ साल बाद, उन्हीं लोगों ने शहर में ‘गौ कृपा’ के नाम से एक फैक्ट्री की शुरुआत की। फैक्ट्री में आयुर्वेदिक सामान बनाया जाता था। मैं इस कारखाने में काम करने गया था। वहीं से काम सीखकर मुझे हर्बल प्रोडक्ट्स का बिज़नेस करने का मन हुआ। पहले मैं आस-पास घूमकर अपने हर्बल उत्पाद बेचता था। इसी बीच 2012 में, मुझे राजकोट ग्रामीण बैंक में नौकरी मिल गई।”

नौकरी मिलने के बाद उन्होंने यह काम छोड़ दिया था, लेकिन पिछले साल उन्होंने अपनी पुश्तैनी 10 बीघा जमीन पर फिर से यह काम शुरू किया है।
संजय ने बताया कि उन्होंने, अपने हर्बल उत्पादों को बेचने का लाइसेंस भी ले लिया।

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कैक्टस के फलों का जूस

संजय कहते हैं, “इस प्रजाति के पौधे गांव के आस-पास बहुत पाए जाते हैं। लोग इसे जंगली समझते हैं, लेकिन हम इन्हें उगाते हैं। इसके फल लाल गांठ जैसे होते हैं। फल को पौधे से तोड़ने के बाद, इसके अंदर से गूदा निकाला जाता है और इसके बीज को अलग किया जाता है। बाद में, इसे फ़िल्टर करके रस बनाया जाता है। फिर रस को एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है।”

इसके बाद, इस रस में सामान अनुपात में चीनी मिलाई जाती है। फिर इसे तब तक उबाला जाता है, जब तक इसमें झाग बनना बंद न हो जाए। इसके बाद यह जूस बनकर तैयार हो जाता है। फिर रस को ठंडा करके बोतल में भर लिया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग दो से तीन घंटे लगते हैं।

वह कहते हैं, “शनिवार और रविवार को जब बैंक से छुट्टी मिलती है, तब परिवारवालों की मदद से जूस तैयार करता हूं। इस हेल्दी जूस को बनाना बेहद आसान है। हम बेहद सावधानी से और साफ-सफाई का ख्याल रखते हुए जूस तैयार करते हैं।”

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हर दिन बेचते हैं 10 से 15 बोतल जूस

संजय के फार्म से रोजाना कैक्टस फल के जूस की 10 से 15 बोतल की बिक्री हो जाती है। एक बोतल में कुल 600 ग्राम जूस होता है। जिसकी कीमत प्रति बोतल 150 रुपये है।

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उन्होंने बताया, “इस जूस के सेवन से थैलेसीमिया, मधुमेह जैसी बिमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही, पाचन तंत्र मजबूत होता है। यह मोटापा और कोलेस्ट्रॉल भी कम करता है। इतना ही नहीं, यह एनीमिया और रक्त संबंधी बीमारियों के इलाज में भी काफी कारगर है।”

पहले के मुकाबले इस फल के प्रति लोगों में काफी जागरूकता देखी जा रही है। हालांकि, कोरोना में उनका बिज़नेस थोड़ा कम हो गया था, लेकिन अब लोग इसके फायदे जानने के बाद, इसे खरीद रहे हैं।

संजय ने बताया कि हर दिन सुबह शाम 50 ml इस जूस का सवन सेहत के लिए अच्छा होता है।

यदि आप इसके बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, तो संजय से 9904887269 पर संपर्क कर सकते हैं।

मूल लेख- विवेक

संपादन- जी एन झा

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