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“परिवार सबसे पहले आता है!”

“परिवार सबसे पहले आता है!”

“हमें हमेशा सिखाया गया कि परिवार सबसे पहले आता है। हमने अपने पिता को बहुत पहले खो दिया और हमारे भाई और भाभी ने हमें पाला। मैं 4 बहनों और दो भाइयों के साथ बड़ी हुई। अब हम सबके अपने परिवार हैं। लेकिन फिर भी हम ने हमेशा एक दुसरे के आस-पास ही रहने का फैसला किया। मुझे अभी भी याद, जिस दिन मेरी शादी हुई थी, मेरे भाई ने मुझसे एक ही बात कही थी- मैं तुम्हे तभी जाने दूंगा अगर तुम हर रोज मुझसे मिलने आओगी।

आज मैं अपने भतीजे और भतीजी को स्कूल से वापिस ला रही हूँ। हमने अपनी छोटी भाभी को कुछ समय पहले खो दिया और बच्चे अभी भी इस हादसे से उबर रहे हैं। लेकिन हम उनके लिए हमेशा हैं जब भी उन्हें हमारी जरूरत हो। मैं बस उन्हें यही सिखा रही हूँ कि अगर आपके पास परिवार हो तो आपको अकेले दुनिया का सामना करने की जरूरत नहीं पड़ती।”

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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