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पीएचडी कर चुके इस युवक ने सोशल मिडिया के ज़रिये की देश के किसानों को जोड़ने की अनोखी पहल!

डॉ अंकुश चोरमुले

स साल जनवरी में प्रकाशित इकोनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक का कहना है कि साल 2050 तक भारत की आधी से ज्यादा जनसंख्या शहरों में बस जाएगी! इस तरह हमारे यहाँ खेती करने वालों की संख्या  25.7 प्रतिशत तक घट जाएगी, जो साल 2001 में 58.2 प्रतिशत हुआ करती थी।

ऐसे में जरूरत है देश में कृषि अर्थव्यवस्था को सुधारने की; क्योंकि भले ही हम कितने भी शहरी हो जाएँ पर सच हमेशा यही रहेगा कि हमारे घरों की मेज पर खाना सुपरमार्केट से नहीं बल्कि एक किसान के खेत में उसकी रात-दिन की मेहनत के बाद आता है।

इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि हम पढ़ाई-लिखाई या फिर तकनीकी में चाहे जितने भी आगे बढ़ जाएँ, लेकिन एक डोर हमेशा अपनी जड़ों से बाँध कर रखनी होगी। तकनीकी और किसानों के बीच के इसी डोर का काम कर रहें हैं, महाराष्ट्र के सांगली जिले में अष्टा गाँव से ताल्लुक रखने वाले डॉ अंकुश चोरमुले!

महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहूरी से कृषि कीटविज्ञान में पीएचडी कर चुके अंकुश, आज पूरे देश में लाखों किसानों से जुड़कर उनकी मदद कर रहे हैं।

डॉ अंकुश चोरमुले

फ़िलहाल वे पुणे में एक एमएनसी कंपनी ‘सिक्स्थ ग्रेन’ में बतौर एग्रोनोमिस्ट काम करते हैं। हाल ही में उन्होंने देश में लगभग 5 राज्यों में फैले ‘फॉल आर्मी वर्म’ (एक तरह का कीट) पर अपनी रिपोर्ट दी है। महाराष्ट्र से फसलों के लिए इस खतरनाक कीड़े के बारे में सबसे पहली रिपोर्ट अंकुश ने ही दी है।

उन्होंने बताया कि यह कीड़ा सिर्फ मक्का ही नहीं बल्कि गन्ने की फसल में भी तेजी से फैलता है। उन्होंने गन्ने पर इस कीड़े के लार्वा के सैंपल बंगलुरु भेजे थे। गन्ना भी इस कीड़े के लिए एक होस्ट है, इसकी पुष्टि रिपोर्ट अभी तक सिर्फ डॉ. अंकुश चोरमुले ने ही दी है।

फसल को इससे बचाने के लिए भी वे किसानों की मदद कर रहे हैं।

फॉल आर्मी वॉर्म

अंकुश ने हमेशा से ही गाँव में किसानों की परेशानियों को देखा और समझा था। अपनी पढ़ाई के दिनों से ही उन्होंने मन बना लिया था कि उन्होंने जो भी ज्ञान पाया है, वे उसका इस्तेमाल अपने किसानों के लिए करेंगें। खेती से सम्बन्धित जिन परेशानियों को आम किसान पहचान या समझ भी नहीं पाते हैं, उन्हें उनके बारे में जागरूक करना अंकुश का लक्ष्य है।

अंकुश ने द बेटर इंडिया से बातचीत के दौरान बताया, “साल 2012 में मैंने अपनी पीएचडी की पढ़ाई के दौरान अपने एक दोस्त अमोल पाटिल के साथ मिलकर किसानों के लिए एक व्हाट्सअप ग्रुप शुरू किया। अमोल एक किसान है और हमने अपने ही गाँव के लगभग 30-40 किसानों को इसमें जोड़ा। इस व्हाट्सअप ग्रुप में किसान अपनी परेशानी बताते, और फसल की तस्वीरें भेजते और हम जानकारी इकट्ठा करके उन्हें जबाब देते।”

धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ने लगा और फिर उनका व्हाट्सअप ग्रुप भी। किसानों से जुड़ने के साथ-साथ अंकुश ने कृषि-सम्बन्धित विषयों में एक्सपर्ट और भी युवाओं को अपने साथ जोड़ा।

अंकुश ने बताया कि शुरू में उनकी मदद उनके कुछ अन्य पीएचडी दोस्तों ने भी की। उस समय उनकी टीम में ओमप्रकाश हिरे, विश्वजीत कोकड़े, कुणाल सूर्यवंशी आदि थे।

जो सिलसिला कभी 4-5 लोगों के साथ शुरू हुआ था, आज वह 22 लोगों तक पहुँच चूका है।

अंकुश अपनी टीम के अन्य सदस्यों के साथ

आज उनकी टीम में कुल 22 ऐसे लोग हैं, जो अलग-अलग नौकरियां या फिर बिजनेस करते हैं, लेकिन साथ ही व्हाट्सअप ग्रुप और फेसबुक के माध्यम से इन किसानों से भी जुड़े हैं और इनकी मदद करते हैं।

साल 2013 में अंकुश और उनकी टीम ने ‘होय आम्ही शेतकरी’ (हाँ, हम किसान हैं) नाम से एक फेसबुक पेज शुरू किया।

अंकुश के मुताबिक़ इस नाम को रखने का उद्देश्य था, किसान होने में गर्व महसूस करना और करवाना। जब भी यह नाम लिया जाये तो सभी किसानों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि वे इस देश के अन्नदाता हैं।

किसान अपनी फसल के साथ खेतों में

अंकुश के इस फेसबुक पेज से आज लगभग 95,000 लोग जुड़ें हैं और उनमें से ज्यादातर किसान हैं। व्हाट्सअप पर भी अब इस संगठन के 20 ग्रुप हैं। जिनमें से कुछ ग्रुप फसल के हिसाब से भी बनाये गये हैं, जैसे केवल गन्ने की खेती करनेवाले किसानों का एक अलग ग्रुप है! इसी तरह अनार, गेंहू या चवाल की खेती करनेवाले किसानों के लिए भी एक-एक समर्पित ग्रुप बनाया गया है।

महाराष्ट्र में और देश के अन्य भागों में भी गन्ने की खेती खूब होती है। इसलिए, अंकुश ने गन्ना किसानों के लिए एक अलग फेसबुक पेज बनाया और आज इस पेज पर पूरे देश से लगभग 2 लाख किसानों की पहुँच है। फेसबुक के लाइव विडियो फीचर के माध्यम से अंकुश व उनके साथ जुड़े अन्य लोग, किसानों को फसलों के बारे में जानकारी देते हैं।

(आपको फेसबुक पेज पर अधिकतर जानकारी मराठी में मिलेगी, लेकिन यदि आप मराठी भाषा नहीं जानते तो आप कभी भी इस टीम से हिंदी या अंग्रेज़ी में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मदद मांग सकते हैं)

वे किसानों के लिए सप्ताह में दो लाइव विडियो करते हैं, जिसमें वे कभी गन्ने की फसल में उर्वरक कैसे डालें या फिर अनार का प्लांटेशन कैसे करें आदि अलग-अलग कृषि सम्बन्धित विषयों पर बात करते हैं।

इसके अलावा किसान भी अपने अनुभव और खेती में अपना ज्ञान अन्य लोगों के साथ साँझा करते हैं। यदि किसी तकनीक से किसी किसान को फायदा हो, तो वह इसके बारे में अन्य किसानों को इन व्हाट्सअप ग्रुप या फिर फेसबुक पेज के माध्यम से बताता है, जिससे अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलती है।

‘होय आम्ही शेतकरी’ के नाम से ही उनका एक यूट्यूब चैनल भी है, जहाँ आप जानकारी के लिए सब्सक्राइब कर सकते हैं। इसी संगठन के एक किसान सुरेश कबाड़े ने पिछले साल एक एकड़ में लगभग 100 टन गन्ने उगाकर सबको चौंका दिया था। उनका हर एक गन्ना 20 फीट लम्बा व लगभग 4 किलोग्राम का था। आप उनकी पूरी कहानी यहाँ पढ़ सकते हैं।

अंकुश ने आगे बताया, “हम किसानों के लिए यहाँ महाराष्ट्र में सेमिनार भी आयोजित करते हैं, जिसमें हम उन्हें कृषि सम्बन्धित विषयों पर लेक्चर भी देते हैं और साथ ही उन्हें खेतों पर ले जाकर लाइव भी सिखाया जाता है। यह हमने कुछ समय पहले से ही शुरू किया है। इन सेमिनारों में देश भर से हजारों किसान हमारे साथ जुड़ते हैं।”

फसल की अलग-अलग प्रजातियों को कैसे उगाया जाये, उर्वरकों के बारे में, कौन-सा उर्वरक और उनका इस्तेमाल कितनी मात्रा में और कैसे करना है, और कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों आदि से सम्बन्धित जानकारी से किसानों को इन सेमीनारों में अवगत करवाया जाता है।

किसान सेमिनार के दौरान

“फंडिंग हमेशा से एक समस्या रही है। लेकिन जैसे-तैसे करके हम मैनेज करते हैं। इन सेमीनारों की फंडिंग के लिए हम अलग-अलग फ़र्टिलाइज़र कंपनियों से स्पॉन्सरशिप लेते हैं, जिससे हम लेक्चर के लिए कृषि एक्सपर्ट आदि को बुला पाते हैं और किसानों के रहने आदि की व्यवस्था करते हैं। इसके अलावा किसानों को रजिस्टर करने के लिए 150 रूपये की फीस देनी पड़ती है, जिससे हम उनका खाने-पीने का प्रबंध करते हैं,” अपने काम में आने वाली चुनौतियों के बारे में बात करते हुए अंकुश ने बताया।

इसके अलावा पुरे देश में किसानों और मुख्य एजेंसी के बीच बिचौलियों के होने से जो किसानों का शोषण होता है वह आज भी मुख्य समस्या है। इसके लिए अंकुश बताते हैं कि अभी उनका फोकस किसानों के लिए उनका अपना एक मार्किट तैयार करवाने पर है। वे चाहते हैं कि देश में सभी किसानों का अपना एक मार्किट हो, जहाँ उनकी लागत के अनुसार उनकी फ़सल का दाम तय किया जाये।

अंकुश ने अभी तक ‘होय आम्ही शेतकरी’ को औपचारिक तौर पर रजिस्टर नहीं किया है। उनका मानना है कि इन सब प्रक्रियाओं में काफी समय बर्बाद हो जाता है, क्योंकि सरकारी कामों में बहुत वक़्त लगता है। और इतने वक़्त तक वे हाथ पर हाथ रखे नही बैठ सकते हैं, इसलिए इन सब बातों पर इतना ध्यान न देकर वे बस अपना काम कर रहे हैं।

भविष्य के लिए अंकुश सिर्फ इतना कहते हैं कि धीरे-धीरे वे कोशिश कर रहे हैं कि वे पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा गाँवों  और प्रान्तों में किसानों से जुड़े। इसके अलावा वे समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं। कुछ समय पहले बाज़ार में आये नकली केसर के ख़िलाफ़ भी उन्होंने लोगों को जागरूक किया था।

द बेटर इंडिया के माध्यम से अंकुश बस एक सन्देश देना चाहते हैं,

“मेरा बस इतना ही कहना है कि देश के सभी लोगों को, चाहे शहरी हो या फिर गाँव के लोग, उन्हें किसानों के लिए आगे आना चाहिए। और सरकार को किसानों के लिए अच्छी मार्किट पॉलिसी बनाने के लिए कहना चाहिए। इसके अलावा मेरी गुज़ारिश है कि जो भी एग्रीकल्चरल ग्रेजुएट्स या फिर और भी पढ़े-लिखे लोग हैं, ख़ासकर युवाओं को किसानों के हितों के बारे में सोचना चाहिए। अच्छी नौकरी मिलने के बाद हम हमारे अन्नदाता को भूल जाते हैं, लेकिन आज इन सभी लोगों को किसानों से जुड़ने की जरूरत है ताकि देश में कृषि के हालात सुधरें।”

आप डॉ अंकुश चोरमुले और होय आम्ही शेतकरी समूह से जुड़ने के लिए, उन्हें 8275391731 पर कॉल कर सकते हैं। या फिर आप उन्हें anku.chormule999@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। आप उनसे उनके फेसबुक पेज के जरिये भी जुड़ सकते हैं।

द बेटर इंडिया उम्मीद करता है कि डॉ अंकुश चोरमुले की कहानी और भी बहुत से कृषि एक्सपर्ट लोगों को प्रेरित करेगी और वे भी इन किसानों की मदद के लिए आगे आयेंगें।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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