टीवी के राम, किसान पिता के संग करने लगे खेती ताकि शहरों तक पहुंचे शुद्ध खाना

पिछले 15 सालों से एक्टिंग करते हुए, टीवी के मशहूर कलाकार आशीष शर्मा ने कभी नहीं सोचा था कि वह खेती भी कर सकते हैं। लेकिन लॉकडाउन के दौरान, उन्होंने न सिर्फ खेती सीखी, बल्कि आज अपने पिता के साथ मिलकर उनके आर्गेनिक प्रोडक्ट्स को मुंबई में भी बेच रहे हैं।

actor Ashish Sharma

शहरों में रहनेवाले लोग, आमतौर पर बस छुट्टियां बिताने ही गांव जाया करते हैं। कुछ दिन खेत-खलिहान देखना, प्राकृतिक माहौल में रहना हम सबको पसंद आता है। बचपन से खेत देखकर बड़े हुए टेलीविज़न एक्टर आशीष शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही था। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वह अपने खेतों में खेती करेंगे, गाय का दूध निकालेंगे और घी भी बनाएंगे। लेकिन आज आशीष और उनकी पत्नी अर्चना तायडे, दोनों ही एक्टर के साथ-साथ किसान भी बन चुके हैं।   

यह बदलाव उनके जीवन में कोरोना काल के दौरान आया। द बेटर इंडिया ने आशीष से बात की और जाना कि एक्टिंग के साथ-साथ खेती से जुड़ने के पीछे उनका क्या उदेश्य है? 

सिया के राम सीरियल के राम यानी आशीष बताते हैं, “लॉकडाउन के समय जब हमारे पास काफी समय था, तब गांव में रहते हुए, हमने महसूस किया कि जिस तरह से बीमारियां बढ़ रही हैं और हमारी इम्युनिटी ख़राब हो रही है, ऐसे में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना कितना जरूरी बन गया है। मुझे खेती की प्रेरणा अपने पिता से मिली और खेती भी उन्हीं से सीखी।” 

साथ ही, उन्होंने बताया कि उनसे भी ज्यादा उनकी पत्नी और टेलीविज़न एक्टर अर्चना तायडे को ऑर्गेनिक तरीकों के बारे में जानने में दिलचस्पी थी।  

आशीष शर्मा

बागवानी देखते-देखते बीता बचपन  

जयपुर से ताल्लुक रखनेवाले आशीष के पिता अश्वनी शर्मा, राजस्थान में प्रशासनिक अधिकारी थे। वह खेती के काफी शौकीन हैं और उनके पास करीब 40 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन है, जिसपर खेती होती है। रिटायर होने के बाद, आशीष के पिता ने ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग ली और आज वह अपने फार्म पर कई तरह के अनाज, सब्जियां, फल आदि उगा रहे हैं। 

आशीष ने बताया, “चूँकि मेरे पिता को बागवानी और खेती का शौक़ है, इसलिए जब हम सरकारी बंगलो में रहते थे, तब भी वह कुछ न कुछ उगाते रहते थे। मैं पेड़-पौधों के साथ ही बड़ा हुआ हूँ। जब भी हम छुट्टियों में गांव जाते थे, तो अक्सर खेतों में खेला करते थे। लेकिन तब मुझे इसमें कोई रुचि नहीं थी। जब मैंने अपने पिता को खेती करते देखा, तो मुझे काफी प्रेरणा मिली और लगा कि मुझे भी उनका साथ देना चाहिए।” 

ऑर्गेनिक चीजें खरीदने से खुद उसे उगाने तक का अनुभव  

आशीष और पिता अश्वनी शर्मा

आशीष, तक़रीबन 21 साल की उम्र में एक्टिंग के लिए मुंबई चले गए थे। लेकिन उन्हें शहर में मिलनेवाली सब्जियों का स्वाद कभी पसंद नहीं आता था। हालांकि वह जानते थे कि जिसे हम हेल्दी समझ कर खा रहे हैं, उसे उगाने के लिए कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि सब्जियां छोड़कर, हमारा बाकी का राशन गांव से ही आया करता था।  

लेकिन अब वे इसे उगाना भी सीख रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने खेत में शकरकंदी, लेटिष जैसी कई सब्जियां खुद उगाईं। वर्मी कम्पोस्ट बनाने से लेकर, गाय की देखभाल से जुड़े सारे काम आशीष और अर्चना ही किया करते थे। 

एक्टर से फार्मर तक का सफर

उनके पिता अश्वनी कहते हैं, “बचपन से आशीष को बस एक्टिंग करने का ही शौक़ रहा है। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ, जब उसने मुझसे कहा कि मुझे खेती करना सीखना है। उससे भी ज्यादा आश्चर्य तो मुझे अर्चना को खेत में काम करते हुए देखकर हुआ। आशीष का तो फिर भी गांव और खेत से थोड़ा जुड़ाव रहा है, लेकिन अर्चना तो मुंबई में ही पली-बढ़ी हैं और एंटरटेमेंट इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। इसके बावजूद, आज वह बुवाई से लेकर कटाई तक सारे काम सीख गई हैं।” 

फ़िलहाल खेत में तैयार होने वाले सभी प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग और सेल्स का काम अर्चना ही देखती हैं। उनके पास 40 गायें भी हैं। फार्म पर पारम्परिक तरीके से घी भी बनाया जाता है। फ़िलहाल, वह अपना घी मुंबई में भी बेच रहे हैं। वहीं, आशीष ने बताया कि इसके अलावा, हम कई अन्य प्रोडक्ट्स, जैसे- कोल्ड कम्प्रेस्ड तेल, दाल आदि भी ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। 

अर्चना तायड़े और आशीष के पिता

चूँकि वे एक्टर्स हैं, इसलिए काम के लिए मुंबई में रहते हैं और नियमित रूप से गांव भी जाते रहते हैं। आशीष और उनकी पत्नी का खुद का प्रोडक्शन हाउस भी है, जिसके लिए वे स्क्रिप्ट लिखने का काम भी करते हैं। आशीष ने बताया कि बहुत सारे काम हम गांव में ही रहकर करते हैं, ताकि खेती में भी अपने पिता की मदद कर सकें।   

आशीष के पिता बड़ी ख़ुशी के साथ कहते हैं, “मैं अपने बच्चों को ऑर्गेनिक और केमिकल रहित भोजन देने के लिए खेतों में मेहनत कर रहा हूँ और यह बड़ी अच्छी बात है कि बच्चे चकाचौंध वाली दुनिया में खोने के बजाय मेरी मदद कर रहे हैं।”

संपादन- अर्चना दुबे

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