in

केरल : बाढ़ के बाद, इस टेक्नोलॉजी से बनें मात्र 5 लाख रूपये में घर!

फेर्रो-सीमेंट टेक्नोलॉजी से बना घर

बाढ़ से हुई तबाही से उभरने के लिए केरल को न जाने कितना वक़्त लगे, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है। धीरे-धीरे ही सही पर लोगों का जीवन सामान्य हो रहा है।

सरकार और प्रशासन भी अपनी तरफ से हर सम्भव प्रयास में लगे हुयें हैं ताकि जिन भी लोगों ने जो कुछ भी खोया है उन्हें वापिस दिया जा सके। लेकिन सबको पता है कि यह बहुत चुनौतीपूर्ण होगा। न जाने कितने लोगों ने अपने घर खोये हैं और फिर से घर बनाना उनके लिए आसान नहीं।

लेकिन ओनमनोरमा में पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स और इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडियन इंटीरियर डिज़ाइनर्स ने एक योजना दी है जिसके अंतर्गत वे 450 स्क्वायर फीट में 2 बेडरूम, एक किचन और एक हॉल का घर बनायेंगें, जिसकी कीमत मात्र 5 लाख रूपये होगी।

साथ ही इस घर को फेर्रो-सीमेंट टेक्नोलॉजी के साथ बनाया जायेगा, जो कि आपके घर को प्राक्रतिक आपदा जैसे कि भूकम्प, बाढ़ आदि के अनुकूल बनाएगी।

जिन्होंने भी बाढ़ में अपने घर खोये हैं, शायद यही वह योजना है जिसकी उन्हें जरूरत है।

आखिर क्या है ये फेर्रो-सीमेंट टेक्नोलॉजी?

फेर्रो-सीमेंट तारों और सीमेंट मोर्टार से बना हुआ एक निर्माण उत्पाद है। सीमेंट मोर्टार को मेटल पर, और स्टील के तारों पर बारीकी से लगाया जाता है।

इसके कई फायदे हैं – जैसे कि निर्माण सामग्री की कम लागत, निर्माण में आसानी, कम वजन, लम्बे समय तक चलना और किसी भी आकार में गढ़ने की क्षमता।

Promotion

यह टेक्नोलॉजी पुनर्वास के लिए सबसे सही है क्योंकि इससे एक घर के निर्माण को पूरा करने में केवल एक महीने का समय लगता है। और रखरखाव की लागत भी कम होती है। द हिन्दू के अनुसार, अलप्पुज़हा जिला पंचायत के अध्यक्ष आर नज़र द्वारा रमांकरी के एक समारोह में एक व्यक्ति को इस टेक्नोलॉजी से बना घर भेंट स्वरुप दिया गया है।

केरल बाढ़ में नष्ट या क्षतिग्रस्त संपत्ति के पुनर्निर्माण के लिए इसका उपयोग किया जायेगा। जिजी थॉमस, इस क्षेत्र में एक इंजीनियर और विशेषज्ञ, इस पुनर्निर्माण परियोजना का हिस्सा होंगे। लगभग 10 साल पहले निर्मित त्रिशूर के आसपास के कई घरों का निर्माण इस तकनीक का उपयोग करके किया गया था, और आईआईए, त्रिशूर के चेयरमैन आर्किटेक्ट रंजीत रॉय के अनुसार, यदि सरकार और अन्य एजेंसियां ​​निर्माण खर्च उठाने के लिए तैयार हैं, तो केंद्र तकनीकी सहायता मुफ्त प्रदान करेगा।

कवर फोटो 


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

शेयर करे

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इस महिला आईएएस अफ़सर ने अंबिकापुर को बनाया भारत का ‘सबसे स्वच्छ छोटा शहर’!

पायलट बनने के बाद पंजाब के इस पुत्तर ने अपने गाँव के बुजुर्गों को करवाई मुफ्त में हवाई यात्रा!