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उत्तर-प्रदेश: बेटियों के लिए पिता ने छोड़ी नौकरी तो माँ ने गिरवी रखे गहने!

त्तर-प्रदेश के नोएडा में एक पिता ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ कर अपना पूरा ध्यान अपनी बेटियों के स्पोर्ट्स पर लगा रखा है ताकि एक दिन वे देश के लिए नेशनल खेलकर गोल्ड मेडल लायें।

गीता फोगाट, बबीता फोगाट पर बनी फिल्म ‘दंगल’ से प्रभावित रमेश रावत कस्टम विभाग में नौकरी करते थे। उन्हें बचपन से ही बॉक्सिंग और पहलवानी का शौक था। लेकिन घरवालों का साथ न मिलने के कारण वे इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाए।

अब उनकी दोनों बेटियों को भी पहलवानी और बॉक्सिंग करना पसंद है। इसलिए वे भी अब अपने सपने को अपनी बेटियों में पूरा होते देख रहे हैं। हर रोज सुबह 4 बजे उठकर वे अपनी बेटियों के साथ मेहनत करते हैं। उनका दिन कसरत के साथ शुरू होता है।

उनकी बड़ी बेटी मानसी स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद पिछले दिनों यूथ नेशनल में खेल चुकी है। हालांकि नेशनल में अभी कोई मेडल नहीं मिला है, लेकिन दिन-रात की कड़ी मेहनत जारी है। वहीं छोटी बेटी 12वीं में है और अब प्रदेश स्तर की मुक्केबाजी प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रही है।

नोएडा में कोई खास कोचिंग व्यवस्था न होने के कारण दोनों बेटियां दिल्ली जाकर कोचिंग ले रहीं हैं। रमेश ने नौकरी छोड़ दी है और घर चलाने के लिए छोटा-मोटा काम कर रहे हैं। लेकिन अभी काम इतना अच्छे से न चलने के कारण उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

रमेश ने बताया कि फिलहाल उनकी पत्नी ने जेवर गिरवी रखकर बेटी की कोचिंग की फीस दी है। उसे अगले महीने नेशनल खेलना है और उनका मानना है कि उसकी कोचिंग जेवरों से ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया, “पिछले दिनों दिल्ली सरकार से मैंने मदद मांगी थी कि कोचिंग की फीस में कुछ छूट मिल जाए या कहीं रहने की व्यवस्था हो जाए क्योंकि नोएडा में अभी कहीं भी बॉक्सिंग की कोचिंग की सुविधा नहीं है।”

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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