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महाराष्ट्र: भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़कर इस आइएएस अफ़सर ने किया निलंबित!

हाल ही में, महाराष्ट्र के पुणे जिला परिषद् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरज मंधारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा फैसला लेकर पुरे देश में अधिकारियों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है। वैसे तो यह पता लगाना आसान नहीं है कि आपके दफ्तर में सरकारी कर्मचारियों की प्रतिष्ठा को कौन धूमिल कर रहा है। लेकिन मंधारे ने अपनी सूझ-बुझ का परिचय देते हुए भ्रष्ट अधिकारियों का पता भी लगाया और उन्हें तुरंत सजा भी दी।

मंधारे पिछले हफ्ते से गुप्त रूप से, स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), गाँव के स्कूलों और कार्यालयों का दौरा कर रहे हैं। यह देखने के लिए कि काम कैसा हो रहा है और सभी अधिकारी अपना कर्तव्य ठीक से निभा रहे हैं या नहीं? वे सभी जगह अपनी निजी कार से आते-जाते थे और उन्होंने किसी को भी अपने इस मिशन के बारे में नही बताया था!

लेकिन जब वे इन सभी दफ्तरों पर पहुंचे तो उन्हें बहुत चौंकाने वाली स्थिति मिली- रिश्वत लेने वाले भ्रष्ट अधिकारी, कार्यालयों पर लगे ताले और लोगों से अपनी जी हुजुरी करवाने वाले कर्मचारी – लेकिन मंधारे ने इस सबसे निपटने की योजना पहले से बना रखी थी।

आइएएस अफसर सूरज मंधारे

मंगलवार को मंधारे पुणे के एक गाँव की ग्राम सेवक, प्रतिभा डोंगरे से मिले, जिन्होंने लगभग एक साल तक आर्थिक रिकॉर्ड नही बनाया हुआ था! मंधारे तुरंत उनके साथ बैठे, उपलब्ध रिकॉर्ड्स की छानबीन की और पाया कि उन्हें तो अधिकारिक काम के लिए पैसे मिले हैं पर गाँववालों को रसीद कभी भी नही मिली।

उन्होंने उसी वक़्त प्रतिभा को निलंबित कर दिया।

अगले दिन, बुधवार को वह पुणे के केटकवाल गाँव पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि ग्राम सेवक सुजय पोमन ने कार्यालय बंद कर रखा है और छुट्टी पर है – वह भी एक कामकाजी दिन पर! साथ ही, उन्होंने कोई आधिकारिक छुट्टी के लिए आवेदन भी दायर नहीं किया था, और उनके सहकर्मी भी काम पर नहीं थे।

डोंगरे की तरह, पोमन को भी तुरंत आईएएस अधिकारी से निलंबन पत्र मिल गया।

ग्राम विकास अधिकारी, पीएम लोनकर तो मानो सदमे में ही चले गये जब मंधारे ने उन्हें एक अवैध निर्माण के लिए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा।

फोटो स्त्रोत

पुणे मिरर से बात करते हुए मंधारे ने बताया, “यह मेरा कर्तव्य है कि मैं यह सुनिश्चित करूँ, कि सभी नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएँ मिलें। इसीलिए, एक निजी कार में इन सभी दफ्तरों का दौरा करके हकीकत जानने का फैसला किया और भ्रष्ट अधिकारियों को एक स्पष्ट सन्देश पहुँचाने के लिए हमने ऐसे सभी अधिकारियों को तुरंत निलम्बित करना शुरू किया।”

सभी पीएचसी, जहाँ भी कर्मचारी अनुपस्थित थे, परिसर गंदे थे व जिनके रिकार्ड्स आधे-अधूरे हैं, उन्हें कारण बताने का नोटिस दिया गया है और साथ ही चेतावनी भी दी गयी है कि उनका हाल भी पोमन और डोंगरे जैसा हो सकता है।

हालांकि, कुछ प्राइमरी स्कूलों के दौरे पर उन्हें ख़ुशी भी हुई, क्योंकि यहाँ सभी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए बहुत मेहनत कर रहे थे। वे क्लास में बच्चों का मन लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे।

वैसे यह पहली बार नही है जब मंधारे ने इस तरह के कदम उठाये है। इससे पहले भी जब उन्हें जिला परिषद् का अधिकारी घोषित किया गया था, तो उन्होंने सभी से बधाई के तौर पर लोगों से गुलदस्ते आदि की जगह किताबे भेजने के लिए कहा था। ताकि उन किताबों को आदिवासी बच्चों के लिए भेजा जा सके।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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