in ,

10 रूपये के इस यंत्र की मदद से अब महिलाएं कर सकती सार्वजनिक शौचालयों का सुरक्षित इस्तेमाल!

मारे देश में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति किसी से भी छुपी नहीं है। इन शौचालयों में बदबू और गंदगी की वजह से बहुत सारी बीमारियां भी फैलती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर होता है। उनके लिए इन शौचालयों को इस्तेमाल करना मतलब उनके स्वास्थ्य को खतरा!

“71% सार्वजनिक शौचालय नियमित रूप से साफ़ नहीं होते हैं और सबसे ज्यादा परेशानी औरतों को होती है क्योंकि वे इसके सीधे सम्पर्क में आती हैं, उन्हें टॉयलेट सीट पर बैठना ही होता है। और इनपर फैले कीटाणुओं से उन्हें बीमारी होने का पुरा खतरा रहता है,” ये कहना है सैनफी (सैनिटेशन फॉर फीमेल) के डेवलपर्स का।

सैनफी एक हाथ से इस्तेमाल किये जाने वाला आसान-सा यंत्र है, जिसे महिलाएं पेशाब करते वक़्त इस्तेमाल कर सकती हैं और फिर उसे फेंक सकती हैं।

सुरक्षित और स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय बहुत बड़ी समस्या हैं। लेकिन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली के दो छात्र हैरी सहरावत और अर्चित अग्रवाल ने अपने कुछ प्रोफेसरों के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढ निकाला है- पर्यावरण के अनुकूल यंत्र – सैनफी।

हैरी और अर्चित, आईआईटी-डी में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र हैं और उन्होंने सबसे पहले ये समझा कि कैसे उनकी महिला मित्र या सहपाठी किसी भी सफर के दौरान, गंदे और बदबूदार सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हो जाती हैं।

“हमने शहर भर में कई सार्वजनिक शौचालयों का दौरा किया, और लगभग सभी बहुत गंदे थे। आगे रिसर्च करने पर हमने पाया कि औरतों को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) होने के मुख्य कारणों में से एक पब्लिक टॉयलेट्स भी हैं,” सहरावत ने डीएनए को बताया।

हैरी और अर्चित ने छह महीने पहले सैनफी पर काम करना शुरू कर दिया था, और इसके साथ ही अपने महिला सहपाठियों को उनके अनुभवों के बारे में पूछना शुरू किया। लेकिन दोनों के सामने चुनौती थी, कि डिवाइस का साइज क्या रखा जाये ताकि इसे सभी महिलायें और लड़कियां इस्तेमाल कर सकें। बाद में एक एर्गोनॉमिक्स विभाग के प्रोफेसर ने उन्हें इस डिवाइस को डिजाइन करने में मदद की।

डिवाइस बन जाने पर उन्होंने अपनी महिला मित्रों को इसे इस्तेमाल करने के लिए दिया और उनसे फीडबैक के साथ-साथ सुझाव भी मांगे कि इसे महिलाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाजनक कैसे बनाया जाये।

स्त्रोत

“सैनफी की मुख्य तकनीक यह है कि यह टॉयलेट सीटों के साथ शरीर के संपर्क को पुरी तरह से खत्म करता है। इसे आप पर्स में ले जा सकते हैं और इसे एक प्रयोग के बाद आसानी से डिस्पोज़ किया जा सकता है,” सहरावत ने प्रकाशन को बताया।

इस डिवाइस का डिज़ाइन बिल्कुल अलग है। इसे पीरियड्स के दौरान भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे अपने ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है!

इसे आप एक हाथ से पकड़कर इस्तेमाल कर सकते हैं और एक हाथ से आप अपने कपड़े संभाल सकते हैं। ताकि औरतों को सूट, साड़ी पहनने पर भी दिक्क्त न हो।

स्त्रोत

बायोडिग्रेडेबल पेपर से बने इस उपकरण की कीमत मात्र 10 रुपये है और फिलहाल दिल्ली में एम्स के आसपास की फार्मेसियों में यह उपलब्ध है। हालांकि, जल्द ही इ-कॉमर्स वेबसाइट पर भी आप ऑनलाइन इसे खरीद सकते हैं। साथ ही, हैरी और अर्चित को अलग-अलग संस्थानों ने अब तक लगभग 50,000 यूनिट बनाने का प्री-ऑर्डर दिया है।

हैरी और अर्चित का कहना है, “सैनफी न केवल सार्वजनिक शौचालयों के लिए उपयोगी है, बल्कि गर्भवती महिलाओं, घुटनों के दर्द और पीठ के दर्द से पीड़ित महिलाओं के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि उन्हें शौचालय की सीट पर बैठने में बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है।”

आप वीडियो देख सकते हैं

कवर फोटो


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

शेयर करे

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

आपकी प्राइवेसी की रक्षा के लिए इस व्यक्ति ने आधार के खिलाफ किया था पेटिशन दर्ज!

अपनी भाभी के सती होने से आहत, राम मोहन राय बन गए आधुनिक भारत के निर्माता!