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मुंबई: अपने बच्चों के लिए इस माँ का विश्वास हम सबके लिए प्रेरणा है!

“मेरी नयी-नयी शादी हुई थी और लोगों ने मुझसे पूछना शुरू कर दिया कि मैं कब उन्हें ‘खुशखबरी’ दूंगी। मैंने उनसे कहा कि मैं जुड़वां बच्चे चाहती हूँ इसलिए उनकी खुशखबरी में दुगना वक़्त लगेगा। जब मैं माँ बनने वाली थी और  डॉक्टर से मिलने गयी तो  कि मुझे जुड़वे बच्चे होंगे! मैं बिना कुछ बोले बस बेड पर बैठ गयी। डॉक्टर को लगा कि मैं यह सुनकर घबरा गयी हूँ और इसलिए वे मुझे समझने लगे, लेकिन मैंने उन्हें रोका और बताया कि यह मेरा सपना था। मुझे पहले से ही पता था कि मेरे बच्चे बहुत खास हैं!

बचपन से ही, वे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। मेरी बेटी हमेशा से एक टॉमबॉय रही और उसे स्पोर्ट्स में दिलचस्पी है। और मेरे बेटे को आर्ट और डांस करना पसंद है। घर पर वे एक दूसरे के कपड़े पहनते। मेरी बेटी उसके पंत-शर्ट पहनती तो बेटा उसके फ्रॉक और दोनों बस इधर-उधर घूमते!

जब मैं ब्यूटीशियन का काम करती थी तो मेरा बेटा मेरे साथ जाता था। वो हमेशा मुंह में धागा लेकर मेरी नकल करता। 15 साल की उम्र तक वह लगभग हर चीज़ सीख गया था तो मैं करती थी। लोग कहते थे कि मुझे उसकी ‘लड़कियों’ वाली आदतें सुधारनी चाहियें। लेकिन मैंने फैसला किया कि मेरे बच्चे अपने जेंडर (लिंग) से बंधकर नहीं रहेंगें।

इसलिए मैंने अपने बेटे को उसकी पसंद का काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। वह अपनी बहन पर अलग-अलग हेयर स्टाइल ट्राय करने के लिए उसको मनाता। स्कूल में उसकी रूचि कला और डांस में बढ़ी। हालांकि, उसे लोगों के साथ एडजस्ट करने में दिक्क्त हुई।  पर फिर भी लोग उसे परेशान नहीं करते। क्योंकि उसके जुड़वां बॉडीगार्ड ने इस बात का ध्यान रखा।

उसे पता था कि जीवन को उससे 1 घंटे पहले शुरू करने का मतलब है कि उसे हमेशा उसकी रक्षा करनी है। मुझे कभी भी मेरी बेटी को यह समझने की जरूरत नहीं पड़ी!

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फोटो साभार: humans of bombay

मैं अपने बच्चों के जीवन को निर्देशित नहीं कर सकती। माता-पिता के रूप में उनकी रक्षा करना मेरा काम है। जब वे छोटे थे, तो एक दिन मैंने उन्हें बिठाकर समझाया कि चाहे जो भी मैं हमेशा उनके लिए रहूंगी। और यही बात मैंने मेरे बेटे को कही जब उसने मुझे अपने बारे में बताया। वो रो रहा था क्योंकि उसे लगा कि मुझे यह बताकर कि वह एक ‘गे’ है, वो मुझे दुःख पहुंचाएगा। लेकिन जो वह है, वही होने से वो मुझे दुःख कैसे पहुंचा सकता है। मैंने उसे कहा कि हमेशा वही याद रखना जो मैंने कहा था – ये ‘हम’ है इस दुनिया के खिलाफ!

हाल ही में, मेरे पति ने कहा कि हमारा बेटा 25 साल का हो गया है। हमे उसके लिए लड़की देखनी चाहिए। मैंने उनसे कहा कि जोड़ियां तो स्वर्ग में बनती हैं उसे भी उसका पार्टनर मिल जायेगा। जिस दिन सेक्शन 377 पर फैसला आया तो मैंने अपने पति से उस पर उनकी राय पूछी। वे सोचते हैं कि यह ‘पाप’ है।

हमने अभी तक मेरे पति को नहीं बताया है। लेकिन हम इसके लिए तैयार हो रहे हैं। जब मैं और मेरा बेटा इस सच के बारे में उन्हें बताएंगें तो मैं जानती हूँ कि बहुत से आंसू होंगे। लेकिन मैं सुनिश्चित करूंगी कि वे आंसू उसे अपनाने के हों।”

“When I was a newly wed, people started asking me when I’d give them the ‘good news’. I said I wanted twins, so it’ll…

Posted by Humans of Bombay on Friday, September 21, 2018


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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