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भारत के ऑनलाइन आगे बढ़ने के तरीकों में सुरक्षित व सस्टेनेबल बदलाव ला रहा ‘डिजिटल साइन’

जब भी कभी आप “डिजिटल सिग्नेचर” के बारे में सुनते या सोचते हैं, तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या विचार आता है? शायद, लैपटॉप या टैबलेट पर एक छोटा, खाली सफेद स्पेस, जहां आपको अपना हस्ताक्षर करना है। ठीक वैसे ही, जैसे आप कागज पर करते हैं, है न?

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इस लेख को Exela Technologies द्वारा स्पॉन्सर किया गया है।

जब भी कभी आप “डिजिटल सिग्नेचर” (Digital Sign) के बारे में सुनते या सोचते हैं, तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या विचार आता है? शायद, लैपटॉप या टैबलेट पर एक छोटा, खाली सफेद स्पेस, जहां आपको अपना हस्ताक्षर करना है। ठीक वैसे ही, जैसे आप कागज पर करते हैं, है न? 

हालांकि कुछ 15 साल पहले, यह परिभाषा ‘डिजिटल हस्ताक्षर प्रोडक्ट्स’ के कुछ शुरुआती प्रोटोटाइप के लिए बिल्कुल सही थी। लेकिन आज के समय में ये सिग्नेचर्स पहले से ज्याद सार्थक और सुरक्षित हो गए हैं।

डिजिटल हस्ताक्षर क्या है और इसका उपयोग कैसे करें?

डिजिटल सिग्नेचर, एक मैथमेटिकल तकनीक है, जिसका उपयोग डिजिटल दस्तावेज़ की सत्यता और प्रामाणिकता को मान्य करने के लिए किया जाता है। यह स्टैम्प्ड (मुहर) सील या हाथों से किए गए दस्तख़त के बराबर ही मान्य होता है, लेकिन यह ज्यादा सुरक्षित होता है। 

भारत में कई डिजिटल सिग्नेचर प्रोवाइडर्स हैं, जो बिजनेस के साथ-साथ व्यक्तियों को भी डिजिटल सिग्नेचर सॉल्युशन देते हैं। हालांकि, इसे इस्तेमाल करने के कई तरीके हैं। सबसे आम तरीका है, डिजिटल सिग्नेचर प्रोवाइडर की वेबसाइट या ऐप पर डॉक्यूमेंट अपलोड करना। दस्तावेज़ पर डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए, आप या तो खुद साइन करें, या फिर डिफ़ॉल्ट फॉन्ट का उपयोग करें। हस्ताक्षर करने के बाद, आमतौर पर आपको एक युनिक आईडी दिखेगी, जिससे यह कंफर्म होगा कि आपका हस्ताक्षर असली और विश्वसनीय है।

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ड्रायसाइन क्या है और यह कैसे अस्तित्व में आया?

ड्रायसाइन एक डिजिटल सिग्नेचर सॉल्युशन है, जो बिजनेस और लोगों के लिए, इंटरनेट कनेक्शन के ज़रिए कहीं से भी, कभी भी और किसी भी डिवाइस से, डॉक्यूमेंट्स साइन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। साथ ही ड्रायसाइन, डॉक्यूमेंट्स को कहीं भी भेजने और साझा करने में भी मदद करता है। ड्रायसाइन से व्यवसायों और व्यक्तियों को बिना किसी परेशानी के पेपरलेस वर्कफ़्लो का अनुभव मिलता है।

इसकी स्थापना के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। इसे आज की ज़रूरतों को देखते हुए बनाया गया था। ड्रायसाइन की सफलता के पीछे एक्सेला टेक्नॉलजीज़ का हाथ है।  साल 2018 में, कंपनी को यह महसूस होने लगा था कि उनकी ओवरहेड लागत बहुत अधिक है। खर्चों का बारीकी से ऑडिट करने के बाद, एक्सेला के प्रबंधन ने पाया कि वे थर्ड पार्टी सिग्नेचर प्रोवाइडर्स, कागज और मेलिंग डॉक्यूमेंट्स पैकेजों पर बहुत अधिक खर्च कर रहे थे।

तभी उन्होंने अपना, एक मजबूत डिजिटल सिग्नेचर सॉल्युशन बनाने पर फोकस करने का फैसला किया। एक्सेला टेक्नॉलजीज़ ने ड्रायसाइन में शिफ्ट होने के बाद, साल 2018 से, वैश्विक स्तर पर 4.3 मिलियन अमेरीकी डॉलर (31 करोड़ रुपये) से अधिक की बचत की है।

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डिजिटल सिग्नेचर ने COVID-19 महामारी के दौरान कैसे की मदद?

महामारी शुरू होने के ठीक बाद, साल 2020 में अमेरिका और कनाडा में ड्रायसाइन को लॉन्च किया गया था। उन्होंने डिजिटल उपकरणों के विकास और मांग में बढ़ोतरी देखी, क्योंकि कोरोना के कारण रिमोट वर्क और सामाजिक दूरी के नियम बनने लगे थे। उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र में एक सफल लॉन्च के बाद, एक्सेला ने इनकी वैल्यूज़ को और बढ़ावा देने के लिए, भारत में ड्रायसाइन लॉन्च करने का फैसला किया। इस महामारी के दौरान, ड्रायसाइन ने साबित किया कि यह कंपनी छोटे-बड़े सभी व्यवसायों की सहायता करने में सक्षम है। तो आइए जानें इसके कुछ फायदे:

  • 100% संपर्क रहित: हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के पास घर बैठे हस्ताक्षर करने की क्षमता।
  • फास्ट टर्न-अराउंड टाइम: खासकर अंतरराष्ट्रीय मेलिंग (जहां पैकेज को पहुंचने में कई दिन लग सकते हैं।) की तुलना में, इसका मेलिंग टाइम ज़ीरो है।
  • सुरक्षित और सुरक्षा एन्क्रिप्टेड स्टोरेज: सभी दस्तावेज़ एन्क्रिप्ट किए गए हैं और हैकर्स से सुरक्षित हैं। 
  • दुनिया भर में त्वरित पहुँच: जगह की कोई बाध्यता नहीं, कहीं से भी हस्ताक्षर करें।
  • रख-रखाव और ट्रांसपोर्ट की लागत: पारंपरिक कागजी हस्ताक्षरों की तुलना में यह लागत लगभग शून्य है। 
  • सस्टेनेबल समाधान: यह कागज और फिजिकल स्टोरेज की आवश्यकता को कम करता है।

डिजिटल हस्ताक्षर पर्यावरण की कैसे मदद करते हैं?

अगर आप जलवायु परिवर्तन कम्युनिटी में सक्रिय हैं, तो आपने शायद “12 Years to Act on Climate Change” के बारे में सुना होगा। सरल शब्दों में, इसका मतलब है, “इससे पहले कि हम अपने क्लाइमेट चेंज में कभी न ठीक होने वाली क्षति देखें, क्लाइमेट चेंज साइंटिस्ट्स ने हमें 2019 में, जलवायु परिवर्तन पर ठोस कदम उठाने के लिए 12 साल का समय दिया है, जिसमें से लगभग 2 साल खत्म हो चुके हैं।

एक चीड़ के पेड़ को पूरी तरह से विकसित होने में लगभग 25-30 साल लगते हैं। ड्रायसाइन पर स्विच करने के बाद, सिर्फ 3 साल में, एक्सेला ने लगभग 600 रिम्स कागज़ की बचत की है, जो लगभग 27 पूरी तरह से विकसित चीड़ के पेड़ों के बराबर हैं। 

हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा बदलाव, भविष्य पर एक खूबसूरत सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

अधिक जानकारी के लिए website पर जाएँ।

संपादन – मानबी कटोच

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