Search Icon
Nav Arrow
Sustainable House

पत्थर, मिट्टी के ब्लॉक और कटोरों का इस्तेमाल कर बनाया घर

बेंगलुरु के बिद्दप्पा सी बी का घर इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल तरीकों से बना है, जहां भरपूर मात्रा में प्राकृतिक रौशनी और ताज़ी हवा आती है।

Advertisement

शहरी इलाके में आपको इमारतें अक्सर एक जैसी ही दिखेगी। अपार्टमेंट से लेकर अन्य किसी भी घर को आप देखेंगे तो उसकी बनावट लगभग एक जैसी नजर आती है। विकास की अंधी दौर में हम सब प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी प्रकृति के अनुरूप घर बनाने में विश्वास रखते हैं। आज हम आपको बेंगलुरु के एक ऐसे ही शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने इको-फ्रेंडली तकनीक से घर तैयार किया है।

बतौर आईटी प्रोफेशनल काम करने वाले बिद्दप्पा सी बी मूल रूप से कर्नाटक के कोडागु जिला से हैं। इस इलाके में उन्होंने बचपन से पारंपरिक तरीकों से बने घर देखे थे। लेकिन बड़े शहरों में एक ही जैसी बड़ी-बड़ी इमारतें देखने को मिलती हैं। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अगर वह कभी अपना घर बनाएंगे तो वह प्रकृति के अनुकूल होगा। 

आज से लगभग छह साल पहले बिद्दप्पा ने अपने घर का निर्माण कराया था। घर के निर्माण के लिए उन्होंने ज्यादा से जुडा इको-फ्रेंडली सामग्री और निर्माण तकनीकों को अपनाया है। उनका घर तीन मंजिला है लेकिन यह सामान्य घरों की तरह नहीं है। बल्कि उन्होंने घर के लिए ‘स्प्लिट-लेवल‘ डिज़ाइन का इस्तेमाल किया है। जिसके कारण उनका घर और भी सुंदर और आकर्षक दिखता है। 

बिद्दप्पा ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैं अपने घर को ऐसा लुक देना चाहता था, जैसा कि ग्रामीण इलाकों में घरों का होता है। इसके साथ ही मेरी कोशिश रही कि घर प्रकृति के करीब हो। इसलिए हमने एक-एक करके कदम बढ़ाया है। मैंने सस्टेनेबल चीजों को प्राथमिकता दी है।” 

‘क्ले ब्लॉक’ से हुआ है घर का निर्माण 

उन्होंने आगे बताया कि घर के निर्माण के लिए सामान्य ईंटों की जगह ‘क्ले ब्लॉक‘ का इस्तेमाल किया गया है। क्योंकि इनमें ज्यादा भार सहने की क्षमता होती है और साथ ही, इनकी उष्मीय क्षमता (थर्मल एफिशिएंसी) भी अच्छी होती है। इसलिए उन्होंने अपने घर के निर्माण के लिए इनका प्रयोग किया है। चिनाई के लिए सीमेंट और मैन्युफैक्चर्ड रेत का (M-Sand) इस्तेमाल किया है। घर की दीवारें क्ले ब्लॉक से बनी हैं और सीढ़ियां बनाने के लिए स्थानीय तौर पर उपलब्ध पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। 

ये पत्थर थोड़े खुरदरे होते हैं और इसलिए अक्सर लोग इन्हें चिकना करने के लिए घिसवा लेते हैं। जिसमें पानी और ऊर्जा लगती है। लेकिन बिद्दप्पा ने इन्हें प्राकृतिक रूप में ही इस्तेमाल किया है। उन्होंने पत्थरों को घिसवाया नहीं है और इससे उनका घर की सुंदरता और बढ़ती है। उनका कहना है कि जितना चीजों को उनके प्राकृतिक रूप में रखा जाए उतना ही अच्छा रहता है। क्ले ब्लॉक और पत्थर काफी अच्छे इंसुलेटर होते हैं। इसलिए उनके घर का तापमान गर्मियों में बाहर से कम रहता है और सर्दियों में उनका घर हल्का-सा गर्म रहता है। 

बिद्दप्पा ने घर में फर्श के लिए लाल और पीली ऑक्साइड टाइल्स का इस्तेमाल किया है। हाथों से बनी ये टाइल्स किफायती और सस्टेनेबल होती हैं। पुराने घरों में आज भी आपको ऑक्साइड फ्लोरिंग मिलेगी क्योंकि यह प्रकृति के अनुकूल होती है। 

लगभग 40% कम सीमेंट का इस्तेमाल 

Sustainable House

Advertisement

बिद्दप्पा कहते हैं, “घर के निर्माण में प्लास्टर और आरसीसी छत बनाने में सबसे ज्यादा सीमेंट का प्रयोग होता है। हम सब जानते हैं कि प्रकृति के दृष्टि से सीमेंट जितना कम इस्तेमाल किया जाए उतना अच्छा रहता है। इसलिए हमने ऐसे पारंपरिक तकनीकों का सहारा लिया जिसमें सीमेंट की जरूरत बहुत कम पड़ती है। मैंने बाथरूम के हिस्से को छोड़कर, अन्य किसी भी जगह सीमेंट का प्लास्टर नहीं किया गया है। यहां तक कि घर की दीवारों को पेंट भी नहीं किया है। दरअसल क्ले ब्लॉक इस्तेमाल करने से न तो प्लास्टर करने की जरूरत पड़ती और न ही पेंट की।” 

बिद्दप्पा कहते हैं, “बिना पेंट के दीवारें प्राकृतिक लगती है। इसके अलावा, हमने छत बनवाने के लिए आरसीसी की जगह ‘फिलर स्लैब’ तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक में छत को पूरी तरह से कंक्रीट बनाने की बजाय, नीचे के हिस्से में कोई दूसरा मटीरियल इस्तेमाल किया जाता है। जिसके कारण सीमेंट की कम खपत होती है और आपकी छत भी पर्यावरण के अनुकूल बन जाती है। घर के जिन भी हिस्सों पर सीधी धूप पड़ती है, वहां हमने मिट्टी के कटोरों का इस्तेमाल ‘फिलर’ के रूप में किया है।” 

दूसरी जगहों पर भी उन्होंने फिलर स्लैब तकनीक का ही इस्तेमाल किया है, लेकिन फिलर के लिए दूसरे मटीरियल को उपयोग में लिया गया है। इस तकनीक को अपनाने से छत के निर्माण में लगभग 20% तक सीमेंट और स्टील का कम इस्तेमाल होता है। 

सहेजते हैं बारिश का पानी 

Sustainable House

उन्होंने आगे बताया कि इको-फ्रेंडली मटीरियल और तरीकों से घर बनाने के कारण उनके घर का तापमान संतुलित रहता है। उनके घर में एसी या कूलर भी नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनवाया है। इसकी क्षमता 4000 लीटर बारिश का पानी इकट्ठा करने की है। उन्होंने बताया कि बारिश का पानी का इस्तेमाल वह घर में साफ-सफाई के कामों में और पौधों की सिंचाई में करते हैं। इसके अलावा, उनके घर में एक बोरवेल भी है। पिछले काफी समय से गर्म पानी के लिए वह सोलर हीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

घर के ग्राउंड फ्लोर और छत पर वह बागवानी भी करते हैं। छत पर वह करी पत्ता, टमाटर जैसी चीजें उगाने की कोशिश करते हैं और बागवानी के लिए वह बारिश का पानी इस्तेमाल में लेते हैं। साथ ही, उनके घर का गीला कचरा भी पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल होता है। “आने वाले समय में हमारी कोशिश है कि हम अपने घर के लिए सौर सिस्टम लगवाएं ताकि ग्रिड पर निर्भरता कम हो। इसके अलावा, हमें अपना किचन गार्डन भी बढ़ाना है। लेकिन ये सब चीजें आप धीरे-धीरे ही कर सकते हैं। इसलिए हम एक-एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं और एक बेहतर जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं,” उन्होंने अंत में कहा। 

संपादन- जी एन झा

यह भी पढ़ें: स्किन केयर से होम क्लीनर तक, सबकुछ खुद बनाकर ज़ीरो वेस्ट लाइफ जी रही हैं यह ISRO साइंटिस्ट

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें।

Advertisement
close-icon
_tbi-social-media__share-icon