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महाराष्ट्र के इस पर्यटन स्थल पर अब आप पानी में डूबे मंदिरों के भी कर पाएंगे दर्शन!

उज्जैनी बांध/उज्जनी बांध

हारष्ट्र के पुणे में सरकार ने उज्ज्नी बांध के आस-पास की विरासत को एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में तब्दील करने का निर्णय लिया है।

पिछले हफ्ते, राज्य पर्यटन विभाग के आदेश पर, सिंचाई विभाग ने इस उद्देश्य के लिए पुणे से लगभग 80 किमी दूर इंदापुर के पास उज्जनी के तट पर 10 एकड़ जमीन देने का फैसला किया है। “हम पिछले दो सालों से पर्यटन केंद्र बनाने के लिए इस भूमि को देने के लिए जल संसाधन विभाग से बात कर रहे हैं। आखिरकार, उन्होंने अपनी सहमति दी है और इंदापुर के पास की जमीन जल्द ही विकास के लिए उपलब्ध हो जाएगी,” महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एमटीडीसी), पुणे के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक हरने ने बताया

यहां का मुख्य आकर्षण स्कूबा डाइविंग और बोटिंग को रखा जाएगा। रिसॉर्ट में लैंडस्केप गार्डन के साथ-साथ कैंपिंग की सुविधाएं भी होंगी।

विकिमीडिया कॉमन्सइसके अलावा यहां की सबसे महत्वपूर्ण विरासत पलसदेव गाँव में स्थित पलसनाथ मंदिर है, जो कि 9वीं और 11 वीं शताब्दी के बीच बनवाया गया था। पलसदेव राजा नलहंस की राजधानी थी। इसी के पास एक और जगह है – पेडगांव, जहां तीन प्रसिद्द मंदिर हैं- बालेश्वर मंदिर, राम मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर।

पलसनाथ मंदिर

राम मंदिर में आप दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी देख सकते हैं। इसके अलावा, वांगी नामक पुराने गांव में एक और तुलिजा भवानी मंदिर है। लेकिन इनमें से कई मंदिर उचित रख-रखाव न होने के कारण क्षीण दशा में हैं। उज्जनी बांध के पास लगभग 28 गांवों के मंदिर हैं।

राम मंदिर

अकेले वांगी में विभिन्न देवताओं के लिए चार प्राचीन मंदिर हैं- सिद्धेश्वर, खंडोबा, लक्ष्मी और नागनाथ। इसके आलावा पोमालवाडी, केट्टूर चिखलाथन, पारेवाड़ी, कुगायन, बिटरगांव, सांगवी, ढोकरी, ताकली, कोंधर-चिंचोली समेत अन्य कई गांवों में पुराने मंदिर हैं।

“उज्जानी जल में डूबने वाले प्राचीन मंदिरों और विरासतों पर बहुत कम दस्तावेज है। लेकिन सरकार द्वारा यह पहल इतिहासकारों और पुरातत्व शोधकर्ताओं को इन पर काम के लिए हौंसला देती है,” पुरातत्व और संग्रहालयों के राज्य निदेशालय के सहायक निदेशक विलास वाहने ने कहा

राज्य में सबसे बड़े जलाशयों में से एक, उज्जानी बांध पुणे, अहमदनगर और सोलापुर के तीन जिलों में पेय और सिंचाई के पानी की आपूर्ति करता है। इसके अलावा इसके आस-पास न जाने कितने ही प्यासे पक्षी भी आते हैं।

हालांकि, आशा जताई जा रही है कि विकास का कार्य जल्द ही शुरू होगा और यह जगह पर्यटन के लिए देश-विदेश से लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी।

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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