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Road Trip to Ladakh

पैसे नहीं तो क्या? जज़्बा तो है! स्कूटी से की हैदराबाद से लद्दाख तक की सैर

प्रदीप ने हैदराबाद से लेह-लदाख तक का सफर किसी महँगी बाइक या फ्लाइट से तय नहीं किया है। वह अपनी एक्टिवा स्कूटी पर हैदराबाद से लद्दाख पहुंचे हैं।

कुछ लोगों के लिए घूमने का मतलब बस कहीं जाकर छुट्टियां मनाना होता है। ताकि उन्हें रोज की भागती-दौड़ती जिंदगी से एक ब्रेक मिले। तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए ट्रैवलिंग पैशन है। वे आराम के लिए नहीं, बल्कि नयी-नयी जगहों, रास्तों और लोगों को जानने के लिए घूमते हैं। उनकी हर एक यात्रा, एक अनुभव की तरह होती है। इसलिए वे हर बार, नए-नए तरीकों से घूमते हैं। जैसे, कोई पैदल हिमालय तक जाना चाहता है, तो कोई बाइक से लद्दाख जाना चाहता है। कुछ समय पहले ही, हमने आपको निधिन की कहानी सुनाई थी, जो साइकिल पर चाय बेचते हुए कश्मीर तक घूम आए। इसी तरह, आज एक और घुम्मकड़ी के शौक़ीन शख्स की कहानी हम आपको बता रहे हैं। यह कहानी है, हैदराबाद के रहनेवाले प्रदीप कुमार की, जो आजकल लेह और लद्दाख की यात्रा (Road Trip to Ladakh) कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रदीप ने हैदराबाद से लेह तक का सफर किसी हाई-ऐंड बाइक या ट्रैन-फ्लाइट से तय नहीं किया है। दरअसल वह अपनी एक्टिवा स्कूटी पर हैदराबाद से लद्दाख पहुंचे हैं और अब आसपास के इलाकों की सैर भी अपनी स्कूटी से ही कर रहे हैं। 

हैदराबाद से लद्दाख (Road Trip to Ladakh) पहुँचने की अपनी यात्रा में, उन्होंने बहुत सी चुनौतियों का सामना भी किया, लेकिन हार नहीं मानी। 

Pradeep Kumar from Hyderabad Traveling on Scooty to Ladakh

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने इस सफर के बारे में बताया, “घूमना मेरा पैशन है। मैंने इससे पहले भी कई जगहों की यात्रा की है। लेकिन पहले ज्यादातर बस से ही जाना हुआ। यह पहली बार है कि इतनी लंबी दूरी मैंने स्कूटी पर तय की है और यह बहुत ही सुखद अनुभव है।” 

करते हैं फ़ूड डिलीवरी बॉय का काम

प्रदीप ने बताया कि हैदराबाद में वह पिछले तीन-चार सालों से डिलीवरी बॉय का काम कर रहे हैं। पढ़ाई में ज्यादा अच्छे न होने के कारण वह अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी नहीं कर पाये। उनके पिता भी अपने काम से 10-15 हजार रुपए ही कमा पाते हैं। जिससे उनका घर चलता है। इसलिए, वह पहले Uber Eats और अब Zomato के साथ डिलीवरी बॉय का काम करने लगे। इसके साथ ही, उन्हें अलग-अलग जगहों की यात्रा करने का बहुत शौक है। बाइक से लद्दाख की यात्रा (Road Trip to Ladakh) करने की उनकी काफी समय से इच्छा थी। लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। क्योंकि ट्रेवलिंग के लिए एक High-End Bike खरीदना उनके लिए मुमकिन नहीं था। इसलिए उन्होंने अपनी स्कूटी को ही यात्रा के लिए तैयार किया। 

वह बताते हैं, “मेरे पास अपनी कुछ बचत थी और इसके अलावा, मैंने अपने दोस्तों और जान-पहचान वालों से भी मदद मांगी। मैं खुद को बहुत ही खुशनसीब समझता हूँ कि लोगों ने बहुत ही प्यार से मेरी मदद की। किसी ने 500 रुपए दिए, तो किसी ने 1000 रुपए। आज अगर मैं अपनी यात्रा कर पा रहा हूँ, तो ये इन लोगों की मदद से और दुआओं से ही है।” 

Bag and Helmet for Road Trip

19 जून 2021 को प्रदीप ने हैदराबाद से अपनी यात्रा (Road Trip to Ladakh) शुरू की थी। अपने साथ उन्होंने कुछ कपड़े और खाने-पीने का सामान लिया। इसके अलावा, रास्ते के लिए एक कैन में पेट्रोल का भी इंतजाम किया, ताकि अगर कहीं स्कूटी में पेट्रोल खत्म हो जाए और पेट्रोल पंप न मिले, तो वह इसका इस्तेमाल कर सकें। प्रदीप ने अकेले ही अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि, उन्हें इस तरह के सफर का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उनके दिल में अपनी मंजिल तक पहुँचने का जुनून था। 

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रास्ते में मिले नये-नये साथी

अपने सफर में, उन्होंने लगभग 10 राज्यों के अलग-अलग शहरों को पार किया। इन राज्यों में तेलांगना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली आदि शामिल हैं। लगभग 10 दिनों में वह लद्दाख पहुँच गए और अब कश्मीर की यात्रा भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “पहले दिन मैंने लगभग 300 किमी का रास्ता तय किया और दूसरे दिन की शाम तक मैं मध्य प्रदेश पहुंचा। तीसरे दिन की शाम तक, मैं मध्य-प्रदेश के सागर से उत्तर-प्रदेश के आगरा तक पहुँच गया। आगरा में मेरी मुलाकात संजय जी और मंगल जी से हुई, जो एक बाइक राइडर क्लब के फाउंडर भी हैं। उनके साथ मुझे रुकने का मौका मिला और उनसे लेह और लद्दाख के बारे में बहुत कुछ जाना क्योंकि वे खुद दो बार लद्दाख की यात्रा कर चुके हैं।” 

चार दिनों में प्रदीप ने हैदराबाद से दिल्ली तक की दूरी तय की। इसमें बीच-बीच में वह रुके भी थे। उन्होंने यह यात्रा भले ही अकेले शुरू की थी, लेकिन रास्ते में उन्हें बहुत से साथी मिल गए। कोई उन्हें खाने के लिए ऑफर करता, तो कुछ ने अपने साथ रुकने की भी जगह दी। प्रदीप कहते हैं, “पांचवे दिन, मैं दिल्ली से पंजाब के पठानकोट पहुंचा और वहां से मुझे मशहूर तेलुगु युट्यूबर विजय गौड़ का साथ मिल गया। विजय अपने ट्रेवल ब्लॉग यूट्यूब पर पोस्ट करते हैं और उनके अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। मैंने लगभग दो साल पहले उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन कर नहीं पाया था। लेकिन इस यात्रा में मैंने काफी समय उनके साथ बिताया और उन्होंने भी मेरी मदद की।” 

Meeting New People in Travel

जम्मू-कश्मीर पहुंचने पर उन्हें अपनी स्कूटी की सर्विसिंग करानी पड़ी और साथ ही, अपना कोविड टेस्ट भी कराया। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में प्रीपेड नंबर काम नहीं करते हैं, तो उन्होंने एक नया सिमकार्ड भी लिया और इस तरह वह नौवें दिन लद्दाख पहुंचे। 

“लद्दाख के बारे में जितना सुना है, यह उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। मुझे लेह में घूमने के लिए एक परमिट बनवाना पड़ा, लेकिन यह प्रक्रिया काफी आसान है और ऑनलाइन है। मुझे लेह पहुँचने में लगभग 10 दिन लगे। तीन-चार दिन लेह-लद्दाख घूमने के बाद, अब मैं श्रीनगर की तरफ बढ़ रहा हूँ,” उन्होंने बताया।

प्रदीप की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। अभी उन्हें वापस भी लौटना है। उनका अब तक का सफर बहुत ही शानदार रहा है। हालांकि, ऐसे भी कई मौके रहे, जब उन्हें भूखा रहना पड़ा। लेकिन स्कूटी पर लेह पहुँचने के उनके सपने ने, उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। वह कहते हैं कि उनकी अब तक की यात्रा लोगों की मदद से पूरी हुई है और उन्हें यकीन है कि लोगों की मदद से ही, वह अपने घर भी पहुँच जाएंगे। फ़िलहाल, वह अपनी यात्रा का आनंद ले रहे हैं। लोगों से वह बस यही कहते हैं कि सबको अपने सपनों को एक मौका जरूर देना चाहिए। साथ ही, अगर आप किसी के सपनों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं, तो जरूर करें। जैसे कि उनकी बहुत से लोगों ने की है और आगे भी उन्हें उम्मीद है कि लोग उनकी मदद करेंगे।

अगर आप उनकी यात्रा के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, या किसी भी तरह से उनकी मदद करना चाहते हैं, तो फेसबुक या इंस्टाग्राम पर उनसे संपर्क कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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