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गुरुग्राम : प्रोग्रामर रह चुका यह किसान, बिना मिट्टी की खेती से अब हर महीने कमाता है रु. 50000!

ज हमारे देश में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

1. बेमौसम बरसात या सूखा
2. खेती योग्य भूमि की कमी
3. और वर्षों से रसायनों के भारी उपयोग से बंजर हुई ज़मीन

पर क्या हो अगर हम इन सबसे लड़ने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद लें? कैसा हो अगर मौसम को बदलना किसान के हाथ में हो? क्या हो अगर खेती के लिए मिट्टी की ज़रूरत ही न हो?

जी हाँ, यह सब हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से संभव है, यह खेती मिट्टी के बिना एक पॉलीहाउस में की जाती है!

आज हम एक ऐसे किसान के बारे में आपको बताएंगें, जिन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल करके, फ़सल उगाई है। और आज वे खेती से अपनी आईटी की नौकरी से भी ज्यादा कमा रहे हैं।

हरियाणा के सैयदपुर गाँव में एक किसान के परिवार में पैदा हुए, विपिन राव यादव ने कभी भी किसान बनने के बारे में नहीं सोचा था। उनके पिता एक पारंपरिक किसान थे जो खेती के घाटे से भली-भांति परिचित थे। इसलिए उन्होंने विपिन को पढ़ाई के लिए गुरुग्राम भेज दिया।

विपिन ने बताया, “मेरे पापा हमेशा से चाहते थे कि हम अच्छी नौकरी करें। इसलिए मेरे भाई ने बी. टेक किया और मुझे भी कंप्यूटर साइंस पढ़ने के लिए कहा गया।”

2015 में बीएससी कंप्यूटर्स में डिग्री प्राप्त करने के बाद, विपिन को एक कंपनी में नौकरी मिली लेकिन आय इतनी नहीं थी कि गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में आराम से जीवन-यापन कर पाएं। इसलिए वे रोज़गार के दूसरे विकल्प खोजने लगे। तब उन्हें उनके एक दोस्त ने पास के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में जाने का सुझाव दिया, जहां फूलों की सुरक्षात्मक खेती में प्रशिक्षण के लिए इंटरव्यू चल रहे थे।

यहीं से उनकी ज़िन्दगी में सबसे बड़ा बदलाव आया।

“भारतीय कृषि कौशल परिषद ये इंटरव्यू ले रही थी। मैं बचपन में अपने पापा की खेतों में मदद करता था इसलिए मैंने उनके ज्यादातर सवालों के जबाब दे दिए और मेरा चयन हो गया,” विपिन ने बताया।

एक महीने में 200 घंटे के इस प्रशिक्षण ने विपिन की आँखें खोल दी। इन सभी चुने हुए प्रतिभागियों को आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) और अन्य कृषि अनुसंधान केंद्रों में ले जाया गया। उन्होंने देश भर के कुछ सबसे सफ़ल किसानों से भी मुलाकात की।

विपिन ने हाइड्रोपोनिक्स और अन्य नई तकनीको के बारे में सीखा, जो खेती में चमत्कार कर सकती थी। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने फ़ैसला किया कि वह सुनिश्चित करेंगे कि उनके गाँव के किसानों को इस तकनीक के बारे में पता चले और वे इसे इस्तेमाल कर सकें।

मार्च 2016 में विपिन ने अपनी प्रोग्रामर की नौकरी छोड़ दी और किसान बनने के लिए अपना प्रशिक्षण पूरा किया।

उनका अगला कदम सैयदपुर में अपने पिता के 8 एकड़ के खेत में 100 वर्गफुट क्षेत्र में एक पॉलीहाउस बनाना था। उसके बाद उन्होंने 50 ग्रो ट्रे (हाइड्रोपोनिक खेती के लिए उपयोग की जाने वाली) और फूलों के बीज खरीदे।

“मैंने शुरू में अपनी नौकरी के दौरान की गयी बचत के लगभग डेढ़-दो लाख रूपये का निवेश किया। सभी ने मेरा मज़ाक उड़ाया, क्योंकि उन्होंने कभी भी बिना मिट्टी के खेती के बारे में सुना ही नहीं था। मेरे पिता ने भी नहीं सुना था, इसलिए उन्हें लगा कि किसी ने मुझे बहका दिया है,” विपिन कहते हैं।

हालांकि, मात्र एक महीने के भीतर विपिन ने हर एक ग्रो ट्रे में करीब 102 फूलों की खेती करके सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। विपिन के अनुसार, हाइड्रोपोनिक्स फलों, सब्जियों और फूलों को विकसित करने का सबसे स्वच्छ तरीका है।

क्योंकि,

1. ग्रो ट्रे में केवल कोको-पिट, वर्मीक्युलाइट और परलाइट का उपयोग किया जाता है। बीज दिए गए छेद में बोए जाते हैं और अंकुरित होने तक पानी दिया जाता है। इसका मतलब है कि मिट्टी के जैसे आम कीट यहां नहीं होते हैं।

2. तापमान विशेष फूल, फल या सब्जी की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है, तो उतरते-चढ़ते तापमान के कारण कोई कीट पेड़ों को ख़राब नहीं करता है।

3. ग्रो ट्रे में मिश्रण का अनुपात हमेशा पोषक तत्वों के अनुसार बदला जा सकता है।

विपिन का दावा है कि ये फल और सब्जियां बहुत पौष्टिक हैं, क्योंकि पौधे के विकास के लिए हाल ही में खोजे गये कोबाल्ट समेत सभी 17 पोषक तत्व, उन्हें विकसित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मिश्रण में मौजूद हैं। इसके अलावा, कोई भी पॉलीहाउस में तापमान को नियंत्रित कर सकता है और बिना मौसम वाली फसल भी उगा सकता है।

हालांकि, विपिन को अपनी पहली उपज प्राप्त करने के लिए कई परेशानियाँ झेलनी पड़ीं और उन्होंने अधिक लाभ भी नहीं कमाया, लेकिन वह कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के आभारी हैं, जिन्होंने उनके खेत का दौरा किया और उन्हें अगली फसल के लिए उचित निर्देश दिए।

वह हँसते हुए कहते हैं, “मुझे खेती करते हुए कुछ ही वक़्त हुआ था और मेरे दिमाग में तो पूरी प्रोग्रामिंग भरी थी।”

“मैंने शुरुआत में कई गलतियां की, लेकिन फिर उचित मार्गदर्शन और इंटरनेट पर रिसर्च ने मुझे सफल होने में मदद की। मैं सभी किसानों को कम से कम एक बार अपने पास के केवीके जाने और खेती में उपयोग की जाने वाली नई तकनीकों के बारे में जानने की सलाह दूंगा। मेरे पास किसान परिवारों से आये युवाओं के लिए केवल एक संदेश है, जो आज ‘आउट ऑफ़ द बॉक्स’ वाली नौकरियों के पीछे दौड़ रहे हैं। खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं है, लेकिन यह एक लाभदायक व्यवसाय हो सकता है यदि आप इसे बुद्धिमानी से करते हैं,” विपिन ने कहा।

एक साल के भीतर, विपिन ने गुरूग्राम में 1800 वर्गफुट किराए पर लिया व एक और पॉलीहाउस बनाया है। अब वह 2500 ग्रो ट्रे के मालिक हैं और हर महीने में लगभग 2.5 लाख फूल उगाते हैं।

फूलों को पास की नर्सरी में 6 इंच के गमले और गुरूग्राम के डीएलएफ फेज़ 1 और फेज़ 4 के बाजारों में फूलों की दुकानों पर बेचा जाता है। साइबर पार्क में भी दुकानों के साथ उनका बिजनेस है।

मात्र 21 साल की उम्र में खेती को एक नयी दिशा दिखाने वाले विपिन आख़िर में कहते है, “मैं अब हर महीने 40,000-50,000 रुपये कमा रहा हूँ। आजकल समाचार चैनल भी इसके बारे में और जानने के लिए मेरे खेत में आते हैं। मुझे खुशी है कि मेरे गाँव में युवा अब मेरी तरफ सम्मान से देख रहे हैं और इस तकनीक के बारे में जानने के लिए मुझसे संपर्क करते हैं। और जब भी कोई मेरी कहानी लिखता है, तो मेरे पिता गर्व से कहते हैं कि यह मेरा बेटा है, और ये एक किसान है।”

विपिन लोगों को प्रशिक्षित भी करते हैं। आप 9991706588 पर उससे संपर्क कर सकते हैं।

संपादन व मूल लेख – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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