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पंजाब के छोटे से गाँव से निकल देश भर में पहचान बना रही हैं ये तीन बहनें, पिता हैं ऑटो-ड्राइवर!

पंजाब में तरनतारन के मुगलचक्क पनमां गांव से ताल्लुक रखने वाली राजविंदर कौर इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी हैं और फिलहाल बंगलुरु में चल रहे हॉकी सीनियर इंडिया कैंप में हैं। 20 वर्षीय राजविंदर कौर इससे पहले बैंकाक, थाईलैंड में आयोजित जूनियर एशिया कप में खेल चुकी हैं और वह अभी टीम इंडिया में आने की तैयारी कर रही हैं।

राजविंदर की दो छोटी बहनें हैं- मनदीप कौर और वीरपाल कौर। मनदीप राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी हैं तो वीरपाल भी नेशनल लेवल रेसलर हैं। मनदीप अभी कॉलेज में हैं और वीरपाल कौर लखनऊ में खेलो इंडिया कैंप में रेसलिंग की कोचिंग ले रही हैं। वीरपाल साल 2017 में जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

ये तीनों बहने मेडल जीतकर देश का सर गर्व से ऊंचा कर रही हैं। पर अपनी सफलता का सारा श्रेय ये अपने पिता सरदार सरबंत सिंह को देती हैं। जिन्होंने अपनी बेटियों का हर कदम पर साथ दिया।

सरबंत सिंह एक ऑटो चालक हैं। लेकिन फिर हर मुश्किल का सामना करते हुए उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सरबंत कहते हैं कि अपनी बेटियों की ख़ुशी के लिए उन्होंने उन्हें खेलने दिया। लेकिन उन्होंने कभी भी नहीं सोचा था कि वे इस ऊंचाई तक पहुंचेंगी और देश के लिए मेडल जीतेंगी।

अपनी तीनों बेटियों की सफलता में उनकी माँ बलविंदर कौर का बहुत योगदान रहा है। वे अपनी बेटियों को घर से 10 किमी. दूर श्री गुरु अर्जन देव हॉकी एकेडमी में रोज हॉकी की कोचिंग के लिए ले जाती थीं। वे बताती हैं कि कोच शरणजीत सिंह और पूर्व ओलंपियन दलजीत ढिल्लों ने भी हर स्तर पर उनके परिवार की मदद की।

आज जब भी कोई तीनों बहनों की प्रशंसा करता है या फिर उन्हें सम्मानित करता है तो सरबंत सिंह और उनकी पत्नी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता। वे बस अपनी बेटियों को आगे बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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