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22 तरह के गुड़हल, 9 तरह की चमेली, फल, फूल और सब्जियां, गंदे पानी से उगा दिये 2000 पौधे

22 तरह के गुड़हल, 9 तरह की चमेली, फल, फूल और सब्जियां, गंदे पानी से उगा दिये 2000 पौधे

बेंगलुरु की डॉ. कौशल्या संतानम और डॉ. मुरलीधरा पाडिगरु ने अपने House Garden में लगभग 2000 पेड़-पौधे लगाए हैं।

डॉ. कौशल्या संतानम और उनके पति डॉ. मुरलीधरा पाडिगरु, दोनों ही प्रकृति प्रेमी हैं। वे बेंगलुरु में अपने घर की ज्यादातर जगह को बगीचे (house garden) के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने खूब सारे पेड़-पौधे लगाकर, अपने घर को चारों तरफ से हरियाली से भर दिया है। घर के पहले और दूसरे फ्लोर पर भी, उन्होंने काफी मात्रा में खूबसूरत पेड़-पौधे लगाए हैं। इसके अलावा, उनके घर के अंदर भी बहुत से इंडोर प्लांट्स लगे हुए हैं। 

कौशल्या और मुरलीधरा, दोनों ही वैज्ञानिक हैं और फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं। कौशल्या बताती हैं कि वैज्ञानिक होने के साथ-साथ, वह बतौर पेटेंट अटॉर्नी भी काम करती हैं। अपने-अपने काम में व्यस्त रहने के बावजूद, यह दंपति बागवानी के लिए समय निकाल ही लेता है। उनका कहना है कि अगर किसी चीज को आप दिल से करना चाहते हैं, तो उसके लिए वक्त निकालना मुश्किल नहीं होता। इन दोनों को बचपन से ही, बागवानी से काफी लगाव रहा है और समय के साथ, उनका यह लगाव बढ़ता ही गया। 

लगभग 10 साल अमेरिका में रहने के बाद, साल 2005 में दोनों भारत लौटे। उन्होंने बताया, “हम जब अमेरिका में रहते थे, तो वहां भी अपने घर में, कुछ पेड़-पौधे लगाने की कोशिश करते ही रहते थे। जब हम भारत लौटे, तो लगभग छह साल मुंबई में रहे। अमेरिका की ही तरह, मुंबई में भी जगह की काफी दिक्कत थी। इसलिए, जब हमने बेंगलुरु में अपना घर बनाने का फैसला किया, तो सोच लिया था कि इस घर में ज्यादा से ज्यादा जगह बगीचे (house garden) के लिए रखेंगे।” 

लगाए लगभग 2000 पेड़-पौधे: 

House Garden

वे अपने बेंगलुरु वाले घर में साल 2012 में शिफ्ट हुए थे। उसी साल से उन्होंने अपने घर में बाफवानी शुरू कर दी थी। पिछले आठ-नौ सालों में उनके बगीचे (House Garden) में पेड़-पौधे सिर्फ बढ़े हैं, कभी कम नहीं हुए। सबसे पहले, उन्होंने ग्राऊंड फ्लोर की खाली जमीन को हरियाली से भरा। साथ ही, अपने घर में एक छोटा सा तालाब भी बनवाया, जिसमें उन्होंने वॉटर लिली के पौधे लगाए। उनके इस तालाब में, बहुत सी रंग-बिरंगी सुन्दर मछलियां भी हैं। 

कौशल्या कहती हैं, “यह तालाब शुरुआत से ही हमारे घर में है और अब हमें इसकी ज्यादा देखभाल भी नहीं करनी पड़ती है। इसके अलावा, ग्राउंड फ्लोर पर भी घर के आगे की तरफ, फोलिएज प्लांट्स और फूलों के कई खूबसूरत पेड़-पौधे हैं। जबकि घर के पीछे की तरफ हमने फलों के पेड़ लगाने की कोशिश की। लेकिन धूप की कमी की वजह से कुछ ही फलों के पेड़ सुरक्षित रह पाए जैसे- नारियल, अनार, एवेकाडो आदि।”

घर के अंदर पेड़-पौधे लगाने के साथ-साथ, उन्होंने घर के बाहर भी बादाम, अंजीर और आंवला जैसे पेड़ लगाए हैं। घर के पहले और दूसरे फ्लोर पर भी उन्होंने तरह-तरह के पेड़-पौधे लगाए हैं। उनके घर में आपको फोलिएज, सक्यूलेंट और इंडोर प्लांट से लेकर, फल, फूल और सब्जियों के पौधे भी मिल जायेंगे। वे ज्यादातर मौसमी सब्जियां जैसे- टमाटर, मिर्च, लौकी, टिंडा, पालक, मेथी, मोरिंगा, करेला, बैंगन आदि लगाते हैं। उनके घर में 22 किस्म के गुड़हल, नौ किस्म की चमेली और कई तरह के गुलाब के पौधे भी हैं। 

Urban Gardening in Bengaluru
Some of their hibiscus varieties

वे बताते हैं कि उनके घर में, 700 से ज्यादा किस्म के लगभग 2000 पेड़-पौधे हैं। उनके घर के अंदर-बाहर और ऊपर-नीचे, आपको हरियाली ही हरियाली दिखेगी। पौधे लगाने के लिए, वे टेराकोटा, प्लास्टिक और सिरामिक के गमलों का इस्तेमाल करने के अलावा, कुछ बेकार पड़ी चीज़ों से खुद गमले भी बनाते हैं। 

उन्होंने बताया, “कुछ समय पहले, हमने अपने बगीचे (house garden) में एक ग्रीनहाउस भी लगाया था। लेकिन, एक नारियल का पेड़ गिरने से वह खराब हो गया। इसलिए, हमने उस जगह को अब, ‘वर्टीकल गार्डन’ में तब्दील कर दिया है। वर्टीकल गार्डन के अलावा, हमारे यहां बहुत से हैंगिंग पौधे भी हैं।” 

बागवानी के साथ-साथ, कौशल्या को पेंटिंग करने का भी शौक है। इसलिए, वह अपने घर की दीवारों पर भी खूबसूरत पेंटिंग करती रहती हैं। उनकी यह कला उनके बगीचे को और खूबसूरत बनाती है। 

खुद बनाते हैं खाद: 

उन्होंने आगे बताया कि पिछले नौ सालों से, वे अपने घर के गीले और जैविक कचरे से खाद बना रहे हैं। उनके घर से, किसी भी तरह का जैविक कचरा बाहर नहीं जाता है। शुरुआत में, उन्होंने कंपोस्टिंग के लिए अपने बगीचे में दो गड्ढे बनाए थे, जिनमें उनकी रसोई से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनती है।  

जैसे-जैसे उनके घर में पेड़-पौधे बढ़ने लगे, तो बहुत ज्यादा मात्रा में पत्ते, टहनियां आदि इकट्ठा होने लगे। इसके बाद, उन्होंने और तीन कंपोस्टिंग बिन तैयार किये। इनमें से एक बिन को उन्होंने घर के बाहर रखा है, क्योंकि उनके घर के बाहर भी कई पेड़ हैं। सड़क साफ करने वाले कर्मचारी, पत्तों को इकट्ठा करके फेंकने या जलाने की बजाय, इस कंपोस्टिंग बिन में डाल देते हैं। 

House Garden
They have a small pond in their garden

सभी पौधों के लिए वे जैविक खाद का ही इस्तेमाल करते हैं। वे घर पर खुद ही, लगभग 70% खाद बना लेते हैं। इसके अलावा, वे बकरी की लीद की खाद खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि बकरी की लीद की खाद से उन्हें ज्यादा अच्छे नतीजे मिले हैं। वे छत पर रखे गमलों में कोकोपीट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे गमलों का वजन कम रहता है और छत पर ज्यादा भार नहीं पड़ता। पेड़-पौधों पर कीड़े ना लगें, इसलिए वे नीम के तेल का स्प्रे करते हैं।

घर में पेड़-पौधों के होने से, अब उनके यहां कई तरह के पक्षी और जीव-जंतु आने लगे हैं। चिड़िया, तितली, भँवरे से लेकर, गिलहरी, मेंढक और छोटे सांप भी उनके बगीचे (House Garden) में आते हैं। लेकिन, कौशल्या और मुरलीधरा तो क्या, उनके बच्चे भी इन जीवों को नहीं भगाते हैं। उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि प्रकृति पर पहला हक़, इन जीवों का ही है, इसलिए अगर हम कुछ जीवों को एक बसेरा दे सकते हैं, तो इससे अच्छा क्या होगा!”

रिसायकल्ड पानी से करते हैं सिंचाई: 

मुरलीधरा कहते हैं कि प्रकृति से जुड़ाव के कारण, उनकी जीवनशैली में भी काफी सकारात्मक प्रभाव आया है। जैसे- वे पानी के संरक्षण पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। वे घरेलू इस्तेमाल में लिए जानेवाले पानी को हमेशा संरक्षित करके, फिर से इस्तेमाल में लेने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया, “पिछले कुछ सालों में भूजल स्तर कम होने के कारण, सभी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, हम हमेशा से ही प्रकृति के प्रति सजग रहे हैं। इसलिए, पहले हम RO से निकलने वाले ‘वेस्ट वाटर’ को भी ड्रम या बाल्टी में इकट्ठा करके, इस्तेमाल में लेते थे। लेकिन, फिर लगा कि हमें और कुछ भी करने की जरूरत है।” 

साल 2019 में उन्होंने अपने घर में ‘ग्रेवाटर रिसायक्लिंग सिस्टम’ लगवाया। जिससे वह अपने घर के बाथरूम और रसोई से निकलने वाले बेकार और गंदे पानी को रिसायकल करके, बागवानी के लिए इस्तेमाल करते हैं। पिछले दो सालों से, उन्होंने बगीचे (House Garden) की सिंचाई के लिए ताजा पानी का इस्तेमाल नहीं किया है।

House Garden

उनके घर में AC भी नहीं है। वे कहते हैं, “हम हमेशा से जानते हैं कि AC पर्यावरण और स्वास्थ्य, दोनों के लिए हानिकारक है। इसलिए, हमने कभी AC नहीं लगवाया। इसके अलावा, अब हमारे घर में इतने ज्यादा पेड़-पौधे हैं कि घर अपने आप ही एकदम ठंडा रहता है। लोगों को लगता है कि घर में पेड़-पौधे लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, हम अपने अनुभव से कह सकते हैं कि पेड़-पौधों से घर के तापमान और हवा पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, हमेशा कोशिश करें कि आप अपने घर में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाएं।” 

अपने बगीचे की खूबसूरती को सहेजकर रखने के लिए, कौशल्या ने 2017 में अपना इंस्टाग्राम अकाउंट, ‘heartingreens’ भी शुरू किया, जिसपर वह अपने बगीचे (house garden) की तस्वीरें और जानकारी साझा करती हैं। अगर आप उनके बगीचे के बारे में अधिक जानना चाहते हैं या उनसे संपर्क करना चाहते हैं, तो उनका इंस्टाग्राम अकाउंट फॉलो कर सकते हैं। 

संपादन – प्रीति महावर

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