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महाराष्ट्र का अनोखा गाँव, जहाँ शिक्षकों को गुरुदक्षिणा में दी जाती है ‘कार’!

हाराष्ट्र के शिरूर तालुका के पिम्पले खालसा गांव के जिला परिषद स्कूल की एक शिक्षिका को गांववालों ने अनोखी ‘गुरुदक्षिणा’ दी है। स्कूल की टीचर ललिता धूमल को गांव के लोगों ने एक कार उपहार-स्वरूप भेंट की है।

दरअसल, ललिता के प्रयासों और शिक्षा के चलते गाँव के 19 बच्चों ने वार्षिक सरकारी छात्रवृत्ति की परीक्षा पास की है, जिसका परिणाम 10 अगस्त को जारी किया गया था। ललिता ने बताया कि गांववालों ने उनसे पहले भी चार शिक्षकों को उपहार दिए हैं।

उन्होंने कहा, “मैं कई सालों से इस स्कूल में काम कर रही हूँ। यहां के लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति काफी जागरूक हैं। और साथ ही वे शिक्षकों की मेहनत की भी सराहना करते हैं। इसलिए वे हर साल किसी न किसी शिक्षक को भेंट देते हैं। पहले वे दुपहिया या फ्रिज आदि दिया करते थे लेकिन पिछले चार सालों से वे कार गिफ्ट कर रहे हैं।”

छात्रवृत्ति के लिए परीक्षा हर साल पांचवीं कक्षा में होती है। लेकिन शिक्षक बच्चों को एक या दो साल पहले से ही तैयारी करवाना शुरू कर देते हैं। पुरे साल बच्चों को तीन घंटे अधिक पढ़ाया जाता है। इसके अलावा परीक्षा के कुछ दिन पहले छुट्टी वाले दिन भी बच्चों की एक्स्ट्रा क्लास रखी जाती हैं।

पिछले साल भी 21 बच्चे इस परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे। स्कूल में अभी लगभग 350 बच्चे हैं। स्थानीय स्कूल प्रबंधन समिति के चेयरमैन ज्ञानेश्वर धूमल ने कहा कि पिछले कुछ सालों में, गांववालों ने स्कूल के विकास के लिए करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

हम इस गांव के लोगों की सराहना करते हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में केवल सरकार पर निर्भर न रहकर स्वयं भी सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बाकी जगहों पर भी लोग इनसे प्रेरणा लेकर शिक्षा के महत्व को पहचानेंगे।

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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