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पढ़ाई के साथ, घर में शुरू की ‘ऑर्गेनिक चॉकलेट फैक्ट्री’, सालाना कमाई रु. 15 लाख

हरियाणा के कैथल के रहने वाले 25 वर्षीय ऋषभ सिंगला ने अपने घर से ही ऑर्गनिक चॉकलेट कंपनी, ‘श्याम जी चॉकलेट्स’ शुरू की है।

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आज हम आपको एक ऐसे स्टार्टअप (chocolate business) की कहानी बता रहे हैं, जो ऑर्गेनिक चॉकलेट बनाते हैं और वह भी ऐसे फ्लेवर में कि आप एक बार तो जरूर चखना चाहेंगे। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के कैथल स्थित ‘श्यामजी चॉकलेट्स‘ की, जिसे चला रहे हैं 25 वर्षीय ऋषभ सिंगला। 

ऋषभ ने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही अपने इस स्टार्टअप की शुरुआत की और अब इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, “मेरे पिता ट्रेडिंग का काम करते हैं और मम्मी गृहिणी हैं। मैं बीबीए की पढ़ाई कर रहा था, जब मुझे चॉकलेट बिज़नेस (chocolate business) का आईडिया आया। मुझे हमेशा से ही अपना कोई काम करना था, ताकि मेरी अपनी एक पहचान हो और मैं दूसरे लोगों को रोजगार देने में सक्षम बनूं। इसलिए मैंने पढ़ाई के साथ-साथ इस आईडिया पर भी काम करना शुरू कर दिया।” 

शुरुआत में, ऋषभ अपने आईडिया को लेकर बहुत स्पष्ट नहीं थे। वह बस चॉकलेट बनाकर ग्राहकों तक पहुँचाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कैथल में एक जगह से चॉकलेट बनाना सीखा। वह कहते हैं, “लेकिन जब हम चॉकलेट बनाने की बात करते हैं, तो इसके कई तरीके हैं। एक तरीका है कि आप बाजार में पहले से उपलब्ध ‘कंपाउंड’ से चॉकलेट बनाते हैं। दूसरा तरीका है कि आप एकदम जीरो से सभी चीजें तैयार करते हैं और फिर चॉकलेट बनाते हैं। साफ शब्दों में कहूँ तो ‘कोको बीन्स से चॉकलेट बार’ तक की पूरी प्रक्रिया आप खुद करते हैं। शुरुआत में, मैंने पहले तरीके से चॉकलेट बनाना शुरू किया, लेकिन फिर मेरे एक दोस्त ने मुझे ‘ऑर्गेनिक चॉकलेट’ बनाने की सलाह दी।” 

घर पर ही शुरू कर दी ‘चॉकलेट फैक्ट्री:’

Organic Chocolate Business
Rishabh Singla with his father

‘ऑर्गेनिक चॉकलेट’ से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए उन्होंने कई जगह की यात्राएं भी की हैं। वह कूर्ग भी गए, जहाँ पर कोको बीन्स की खेती होती है। उन्होंने कई ‘चॉकोलेट मेकर्स’ से मुलाक़ात की, लेकिन ट्रेनिंग की फीस बहुत ज्यादा थी। वह कहते हैं, “आखिरकार मेरी तलाश मुंबई में जाकर खत्म हुई और वहाँ राकेश सैनी जी से मैंने ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के बाद, केरल, कर्नाटक में कोको की खेती करने वाले किसानों से मैंने कोको बीन्स खरीदे और फिर ‘ऑर्गेनिक’ चॉकलेट बनाना शुरू किया।” 

ऋषभ ने अपने चॉकलेट बिज़नेस (chocolate business) की शुरुआत 2017 में की थी, लेकिन शुरू में उन्होंने सामान्य चॉकलेट ही बनाई। उन्होंने 2018 में ट्रेनिंग के बाद पूरी तरह से ‘आर्गेनिक चॉकलेट’ बनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पहले वह अपने घर के किचन से ही काम करते थे। उनका शुरूआती निवेश लगभग 15, 000 रुपए रहा। लेकिन, जब उन्होंने सिर्फ ऑर्गेनिक चॉकलेट बनाने का फैसला किया, तो अपने घर के पहले फ्लोर पर दो कमरों को इस्तेमाल में लिया। एक में उन्होंने चॉकलेट बनाने में इस्तेमाल होने वाली सभी मशीनरी को रखा और दूसरे कमरे में, चॉकलेट की पैकेजिंग करके, इन्हें स्टोर करने का काम किया। 

उन्होंने कहा, “शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी, क्योंकि सबसे पहले तो घरवालों को भी समझाने में समय लगा। इसके बाद, रिश्तेदार और जानने वाले भी कहते थे कि इन सब कामों से कुछ नहीं होगा। पढ़ाई पर ध्यान देने का समय है। लेकिन मैं मेहनत करता रहा और सीखता रहा। शुरू में, थोड़ी-बहुत जो भी कमाई होती थी, उसे वापस बिज़नेस में ही लगाया। आज भी मैं बहुत बड़े लेवल पर काम नहीं कर रहा हूँ क्योंकि मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता हूँ। चॉकलेट सेक्टर में एक अलग पहचान बना पाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि पहले से ही कई बड़े ब्रांड हैं। लेकिन फिर भी, हम आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हमारी गुणवत्ता और स्वाद ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं।” 

Organic Chocolate Business
Customers Buying their chocolates in organic fairs

आज न सिर्फ ग्राहकों से, बल्कि अपने परिवार से भी उन्हें सहयोग और सराहना मिल रही है। उनकी माँ, आशा रानी उनके साथ बिज़नेस (chocolate business) को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं। आशा रानी कहती हैं कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। पहले वह सिर्फ घर में ही रहती थीं, लेकिन अब अपने बेटे के साथ अलग-अलग जगह जाती हैं। नए-नए लोगों से मिलती हैं और जब ग्राहक उनकी चॉकलेट्स की तारीफ करते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है।

उनके एक ग्राहक, साहिल गुप्ता बताते हैं, “मैं पिछले दो सालों से श्यामजी चॉकलेट्स खरीद रहा हूँ और मुझे उनके चॉकलेट्स इसलिए पसंद हैं, क्योंकि इनमें आपको एकदम चॉकलेट फ्लेवर मिलता है। जैसे आप बाहर के चॉकलेट्स खाते हैं तो उनका स्वाद अलग होता है। उनकी क्वालिटी भी यहां मिलने वाले चॉकलेट्स से अलग होती है। श्यामजी चॉकलेट्स में भी आपको बिल्कुल वैसी ही क्वालिटी मिलती है।”

वहीं, एक और ग्राहक नरेश कुमार कहते हैं कि वह अपनी पांच साल की बेटी के लिए खासतौर पर श्यामजी चॉकलेट्स खरीदते हैं। उन्होंने कहा, “हम कैथल में ही रहते हैं और इसलिए उनके यहां से एकदम ताजा बनने वाले चॉकलेट्स हम लेकर आते हैं। उनके चॉकलेट्स ‘होममेड’ हैं और उनके सभी फ्लेवर लोगों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं, इसलिए हम उन्हीं से चॉकलेट खरीदते हैं।”

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हर महीने बनाते हैं 6000 चॉकलेट: 

चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया के बारे में वह कहते हैं, “सबसे पहले कोको बीन्स को भूना (रोस्ट) जाता है और फिर इनका छिलका उतारा जाता है। इसके बाद, बीन्स को ग्राइंडर में पीसा जाता है और बीन्स से निकलने वाले कोको बटर से ही इनका पेस्ट बन जाता है। अलग-अलग चॉकलेट के लिए ग्राइंडिंग प्रक्रिया का समय अलग-अलग होता है। इसके बाद, पेस्ट में गुड़ का पाउडर मिलाया जाता है। हम चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते हैं और न ही किसी अन्य एडिटिव और प्रिज़र्वेटिव का। सभी चॉकलेट में गुड़ का पाउडर और फ्लेवर के लिए अलग-अलग फल-फूल और औषधिय पौधों का इस्तेमाल होता है।”

हर महीने वह लगभग 6000 चॉकलेट बार तैयार करते हैं और एक बार 50 ग्राम का होता है। फिलहाल, वह लगभग 10 से ज्यादा तरह के चॉकलेट बार बना रहे हैं, जिनमें सामान्य डार्क चॉकलेट, फाइबर चॉकलेट, चिया सीड चॉकलेट, अलसी चॉकलेट, ब्राह्मी चॉकलेट, लीची चॉकलेट, कोकोनट चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी चॉकलेट आदि शामिल हैं। चॉकलेट बार तैयार होने के बाद इसे पैक किया जाता है और फिर आर्डर के हिसाब से भेजा जाता है। अपने इस बिज़नेस (chocolate business) से ऋषभ ने छह लोगों को रोजगार भी दिया है। वह कहते हैं, “चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया मैं और मम्मी करते हैं, लेकिन पैकेजिंग और दूसरे कामों के लिए हमने कुछ महिलाओं को रखा है।” 

Organic Chocolate Business
Organic Cocoa Beans to Organic Chocolate Bar

मार्केटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी मार्केटिंग करने के अलावा, वह अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाले जैविक मेलों में भी भाग लेते हैं। अब तक वह लगभग 15 अलग-अलग मेलों में अपना स्टॉल लगा चुके हैं, जिस वजह से उन्हें काफी लोगों से सीधा जुड़ने का मौका मिला। महीने में लगभग 400 ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने के अलावा, वह गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में स्थित लगभग 50 ऑर्गेनिक स्टोर पर भी अपने चॉकलेट पहुँचाते हैं। उन्होंने बताया कि उनका सालाना टर्नओवर लगभग 15 लाख रुपए तक रहा है। 

अहमदाबाद में अपना ऑर्गनिक स्टोर चलाने वाले अल्पेश कुमार कहते हैं, “मैंने अहमदाबाद में लगे एक ऑर्गनिक फेस्टिवल में उनके चॉकलेट ट्राई किये थे। मुझे उनकी क्वालिटी और स्वाद अच्छे लगे। इसके बाद, मैंने अपने घर के लिए उनसे चॉकलेट मंगवाई और परिवार में सभी को ये पसंदआया। फिलहाल, हम अपने चार ऑर्गनिक स्टोर के लिए उनसे चॉकलेट्स खरीद रहे हैं और ग्राहकों का फीडबैक बहुत ही अच्छा है।”

ऋषभ की आगे कोशिश है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को ‘आर्गेनिक चॉकलेट’ के बारे में जागरूक करें। उनका कहना है, “मेरा उद्देश्य है कि अपने बिज़नेस (chocolate business) को आगे बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को शुद्ध खाने के प्रति भी जागरूक करूँ। अगर हमें स्वस्थ रहना है, तो इन चीजों पर ध्यान देना होगा। इसलिए सबसे यही अपील है कि आप जो भी खा रहे हैं और अपने परिवार को खिला रहे हैं, उन चीजों पर ध्यान दें और कोशिश करें जानने की, कि ये आपके लिए कितना फायदेमंद है। तभी आप एक बेहतर जीवन जी सकेंगे।” 

साथ ही, ऋषभ हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं, जो अपना काम करना चाहते हैं। युवाओं से वह बस यही कहते हैं कि अपने आइडियाज पर काम करें और खुद पर विश्वास करें। सच्ची मेहनत और लगन से काम करने वालों को सफलता जरूर मिलती है। अगर आप उनके आर्गेनिक चॉकलेट के बारे में अधिक जानना चाहते हैं या ऑर्डर करना चाहते हैं तो उनका फेसबुक पेज देख सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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