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9वीं की छात्रा ने शुरू किया सेफ्टी किट बिज़नेस, 3 महीने में एक लाख से ऊपर पहुंचा टर्नओवर

गुरुग्राम में रहने वाली 14 वर्षीया सिमरन सिंह ने फरवरी 2021 में अपने स्टार्टअप ‘सेफली नोमेडिक’ (Safely Nomadic) की शुरुआत की, जिसके जरिए वह महिलाओं और बच्चों के लिए ट्रैवेलिंग किट तैयार कर ग्राहकों तक पहुँचा रही हैं।

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अगर हमें कहीं यात्रा पर जाना हो तो कपड़े, जूते-चप्पल जैसी बेसिक चीजों के अलावा भी बहुत-सी अन्य जरूरी चीजों की जरूरत पड़ती है। कई लोग यात्रा पर जाने से पहले इन सभी चीजों की एक लंबी सूची बनाते है, लेकिन फिर भी कई चीजें छूट जाती हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जिनका मानना है कि जब जरूरत पड़ेगी, तब देखा जाएगा। लेकिन अगर कोई आपके लिए न सिर्फ इन सभी जरुरी चीजों की सूची बनाए बल्कि सभी चीजें इकट्ठा करके आपको एक ही किट में दे दे तो? है न कमाल का आईडिया। 

लेकिन यह कमाल का आईडिया हमारा नहीं बल्कि एक 14 साल की छात्रा का है और उन्होंने अपने इस आईडिया को बिज़नेस का रूप भी दिया है। हम बात कर रहे हैं गुरुग्राम में रहने वाली 14 वर्षीया सिमरन सिंह की। ‘द श्रीराम स्कूल’ में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली सिमरन ने फरवरी 2021 में अपने स्टार्टअप ‘सेफली नोमेडिक‘ (Safely Nomadic) की शुरुआत की। उनके इस स्टार्टअप को लोगों से बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। खासकर, ऐसे लोग, जिन्हें घूमना-फिरना पसंद है या फिर जो अपनी नौकरी के चलते काफी यात्रा करते हैं। 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए सिमरन ने कहा, “मुझे यह आईडिया अपने घर से ही आया क्योंकि जब भी हम कहीं घूमने जाते हैं तो एक लंबी-सी लिस्ट बनाई जाती है। फिर हर एक चीज को खरीदने के लिए अलग-अलग जगह जाओ और इसके बावजूद बहुत कुछ छूट जाता है। इसलिए मुझे लगा कि यह समस्या बहुत से लोगों को होती होगी तो क्यों न इस आईडिया पर काम किया जाए। हालांकि, अभी लॉकडाउन और कोविड -19 के कारण ज्यादा ऑर्डर नहीं है लेकिन पिछले महीने तक हमने काफी अच्छा बिज़नेस किया।” 

महिलाओं और बच्चों पर किया फोकस: 

सिमरन ने बताया कि वह ‘यंग इंटरप्रेन्योर अकेडमी‘ से जुड़ी हुई हैं और इस अकेडमी में बच्चों को उद्यमशीलता से जुड़े गुर सिखाए जाते हैं। बच्चों को उनके आइडियाज पर काम करने के लिए मार्गदर्शन और हौसला दिया जाता है ताकि वे उद्यमी बनकर उभरें। “मैंने जब अपना यह आईडिया अकेडमी में अपने मेंटर के साथ साझा किया तो उन्होंने काफी मदद की। मैंने सबसे पहले ‘मार्किट सर्वे’ किया और 48 अलग-अलग लोगों से फीडबैक लिया कि वे यात्रा के दौरान क्या समस्याएं झेलते हैं और अगर उन्हें एक ‘ट्रैवेलिंग किट’ मिले तो क्या वे खरीदेंगे? उनसे जो प्रतिक्रिया मिली, उसी के आधार पर मैंने अपने प्रोडक्ट डिज़ाइन किए और इन्हें लोगों तक पहुँचाने पर काम किया।” 

9th Class Student Started
सिमरन सिंह

सिमरन की माँ, शगुन सिंह बताती हैं, “जब सिमरन ने मुझे बताया कि उसे अपना कोई बिज़नेस करना है तो मैंने उसका साथ दिया और उसे कहा कि वह अलग-अलग आइडियाज सोचे और समझे। इसके बाद जब उसने अपने आईडिया के बारे में बताया तो हमने उसकी हर संभव मदद की।” 

सिमरन के इस स्टार्टअप में शुरूआती निवेश भी उनके माता-पिता ने ही किया। वह बताती हैं कि उन्होंने लोगों से बात करने के बाद, अपने प्रोडक्ट पर काम किया।फिलहाल, वह दो तरह के किट तैयार कर रही हैं- महिलाओं और बच्चों के लिए। उन्होंने बताया, “महिलाओं के लिए जो किट है, उसमें सिरदर्द, बदनदर्द, बुखार, खांसी, पीरियड दर्द आदि के लिए दवाई है। दवाई के लिए मैंने डॉक्टर से सलाह ली और उनसे विचार-विमर्श के बाद ही किट में शामिल किया। इसके अलावा, निजी साफ-सफाई के लिए कुछ चीजें जैसे चेहरा साफ करने के लिए फेस वाइप्स, टिश्यू, फेस मास्क, टॉयलेट शीट पेपर, सैनिटाइजर, पेपर सोप, रुई, सैनिटरी नैपकिन आदि हैं। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अलार्म और पैपर स्प्रे भी किट में शामिल है।” 

बच्चों की किट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह किट 10 साल तक के बच्चों के लिए है। इसमें कुछ बेसिक चीजों के अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने बताया, “बच्चों की किट के लिए जब हमने सर्वे किया तो पता चला कि अक्सर लंबे सफर के दौरान बच्चे ऊब जाते हैं। इस वजह से वे चिड़चिड़े भी हो जाते हैं। इसलिए मैंने उनकी किट में कुछ ऐसी चीजें शामिल की जो बच्चों को व्यस्त रखें। जैसे एक्टिविटी बुकलेट, ओरिगामी पेपर, स्केच पैन आदि।” 

सबसे अच्छी बात है कि ग्राहक अपने हिसाब से इन किट्स को ‘कस्टमाइज्ड’ भी करा सकते हैं। अपनी जरूरत के अनुसार वे चीजों की लिस्ट सिमरन को दे सकते हैं और वह उन्हीं के मुताबिक किट तैयार करके दे देंगी। 

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बच्चों की सेफ्टी किट

लोगों से मिली अच्छी प्रतिक्रिया: 

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सिमरन ने अपने इस बिज़नेस को छोटे स्तर पर ही शुरू किया। शुरुआत में अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप में उन्होंने इन किट्स के बारे में जानकारी साझा की। वह कहती हैं, “शुरू में, कुछ जानकारों से ही ऑर्डर मिले। लेकिन फिर उनके जरिए और भी लोगों को इसके बारे में पता चला और दूसरे लोग भी हमें संपर्क करने लगे।” मात्र तीन महीनों में उन्होंने 60 से ज्यादा लोगों को किट्स दी हैं। जिनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा किट ऑर्डर की। 

तीन महीनों में ही उनका टर्नओवर एक लाख रुपए से ज्यादा रहा है। सिमरन कहती हैं, “मैं अभी बहुत बड़े स्तर पर काम नहीं कर रही हूँ। लेकिन धीरे-धीरे अपने इस बिज़नेस को आगे ले जाना चाहती हूँ। फिलहाल, हालात मुश्किल हैं लेकिन कम से कम मैंने एक शुरुआत की और अपने इस बिज़नेस को लेकर मैं बहुत सकारात्मक हूँ क्योंकि मुझे ग्राहकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।” 

उनकी एक ग्राहक, रेणुका बताती हैं कि वह एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। अपने काम के लिए उन्हें अक्सर यात्राएं करनी पड़ती हैं। “कुछ समय पहले, मैं एक मीटिंग के लिए गयी हुई थी और मुझे एक ‘पेन किलर’ की जरूरत पड़ गयी। मेरे पास दवाई नहीं थी और आसपास से लाना भी मुश्किल था। मेरी एक सहकर्मी ने मुझे तुरंत दवाई दी तो मैंने उनसे पूछा कि क्या आप हमेशा यह सब चीजें अपने पास रखती हैं। तो उन्होंने मुझे इस किट के बारे में बताया और मुझे यह आईडिया बहुत ही पसंद आया। मैंने तुरंत सिमरन से अपने लिए एक किट ऑर्डर की। अब अगर कहीं अचानक से भी जाना पड़े तो ज्यादा चिंता नहीं होती है क्योंकि इस किट में जरूरत की लगभग सभी चीजे हैं और मुझे ख़ुशी है कि एक 14 साल की बच्ची ने इस परेशानी पर गौर किया।”

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महिलाओं के लिए सेफ्टी किट

एक और ग्राहक सोनल अहलावत बताती हैं कि उन्होंने अपने बेटे के लिए किट खरीदी थी जो उनके लिए काफी फायदेमंद रही। “हम कुछ समय पहले कार से जयपुर गए थे और रास्ते में शौचालय के लिए कई जगह रुकना भी पड़ा। इस दौरान टॉयलेट शीट कवर बहुत काम आये। इसके अलावा, वह रास्ते में एक्टिविटी बुक और दूसरी चीजों में व्यस्त रहा। यात्रा के दौरान वह शांत था तो मुझे भी तसल्ली रही। इसलिए मुझे सिमरन का प्रोडक्ट काफी पसंद आया क्योंकि अब मुझे अलग-अलग चीजों पर सोचना नहीं पड़ता है। इस किट में सभी जरुरी सामान मौजूद है।”

आगे की योजना: 

आगे उनकी योजना है कि वह अपने इस प्रोडक्ट को ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर लॉन्च करें। इसके अलावा, वह बड़े-बुजुर्गों के लिए भी एक ट्रैवेलिंग किट पर काम कर रही हैं। सिमरन अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शकों और माता-पिता को देती हैं। उनकी माँ, शगुन कहती हैं, “मैं अन्य सभी माता-पिता को भी यही कहूँगी कि अपने बच्चों की काबिलियत को पहचानें। उनके हुनर और दिलचस्पी को समझें और उसी क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही, उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने के लिए सही मंच तक पहुंचाने की कोशिश करें।” 

बेशक, सिमरन की कहानी देश के सभी माता-पिता और बच्चों के लिए एक प्रेरणा है। अगर 14 साल की उम्र में सिमरन बिज़नेस के बारे में सोच सकती हैं तो बाकी लोग क्यों नहीं? हमारे बच्चों के पास आइडियाज और हुनर की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ सही मौकों और लोगों से मिलने वाले हौसलों की। इसलिए अपने आसपास कुछ अलग करने की कोशिश में जुटे बच्चों का मनोबल बढ़ाएं ताकि वे आगे चलकर देश का नाम रौशन करें। 

यदि आप सिमरन सिंह के इस अनोखे स्टार्टअप के बारे विस्तार से जानना चाहते हैं या फिर किट्स ऑर्डर करना चाहते हैं तो उन्हें sim.saharan99@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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