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Free Online Course: इसरो ने लॉन्च किया 12 दिन का फ्री-कोर्स, आज ही करें आवेदन

ISRO ने जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी पर 12 दिन का Free Online Course लॉन्च किया है। योग्यता मानदंड और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें यह लेख।

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‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) ने पुरातत्व अध्ययन के लिए भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology for Archaeological Studies) पर, 12 दिनों के मुफ्त ऑनलाइन कोर्स (Free Course by ISRO) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस कोर्स को ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (IIRS) के आउटरीच प्रोग्राम के तहत पेश किया जा रहा है। 

इन बातों का रखें ध्यान

  • यह कोर्स 17 मई से 28 मई 2021 के बीच आयोजित किया जाना है।
  • इस कोर्स के आवेदन करने और क्वालीफाई करने वाले प्रतिभागियों के पास भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology) के बारे में जानने का मौका होगा। जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए किया जा सकता है।
  • प्रतिभागियों को पुरातात्विक या विरासत अध्ययन के लिए भू-स्थानिक तकनीकों में वर्तमान रुझानों को समझने का अवसर भी मिलेगा। 
  • प्रतिभागी अपनी जानकारी को बढ़ाने के लिए ऑनलाइन क्विज में भी हिस्सा ले सकते हैं।
  • प्रमाणपत्र भागीदारी के आधार पर और साथ ही, कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर प्रदान किया जाएगा।
  • यह कोर्स अंग्रेजी भाषा में पढ़ाया जाएगा। 
  • कोर्स के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है।
  • पंजीकरण ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा और केवल सीमित सीटें उपलब्ध हैं।

ISRO Launched Free Course
प्रतीकात्मक तस्वीर

इस ऑनलाइन कोर्स से आप क्या सीखेंगे:

  • पुरातत्व के लिए भू-स्थानिक तकनीक: उपकरण और तकनीक (Geospatial technology for archaeology: Tools and techniques)
  • पुरातात्विक अध्ययन के लिए अंतरिक्ष आधारित रिमोट सेंसिंग (Space-based remote sensing for archaeological studies)
  • पुरातात्विक / विरासत अध्ययन के लिए भू-आधारित भू-स्थानिक तकनीक (Ground-based geospatial techniques for archaeological/heritage studies)
  • सांस्कृतिक विरासत स्थलों का दस्तावेजीकरण: कुछ केस के उदाहरण (Documentation of cultural heritage sites: Case examples)
  • पुरातात्विक जांच के लिए कम ऊंचाई वाली प्रणालियां (Low altitude systems for archaeological investigations)
  • पुरातात्विक अध्ययन के लिए माइक्रोवेव रिमोट सेंसिंग: अंतरिक्ष और जमीन आधारित (Microwave remote sensing for archaeological studies: Space and ground based)
  • स्थलीय लेजर स्कैनर पर प्रदर्शन (Demonstration on terrestrial laser scanner)
  • लैंडस्केप पुरातत्व के लिए अंतरिक्ष आधारित अध्ययन (Space based studies for landscape archaeology)
  • एडवांस्ड इमेज प्रोसेसिंग आधारित सांस्कृतिक विरासत स्मारकों की क्षति का आकलन (Advanced image processing based damage assessment of cultural heritage monuments)

कौन कर सकता है आवेदन

इस पाठ्यक्रम को केंद्र, राज्य सरकार, निजी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों के ‘हाइड्रो-मिटियोरोलॉजिकल’ आधारित क्षेत्रीय और राष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़े पेशेवरों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, ‘डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ गतिविधियों से जुड़े अनुसंधान / काम करने वाले छात्र और शोधकर्ता भी आवेदन कर सकते हैं। 

कैसे करें आवेदन:

इस कोर्स के लिए आवेदन करने के इच्छुक प्रतिभागी, यहां क्लिक करके फॉर्म भर सकते हैं। प्रतिभागियों को अपने व्यक्तिगत विवरण, शैक्षिक योग्यता, सम्बंधित दस्तावेज अपलोड करने होंगे और फिर वह कोर्स चुन सकते हैं, जिसमें वे भाग लेना चाहते हैं। इस कोर्स की कोई फीस नहीं है। 

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इस कोर्स के लिए प्रतिभागियों को बढ़िया इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत होगी

क्लासरूम ट्रेनिंग के लिए होगी इनकी जरूरत:

  • डेस्कटॉप कंप्यूटर, जिसमें वेब कैमरा के साथ माइक्रोफोन और आउटपुट स्पीकर भी हो
  • लैपटॉप, जिसमें कैमरा के साथ माइक्रोफोन और आउटपुट स्पीकर भी हो
  • बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन / प्रोजेक्टर / टीवी

अगर आपको कोई सवाल या संदेह है तो आप dlp@iirs.gov.in पर ईमेल कर सकते हैं। पूरी जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। 

मूल लेख: विद्या राजा 

संपादन – प्रीति महावर

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यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें।

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