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Pearl And Fish Farming

एक एकड़ में मोती और मछली पालन का अनोखा मॉडल, खुद कमाए लाखों, बेरोज़गारों को दिया रोज़गार

बिहार के पश्चिमी चंपारण में रहने वाले, नीतिल भारद्वाज नौकरी छोड़कर, मोती पालन और मछली पालन कर रहे हैं। उन्होंने ‘भारद्वाज पर्ल फार्म एंड ट्रेनिंग सेंटर’ के नाम से अपना ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू किया है, जहाँ लॉकडाउन में बेरोज़गार हुए लोगों को मुफ्त ट्रेनिंग दी गयी।

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बिहार के पश्चिमी चंपारण में रामनगर ब्लॉक के मुडेरा गाँव में रहने वाले 28 वर्षीय नीतिल भारद्वाज, मोती पालन और मछली पालन कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने ‘भारद्वाज पर्ल फार्म एंड ट्रेनिंग सेंटर’ के नाम से अपना ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू किया है, जहाँ वह लोगों को मोती पालन (pearl farm) सिखाते हैं। 

नीतिल साल 2019 से, मोती पालन (pearl farm) और मछली पालन कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात है कि नीतिल ने लॉकडाउन के दौरान, गाँव लौटे बेरोजगार मजदूरों को भी मोती पालन की मुफ्त ट्रेनिंग देकर रोजगार दिया है। 

नीतिल बताते हैं कि वह किसान परिवार से संबंध रखते हैं। लेकिन, उनके यहाँ पारंपरिक खेती ही होती थी। हालंकि, उन्होंने कभी खेती को अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने ग्रैजुएशन करने के बाद एक कंप्यूटर कोर्स कर लिया। कंप्यूटर कोर्स की वजह से, उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी भी मिल गयी। उन्होंने आगे बताया, “साल 2017 में मेरे पिताजी ने पहली बार मोती पालन के बारे में अखबार में पढ़ा। उन दिनों, मैं भी छुट्टी लेकर गाँव आया हुआ था। उन्होंने जब मुझे इस बारे में बताया तो लगा कि कुछ अलग करने की एक कोशिश करनी चाहिए।” 

उन्होंने मोती पालन (pearl farm) के बारे में और जानकारी इकट्ठा की और मध्य प्रदेश में ‘बमोरिया पर्ल फार्म’ से मोती पालन (pearl farm) की ट्रेनिंग लेने पहुँच गए। पहले उन्होंने वहां ट्रेनिंग की और फिर उन्हीं के साथ काम किया ताकि वह मोती पालन का अभ्यास भी कर सकें। साल 2019 में, जब उन्हें लगा कि अब वह खुद मोती पालन कर सकते हैं तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने बताया, “मैंने अपनी एक एकड़ जमीन पर सरकार की सब्सिडी योजना के तहत तालाब खुदवाया और काम शुरू किया। नवंबर 2019 में, पहली बार उन्होंने अपने तालाब में मोती पालन के सीपियां डाली।” 

Pearl And Fish Farming
तालाब में नीतिल

मोती पालन के साथ करते हैं मछली पालन भी: 

नीतिल कहते हैं कि एक एकड़ के तालाब में किसान, 25 से 30 हजार सीपियाँ डाल सकते हैं। लेकिन, उन्होंने शुरुआत में मात्र 400 सीपियाँ ही डाली और नियमित तौर पर इनकी देखभाल की। उनकी शुरुआती लागत 25 हजार रुपए आई। उन्होंने आगे बताया, “आप छोटे स्तर से शुरुआत करते हैं तो जोखिम कम रहता है। मैंने ट्रेनिंग अच्छे से की थी लेकिन, फिर भी जब आप खुद काम करते हैं तो आपको असफलता के लिए भी तैयार रहना चाहिए। शुरू में थोड़ी-बहुत परेशानी सबको होती है लेकिन अगर आप मेहनती हैं तो आप आगे जरूर बढ़ते हैं।” 

तालाब में सीपियाँ डालने के आठ-दस महीने बाद, आप मोती निकाल सकते हैं। वह आगे कहते हैं कि आप चाहें तो और लम्बे समय बाद मोती निकाल सकते हैं। क्योंकि, इससे मोतियों की गुणवत्ता ही बढ़ती है। उन्होंने बताया, “सीप के ऑपरेशन के बाद, उन्हें तालाब में छोड़ दिया जाता है और उनकी देखभाल की जाती है। लगभग 15 दिनों तक, हर रोज आपको तालाब में जाकर देखना होगा कि कोई सीप मर तो नहीं गयी है। अगर कोई सीप मर गयी है तो आपको इसे बाहर निकालना होगा।” 

Pearl Farm And Fish Farm
सीप का ऑपरेशन

वह आगे कहते हैं कि एक सीप पर लगभग 30-40 रुपए की लागत आती है और एक सीप में दो मोती बनते हैं। आपको एक मोती के कम से कम 120 रुपए मिल जाते हैं और अगर किसी मोती की गुणवत्ता बहुत अच्छी है तो आपको इसके 200 से ज्यादा रुपए भी मिल सकते हैं। इस तरह से, आप एक सीप से कम से कम 240 रुपए कमा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पहली बार की फसल से, उन्होंने लगभग 75 हजार रुपए की कमाई की। पहली सफलता के बाद, उन्होंने अब 25 हजार सीपियाँ तालाब में डाली हैं। 

नीतिल कहते हैं, “मोती पालन (pearl farm) के साथ-साथ, वह उसी तालाब में मछली पालन भी कर रहे हैं। मैं दो किस्म की शाकाहारी मछलियों की खेती करता हूँ। मोती पालन के साथ मछली पालन करते समय, इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि मछलियां मांसाहारी न हों। मछली पालन से मैंने एक सीजन में ढाई लाख रुपए की कमाई की है।” नीतिल भारद्वाज अपने इलाके के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। जिला मत्स्य विभाग की एक टीम ने उनके खेतों का दौरा किया है। 

जिला मत्स्य अधिकारी, सूर्य प्रकाश राम बताते हैं, “मैंने अपनी टीम के साथ नीतिल के फार्म का दौरा किया और हमारे साथ कुछ किसान भी थे। उन्होंने जो काम शुरू किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। सामान्य खेती के साथ-साथ, अगर किसान मोती पालन और मछली पालन जैसी पहल भी करें तो अपनी कमाई को दुगना कर सकते हैं। नीतिल ने किसानों के लिए ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू किया है ताकि उन्हें स्थानीय तौर पर ही अच्छी ट्रेनिंग मिल सके। हमारे विभाग द्वारा भी किसानों को हर संभव मदद देने की कोशिश की जा रही है।” 

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Pearl Farm And Fish Farm
अपने उगाए मोती दिखाते हुए

लॉकडाउन में अपने घर लौटे मजदूरों को दिया रोजगार:

नीतिल भारद्वाज कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान, उन्होंने देखा कि गाँव के बहुत से लोग, जो दूसरे शहरों में काम करते हैं, वापस लौटने लगे हैं। बहुत से लोग लॉकडाउन और कोरोना महामारी के कारण बेरोजगार हो गए। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि अगर मैं इनमें से कुछ लोगों की भी मदद कर सकूं तो अच्छा रहेगा। इसलिए, मैंने अपने गाँव के कुछ युवकों से पूछा कि क्या वे मोती पालन सीख कर, मेरे साथ काम करना चाहेंगे? सबसे विचार-विमर्श करने के बाद, मैंने छह लोगों को मुफ्त में मोती पालन की ट्रेनिंग देने की शुरुआत कर दी।” 

मुफ्त ट्रेनिंग के साथ-साथ, नीतिल ने उन्हें रोजगार भी दिया। वह बताते हैं, “फिलहाल, मैं इन्हें पाँच-छह हजार रुपए प्रति माह दे रहा हूँ और मोती पालन के साथ-साथ मछली पालन की भी मुफ्त ट्रेनिंग दे रहा हूँ।” उनके साथ काम कर रहे सजारूल मियाँ कहते हैं, “लॉकडाउन से पहले मैं कश्मीर में मिस्त्री का काम करता था। लेकिन, लॉकडाउन में सब काम छूट गया तो गाँव लौटना पड़ा। लॉकडाउन के बाद भी कहीं अच्छा काम नहीं मिला। जिससे घर चलाने में बड़ी परेशानी हो रही थी। तब यहां पर ट्रेनिंग के बारे में पता चला।”

वह आगे कहते हैं कि अक्टूबर 2020 से वह नीतिल के फार्म पर ट्रेनिंग ले रहे हैं और काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “यहाँ पर अपने परिवार के साथ रहते हुए ही अच्छा काम मिल रहा है। नयी-नयी चीजें सीख रहे हैं और आगे कोशिश यही है कि कभी अपना कुछ काम करेंगे।” 

दूसरों को सिखाते हुए

नीतिल आगे कहते हैं कि दूसरी जगहों से आने वाले किसानों के लिए भी उन्होंने मोती पालन की ट्रेनिंग का कोर्स शुरू किया है। एक बैच में वह 10-15 किसानों को ट्रेनिंग देते हैं। उन्होंने कहा, “यह ट्रेनिंग दो दिन की होती है और हम किसानों से एक न्यूनतम फीस लेते हैं। अभी तक दो बैच हमने लिए हैं और आगे के बैच अक्टूबर के महीने से शुरू होंगे। मेरा अनुभव कहता है कि अगर कोई किसान अच्छी तरह से मोती पालन करे तो एक एकड़ के तालाब से 30 लाख रुपए तक कमा सकता है। जरूरत है तो सिर्फ हुनर और मेहनत की।” 

फिलहाल, वह अपने मोतियों को दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के व्यापारियों को बेच रहे हैं। ये व्यापारी मोतियों को प्रोसेस करके, इनसे अलग-अलग उत्पाद बनाते हैं और बेचते हैं। नीतिल की योजना, भविष्य में अपने खेतों पर ही मोतियों की प्रोसेसिंग का काम शुरू करने की है ताकि वह इससे और ज्यादा लोगो को रोजगार दे सकें और ज्यादा मुनाफा भी कमा सकें। 

नीतिल भारद्वाज से संपर्क करने के लिए आप उन्हें 9525701996 पर कॉल कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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