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हरियाणा: MNC की नौकरी छोड़ शुरू की वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट, लाखों में है कमाई

हरियाणा: MNC की नौकरी छोड़ शुरू की वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट, लाखों में है कमाई

हरियाणा के करनाल में रहने वाले इंजीनियर, निर्मल सिंह सिद्धू ने MNC की नौकरी छोड़कर केंचुआ खाद बनाने का काम शुरू किया। आज वह अपनी वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट, ‘हरकिरपा ऑर्गेनिक्स’ चला रहे हैं, जिससे उन्हें लाखों की कमाई हो रही है।

हरियाणा के करनाल में रहने वाले 33 वर्षीय निर्मल सिंह सिद्धू, किसान परिवार से आते हैं और आज ‘हर किरपा ऑर्गेनिक्स‘ (Har Kirpa Organics) के नाम से अपना Vermicomposting business (केंचुआ खाद बनाने की यूनिट) चला रहे हैं। करनाल के आसपास से सैकड़ों किसान, उनसे उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद खरीदते हैं और बहुत से किसानों को वह मुफ्त में खाद बनाना भी सिखा रहे हैं। जैविक खाद के व्यवसाय के साथ-साथ, निर्मल सिंह जैविक तरीकों से खेती भी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य, अपने परिवार को स्वस्थ भोजन खिलाना और किसानों को उच्चतम गुणवत्ता की जैविक खाद उपलब्ध कराना है। 

निर्मल सिंह ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कुछ वर्षों तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में भी काम किया है। साल 2019 में, उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट की शुरुआत की और आज इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि पढ़ाई के बाद भी, दो-तीन साल तक उन्होंने खेती में हाथ आजमाया था, क्योंकि वह अपनी जमीन से दूर नहीं होना चाहते थे। लेकिन, सामान्य तरीकों से खेती करने से उनकी कोई खास बचत नहीं हुई, बल्कि उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा। निर्मल सिंह कहते हैं कि इसके बाद, उन्होंने नौकरी करने का फैसला किया और एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने लगे। 

उन्होंने बताया, “वहाँ पर मैंने तीन-चार साल काम किया और जब मैंने नौकरी छोड़ी, तब मेरी सैलरी डेढ़ लाख रुपए प्रति माह थी। नौकरी छोड़ने के पीछे की वजह थी कि मैं अपनी जमीन पर ही बड़े स्तर का व्यवसाय करना चाहता था।” 

निर्मल सिंह सि
निर्मल सिंह

शुरू की वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट:

निर्मल सिंह कहते हैं कि वह हमेशा से कोई बिज़नेस करना चाहते थे। इसलिए नौकरी के दौरान, जब उन्होंने इतनी बचत कर ली कि वह कहीं निवेश कर सके, तब उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसा कुछ करना चाहता था, जो जमीन से जुड़ा हुआ हो लेकिन, मुझे मंडी पर निर्भर न होना पड़े। तब मुझे Vermicomposting business का आईडिया आया और मैंने यह सीखने का फैसला किया।” 

उन्होंने अलग-अलग जगहों से Vermicomposting business की ट्रेनिंग ली। निर्मल कहते हैं कि उनकी अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन है। नवंबर 2019 में, उन्होंने अपनी आधी एकड़ जमीन पर यूनिट शुरू करने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने शुरुआत में चार-पाँच कम्पोस्टिंग बेड ही लगाए और धीरे-धीरे अपना काम बढ़ाया। आज उनके यहाँ 100 कम्पोस्टिंग बेड हैं, जिनसे उन्हें सालाना लगभग छह हजार क्विंटल जैविक खाद मिलती है। वह इस खाद को, करनाल के 15 किलोमीटर की सीमा में रह रहे किसानों को ही बेच रहे हैं। 

Vermicomposting business
लगाए 100 कम्पोस्टिंग बेड

47 वर्षीय किसान सुरगीत विरक पिछले दो सालों से निर्मल सिंह से केंचुआ खाद खरीद रहे हैं। विरक बताते हैं कि उन्होंने अपनी 12 एकड़ जमीन पर पॉलीहाउस लगाया है, जिसमें वह सब्जियां उगाते हैं। जैविक सब्जियां उगाने के लिए ही वह निर्मल सिंह से हर साल लगभग 400 क्विंटल खाद खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, “उनकी केंचुआ खाद की गुणवत्ता काफी अच्छी है। हमने उनकी यूनिट पर जाकर देखा भी है कि वह कैसे खाद बनाते हैं और इसलिए उनपर भरोसा बना हुआ है।”

निर्मल सिंह कहते हैं, “Vermicomposting business के लिए गोबर, धान की पराली और केंचुओं की जरूरत होती है। गांवों में गोबर और किसानों के खेतों में पराली, आपको आसानी से कम से कम लागत पर उपलब्ध हो जाएगी। खाद बनाने के लिए, मैं करनाल के आसपास ही दूध की डेयरी चलाने वाले किसानों और गोशालाओं से गोबर खरीदता हूँ और किसानों से धान की पराली ले लेता हूँ। इससे पराली भी नहीं जलती और किसानों को भी फायदा हो जाता है। केंचुओं को आप अपने आसपास के कृषि विज्ञान केंद्रों से खरीद सकते हैं। आप 20 से 40 हजार रुपए की लागत में भी, वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं।” 

कैसे बनता है गोबर की खाद से वर्मीकंपोस्ट:

निर्मल सिंह कहते हैं कि सबसे पहले आप ऐसी जमीन चुनें, जहाँ पर बारिश का पानी न ठहरता हो और समतल हो। क्योंकि, अगर उस जगह पर कहीं पानी भरेगा तो खाद नहीं बनेगी। अब जमीन पर आपको कम्पोस्टिंग बेड बनाने हैं। इसके लिए, आप 30 फ़ीट लंबी और नौ फ़ीट चौड़ी जगह में दो कम्पोस्टिंग बेड साथ में बना सकते हैं। इसमें एक बेड चार-साढ़े चार फ़ीट चौड़ा रहता है। इसके लिए, सबसे पहले जमीन पर एक प्लास्टिक की शीट मापकर बिछा लें। प्लास्टिक की शीट पर चारों तरफ ईंट रखकर बाउंड्री बना दें और फिर इसमें गोबर डालें। 

गोबर का कम्पोस्टिंग बेड बनाने से पहले, गोबर को तीन-चार दिन खुला रखना चाहिए और ऊपर से पानी डालते रहना चाहिए। ताकि इसमें बनने वाली मीथेन गैस पूरी तरह से निकल जाये। गोबर का कम्पोस्टिंग बेड बनाकर ऊपर से केंचुए डाले जाते हैं और फिर इसके ऊपर, आप पराली/पुआल रख दें। इसके बाद, कम्पोस्टिंग बेड के ऊपर पानी का छिड़काव करें। जहाँ, गर्मियों में हर दिन पानी का छिड़काव करना है तो वहीँ, सर्दियों में तीन-चार दिन के अंतराल पर कर सकते हैं। लगभग 30 दिन तक पानी का छिड़काव करते रहें। 40 दिन में खाद बनकर तैयार हो जाती है और लगभग 60-65 दिन में आपको पूरी खाद मिल जाती है। 

Vermicomposting Unit:
सबसे पहले बनाएं कंपोस्टिंग बेड

खाद को निकालने के बाद इसे छननी से छान लें और पैकेट्स में पैक कर लें। निर्मल सिंह अपनी खाद को दो किलो, पाँच किलो, दस किलो और चालीस किलो के पैकेट्स में पैक करते हैं। खाद की बिक्री के अलावा, वह केंचुए भी किसानों को उपलब्ध कराते हैं। फिलहाल, उनके लगभग 150 ग्राहक हैं, जो उनसे सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। 

किसानों को मुफ्त ट्रेनिंग:

खुद खाद बनाकर बेचने के साथ-साथ, निर्मल सिंह दूसरे किसानों को Vermicomposting business की मुफ्त ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। वह बताते हैं कि हर रविवार को वह अपने खेतों पर ही किसानों को ट्रेनिंग के लिए बुलाते हैं। उन्होंने बताया, “यह ट्रेनिंग प्रोग्राम मैंने खासतौर पर उन किसानों के लिए शुरू किया, जिनके पास कम जमीन है और जो अपने खेतों पर ही तीन-चार कम्पोस्टिंग बेड बनाकर खुद खाद बना सकते हैं। बड़े किसान तो अपने खेतों के लिए, ज्यादा मात्रा में खाद खरीद पाते हैं लेकिन, छोटे किसानों के लिए सबसे अच्छा यही है कि वे खुद खाद बनाएं। कम जमीन के लिए उन्हें कम खाद की जरूरत होती है, जो वे खुद बनाकर अपनी लागत और कम कर सकते हैं।” 

उनके यहाँ हर रविवार, 20-30 किसान ट्रेनिंग के लिए आते हैं। इसके अलावा, अगर किसी को उनके यहाँ चार-पांच दिन रुक कर ट्रेनिंग लेनी है तो वे एक न्यूनतम फीस देकर ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा ले सकते हैं। अब तक वह 100 से ज्यादा किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। निर्मल सिंह से खाद बनाने की ट्रेनिंग लेने वाले 33 वर्षीय किसान सोनू जोहल कहते हैं, “मैं पिछले एक साल से निर्मल सिंह जी से खाद खरीद रहा हूँ। उनकी खाद की गुणवत्ता काफी अच्छी है। मैं भी धीरे-धीरे जैविक खेती से जुड़ गया हूँ। उनसे ट्रेंनिंग लेकर, मैंने अपनी आधा एकड़ जमीन पर सब्जियों की जैविक खेती शुरू की है।” 

सोनू कहते हैं, “जैविक खाद की लागत काफी कम होती है। साथ ही, मैंने निर्मल सिंह जी के कई फ्री ट्रेनिंग सेशन में भी हिस्सा लिया है। आगे मेरी कोशिश यही है कि मैं खुद ही अपने खेतों के लिए, यह उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद बना लूँ। इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है।” 

Vermicomposting business
किसानों को मुफ्त ट्रेनिंग

आगे निर्मल सिंह कहते हैं कि अगर किसान, Vermicomposting Business शुरू करना चाहते हैं, तो वे मात्र 20 से 30 हजार रुपये की लागत में भी शुरू कर सकते हैं। लेकिन, सबसे पहले अच्छी ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है। किसानों को सबसे पहले वर्मीकम्पोस्टिंग कैसे की जाती है, यह सीखना चाहिए। इसके बाद, वे अपने आसपास गोबर, पुआल, केंचुए आदि के स्त्रोत ढूंढ़ें। जहाँ से उन्हें ये सभी चीजें आसानी से और कम से कम लागत पर उपलब्ध हो जाएं। उन्होंने कहा, “कम्पोस्टिंग बेड लगाने की शुरुआत अपने खेतों पर ही की जा सकती है या कोई अन्य जमीन, जिसका किसानों को बहुत ज्यादा किराया न देना पड़े। पहले, तीन-चार कम्पोस्टिंग बेड से ही शुरुआत करें और जब खाद बनाने में सफलता मिलने लगे तो आप अपने काम को और आगे बढ़ा सकते हैं।” 

अपने Vermicomposting business से निर्मल सिंह को सालाना लगभग आठ लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है। वह अंत में कहते हैं, “आज का जमाना नौकरी का नहीं व्यवसाय करने का है। अगर आपके पास किसी व्यवसाय का आईडिया है और आपको भरोसा है कि इसमें आपको सफलता मिलेगी तो आपको इस पर जरूर काम करना चाहिए। कृषि से जुड़े कई तरह के उद्यमों में आप हाथ आजमा सकते हैं। इससे आपको तो फायदा होगा ही, आप दूसरों को भी रोजगार दे पाएंगे।” 

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है तो आप 9050205626 पर निर्मल सिंह से संपर्क कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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