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E-Rickshaw चालकों के लिए सौगात, अब ‘दो मिनट’ में होगी बैटरी फुल

वरुण गोयनका और अक्षय कश्यप ने दिल्ली में एक EV स्टार्टअप, ‘चार्ज-अप’ की स्थापना की है, जहाँ e rickshaw चालकों को खाली बैटरी के बदले, चार्ज की हुई बैटरी दी जाती है।

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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही, पूरे देश में बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वॉइंट्स के बुनियादी ढांचे को स्थापित करने की सख्त जरूरत है। मौजूदा वक्त में वाहन को चार्ज करने में औसतन पांच से छह घंटे लगते हैं। यदि चार्जिंग पॉइंट की संख्या जरूरत के हिसाब से न हो, तो बैटरी को रिचार्ज करने के लिए, जरूरी समय और बढ़ जाता है। ऐसे में, इस समस्या का एक वैकल्पिक और संभव समाधान बैटरी स्वैपिंग है। दिल्ली स्थित स्टार्टअप,‘चार्ज-अप’ इलेक्ट्रिक रिक्शा चालकों को यह सेवा प्रदान करता है।

इस स्टार्टअप से न केवल ड्राइवरों की आय बढ़ रही है, बल्कि कई टन कार्बन फुटप्रिंट भी कम हो रहा है। दिल्ली-एनसीआर में, प्रतिदिन 320 इलेक्ट्रिक रिक्शा बैटरी स्वैपिंग के साथ, इस EV स्टार्टअप ने एक वर्ष में, लगभग 500 टन CO2 उत्सर्जन को बचाने का दावा किया है।

इसकी स्थापना 2019 में, वरुण गोयनका और अक्षय कश्यप द्वारा की गई थी। यह उद्यम, ई-रिक्शा के लिए ‘बैटरी एज़ ए सर्विस (बीएएएस)’ नामक बैटरी स्वैपिंग मॉडल मुहैया कराता है। यह एक सब्सक्रिप्शन पर आधारित मॉडल है, जिसमें ड्राइवर किसी भी शुरूआती लागत के बिना, किराये पर बैटरी ले सकते हैं। प्रत्येक स्वैप की कीमत 150 रुपये है और ड्राइवर दिन में दो से तीन बार, इस सेवा का लाभ उठा सकता है। दूसरे शब्दों में, प्रति किलोमीटर ड्राइविंग लागत केवल 1.3 रुपये है। इस प्रकार, बैटरी को रिचार्ज करने की परेशानी के बारे में चिंता किए बिना, ड्राइवर ज़्यादा दूरी कवर कर सकते हैं।

Varun Goenka and Akshay Kashyap,
Varun Goenka and Akshay Kashyap,

द बेटर इंडिया से बात करते हुए, वरुण कहते हैं, “हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहाँ ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण से संबंधित मुद्दे सबसे सबसे ज़्यादा हैं। इस तरह की समस्यों का समाधान स्थायी आविष्कारों से ही संभव है। हम ईको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल कर, ई-रिक्शा चालकों के लिए बेहतर कमाई के अवसर देना चाहते हैं। साथ ही, बैटरी चार्ज करने की समस्या में भी, उनकी मदद करना चाहते हैं। बैटरी चार्जिंग की समस्या की वजह से, ई-रिक्शा चालकों की कमाई सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है।”

अक्षय आगे कहते हैं, ‘बैटरी स्वैपिंग तकनीक’ शायद विभिन्न ऑटोमेकरों की ‘अंडरस्टैंडर्ड बैटरी‘ की चुनौती से निपट सकती है।

बैटरी स्वैपिंग की जरूरत और भारत में बिजली का भविष्य

Charge station

गुवाहाटी में 16 साल तक कपड़ा और पेट्रोलियम का अपना पारिवारिक व्यवसाय चलाने के बाद, 38 वर्षीय वरुण एक क्लीन टेक फर्म, ‘अटलांटा एनर्जी’ में काम करने के लिए दिल्ली आ गए। कंपनी के सीईओ के रूप में, उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े बाजार के बारे में जाना।

असम के गुवाहाटी विश्वविद्यालय से कॉमर्स ग्रैजुएट वरुण कहते हैं, “मैंने साफ़ ऊर्जा को बढ़ावा देने में, टेक्नोलॉजी की भूमिका की अच्छी समझ हासिल की और देश में ई-मोबिलिटी सेक्टर में सुधार के प्रमुख क्षेत्र की पहचान की।”

दूसरी तरफ, 43 वर्षीय अक्षय, पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं और इस क्षेत्र में काम करने के लिए काफी उत्साहित हैं, जो मोबिलिटी सेक्टर में नेट जीरो कार्बन भविष्य की ओर जाने में, एक सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है और व्हार्टन स्कूल से फाइनेंस और ऑपरेशंस में डिप्लोमा किया है। एक अमेरिकी फर्म में कुछ समय काम करने के बाद और वरुण से मिलने से पहले, वह कुछ सालों के लिए प्राकृतिक गैस ईंधन के अपने पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहे।

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वरुण और अक्षय, दोनों ही अनुभवी और अपने क्षेत्र के माहिर हैं। इन दोनों का एकमात्र उद्देश्य, ई-रिक्शा के लिए बैटरी चार्ज करने की समस्या का समाधान निकालना था। वे बैटरी चार्ज होने की प्रक्रिया में लगने वाले समय और इससे जुड़े पैसों की समस्या का हल निकालना चाहते थे। वरुण ने स्टार्टअप शुरू करने के लिए, 1.2 करोड़ रुपये का निवेश किया और बाद में, ‘MapmyIndia’ इनके साथ एक एंजेल निवेशक के तौर पर जुड़ा।

Double money

अक्षय कहते हैं, “आज भारत में लगभग 80% इलेक्ट्रिक वाहन ई-रिक्शा हैं। वे स्वच्छ परिवहन के सबसे किफायती साधन हैं। इस सेगमेंट में देश में 2.4 मिलियन से ज़्यादा ऐसे वाहन हैं, जिससे हर दिन लगभग 14 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। बैटरी स्वैपिंग के साथ, चालक को ऑपरेटिंग लागत नहीं उठाना पड़ेगा।”

बैटरी स्वैपिंग की विशेषताएं

  • ‘चार्ज-अप’ भारत-निर्मित उन्नत लिथियम-आयन बैटरी मुहैया कराता है, जिसका वजन 13 किलो है। यह पारंपरिक वाहन की बैटरी (120 किलो) की तुलना में इसे संभालना बहुत आसान है।
  • इस्तेमाल की हुई बैटरी को देने और चार्ज बैटरी को लेने में दो मिनट का समय लगता है।
  • बैटरी की अदला-बदली करके, रिक्शा प्रतिदिन 200 किमी की दूरी तय करती है। जबकि, अगर बैटरी रिचार्ज की जाए, तो वह 80 किमी की ही दूरी तय कर सकती है।
  • रिक्शा मालिक को प्रति स्वैप केवल 150 रुपये खर्च करने पड़ते है। चार्ज-अप निर्धारित दूरी और बैटरी लाइफ-सायकल को बनाए रखने के लिए, एडवांस तकनीकी सहायता प्रभी देता है।
  • यह प्रक्रिया दिल्ली / NCR के आसपास, उनके तीन बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों में से एक में की जा सकती है।
  • ड्राइवर नकद या UPI से भुगतान कर सकते हैं और पैकेज ग्राहकों की प्रति किमी लागत के आधार पर हैं।
  • अब तक, कंपनी की दी गई बैटरी ने 20 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। कंपनी का लक्ष्य इसे 5,00,000 किमी प्रति माह करना है।
  • स्वैपिंग स्टेशन पर फिर से इस्तेमाल में लेने के लिए, खाली बैटरी को रिचार्ज किया जाता है। अगर बैटरी काम करना बंद कर देती है, तो कंपनी इसे ई-कचरा रिसाइकल करने वालों को दे देती है। जहाँ से इसे सौर ऊर्जा आधारित उद्योगों तक पहुंचाया जाता है।

दिल्ली में एक ई-रिक्शा चालक, विजेंद्र कुमार कहते हैं कि इस योजना के ज़रिए, उनकी प्रति दिन आय 800 रुपये से बढ़कर 2,000 रुपये हो गई है। वह कहते हैं, “मेरे लिए स्वैपिंग सेवा का इस्तेमाल करना ज़्यादा आसान है, इससे मैं ज़्यादा सवारियां भी ले पाता हूँ। आय बढ़ जाने से, अब मैं अपने परिवार को बिहार से दिल्ली शिफ्ट कर सकता हूँ।”

चार्ज-अप स्टार्टअप के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

मूल लेख- गोपी करेलिया

संपादन – जी एन झा

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