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E-Waste to Eco-Art: बेकार पड़े गैजेट्स से बना दी पेंटिंग, ज्वेलरी, घड़ी जैसी चीजें

E-Waste to Eco-Art: बेकार पड़े गैजेट्स से बना दी पेंटिंग, ज्वेलरी, घड़ी जैसी चीजें

बेंगलुरु में रहने वाले 58 वर्षीय विश्वनाथ मल्लाबादी एक इको-आर्टिस्ट हैं, जो पिछले आठ सालों से इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अपसायकल करके ज्वेलरी, पेंटिंग, मिनी बिल्डिंग, डमी रोबोट आदि बना रहे हैं।

क्या आपके घर में पुराना इलेक्ट्रॉनिक कचरा इकट्ठा हो रहा है और आपको समझ नहीं आ रहा कि इस इलेक्ट्रॉनिक कचरे का प्रबंधन (E-Waste Management) कैसे करें? क्योंकि, इलेक्ट्रॉनिक कचरे को रीसायकल के लिए देने की सुविधा बहुत ही कम जगहों में है। ऐसे में, आज हम आपको मिलवा रहे हैं एक ऐसे इको-आर्टिस्ट से, जो इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अपसायकल कर, खूबसूरत और कामगार चीजें बना रहे हैं।  बेंगलुरु में रहने वाले 58 वर्षीय विश्वनाथ मल्लाबादी, पिछले आठ सालों से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने लगभग एक टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा इकट्ठा किया है, जिसके प्रबंधन में वह जुटे हुए हैं। 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस काम के लिए उनकी प्रेरणा, उनके पिताजी हैं, जो खुद एक मूर्तिकार और चित्रकार हैं।। विश्वनाथ ने पहले बीएससी की और फिर ‘एप्लाइड आर्ट्स’ में बीएफए डिग्री की। उन्होंने कला के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ, ‘सस्टेनेबल आर्ट’ के क्षेत्र में भी काम किया। साल 2020 में ही, वह विप्रो कंपनी से बतौर सीनियर कंसलटेंट रिटायर हुए थे। वह बताते हैं, “खराब चार्जर, फ्लॉपी ड्राइव, सीडी रोम ड्राइव, हार्ड डिस्क जैसी कोई भी चीज, एक इको-आर्टिस्ट के लिए कभी भी बेकार नहीं होती है। इतने सालों में, मैंने लगभग एक टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा (E-Waste) इकट्ठा करके, इससे अलग-अलग चीजें बनाई हैं जैसे- ज्वेलरी, डमी रोबोट, घड़ी, मूर्ति, तस्वीर, वॉल आर्ट आदि।” 

E Waste Management
विश्वनाथ मल्लाबादी

कैसे बनता है ‘इको-आर्ट’

विश्वनाथ ई-कचरे से जो भी बनाते हैं, उसे वह ‘इको-आर्ट’ कहते हैं। हालांकि, यह इको-आर्ट बनाना इतना सरल नहीं है। वह बताते हैं कि कोई चीज वह एक दिन में बना लेते हैं तो किसी पर वह एक महीने तक काम करते हैं। कभी-कभी, वह एक साथ कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनमें इस कचरे में छुपी खूबसूरती या इसके उपयोग को ढूंढने का हुनर है। वह कहते हैं, “इस काम की शुरुआत नोकिया के एक मोबाइल से हुई। जब मैंने इसे खोलकर, इसके कल-पुर्जों को अलग-अलग किया तो इसके अंदर एक बहुत ही खूबसूरत सर्किट था। दूसरों को वह कचरा लगता लेकिन, मुझे उसमें खूबसूरत रंग और आकार नजर आए। और बस वहीं से इस ‘इको आर्ट’ का जन्म हुआ। इसके बाद, मैंने अलग-अलग स्त्रोतों से ई-कचरा इकट्ठा करना शुरू कर दिया।।” 

इको-आर्ट तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में वह कहते हैं कि सबसे पहले अलग-अलग स्त्रोतों से पुराने और बेकार गैजेट्स इकट्ठा किए जाते हैं। फिर इन्हें कई तरह के आकार, रंग, टेक्सचर के आधार पर अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद, हर एक हिस्से को अलग-अलग जगह रखा जाता है और पहचान के लिए इनमें निशान भी लगाए जाते हैं। और तब विश्वनाथ इन्हें बनाने के लिए, अपना आईडिया तैयार करते हैं। आईडिया मिलने के बाद, वह डिजाइनिंग पर काम करते हैं और फिर ई-वेस्ट से तैयार होता है ‘इको-आर्ट।’ 

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अजीम प्रेमजी की तस्वीर और ज्वेलरी

विश्वनाथ ने अब तक 500 से भी ज्यादा ‘इको-आर्ट’ बनाएं हैं, जिसमें अजीम प्रेमजी की तस्वीर, डमी रोबोट अवतार 3.0, फ्यूचर सिटी, इको-प्लांट्स आदि शामिल हैं। वह कहते हैं, “दिन-प्रतिदिन टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है और कुछ समय में ही, गैजेट्स पुराने हो जाते हैं। इस वजह से, हर दिन ई-कचरा उत्पन्न होता रहता है। हमारे यहां कचरे की रीसाइक्लिंग भी बहुत छोटे स्तर पर होती है। ऐसे में इसे अपसायकल करना, पर्यावरण को संरक्षित करने का एक प्रभावी तरीका है। इससे बहुत हद तक, लैंडफिल के भराव को रोका जा सकता है।” 

लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश

विश्वनाथ कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने अपने इस काम को बड़े स्तर पर ले जाने का विचार किया है। वह न सिर्फ खुद ‘इको-आर्ट’ बनाएंगे बल्कि उनकी योजना है कि सेमीनार और वर्कशॉप करके भी, ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जाए। वह बेंगलुरु के ‘सौंदर्य इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस’ में एक सेमिनार के दौरान, इस विषय पर पैनल स्पीकर भी रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने विप्रो कंपनी में अपने इको-आर्ट का ‘सोलो एग्जीबिशन’ भी किया है। हैदराबाद में आयोजित हुई, फर्स्ट ‘इंटरनेशनल डाटा साइंस कॉन्फ्रेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ में भी उन्होंने अपने ‘इको आर्ट’ का प्रदर्शन किया है। 

उनका कहना है, “इको-आर्ट तैयार करने में बहुत-सी परेशानियां आती हैं। ई-कचरे को इकट्ठा करने और इको-आर्ट को रखने के लिए, जगह की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन, यह भी सच है कि अगर ज्यादा से ज्यादा लोग इस आर्ट से जुड़ें और अपने ई-कचरे को जिम्मेदारी से अपसायकल करें तो यह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद होगा। एक आर्टिस्ट के तौर पर मेरी जिम्मेदारी समाज और पर्यावरण के लिए भी है। इसलिए, मैं इस काम को बड़े स्तर पर ले जाना चाहता हूँ।” 

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ई-कचरे से बनाई मूर्ति और डमी रोबोट

हाल ही में, विश्वनाथ ने अपने इको-आर्ट को https://www.behance.net/ वेबसाइट पर भी डाला है। यहाँ से लोग, न सिर्फ उनके बनाये इको-आर्ट ऑनलाइन देख सकते हैं बल्कि अगर वे कुछ खरीदना चाहें तो खरीद भी सकते हैं। विश्वनाथ ने बताया कि इससे पहले उन्होंने कभी भी, अपनी इको-आर्ट की बिक्री नहीं की। लेकिन रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने तय किया है कि वह ई-कचरे से बने, अपने इको-आर्ट की एक अलग पहचान बनाएंगे ताकि देश के हर कोने में लोग, अपने घरों से निकलने वाले ई-कचरे के प्रति संवेदनशील बन सकें।  

अंत में वह कहते हैं, “अगर आपके पास कल्पना शक्ति है और आप पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, अपना जीवन जीना चाहते हैं तो आप अपने ई-वेस्ट को खूबसूरत और उपयोगी चीजों में बदल सकते हैं। अगर, आप अपसायकल भी न कर पाएं तो कोशिश करें कि यह कचरा लैंडफिल तक न पहुंचे।” 

यदि आप विश्वनाथ मल्लाबादी से संपर्क करना चाहते हैं तो उन्हें 8105933114 पर कॉल या ewasteart@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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