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अब सिर्फ दादी ही नहीं बल्कि विज्ञान ने भी ‘घी’ को माना स्वास्थ्य के लिए सही!

डोसा घी के साथ/विकिपीडिया

मेरे घर में आज भी खाना घर के बनाये हुए देसी घी में बनता है। अगर गलती से कभी रिफाइंड तेल का इस्तेमाल हो जाये तो मेरी दादी घर सिर पर उठा लेती हैं। क्योंकि उनका कहना है कि देसी घी से ज्यादा लाजबाब कुछ भी नहीं। और सिर्फ मेरी दादी ही क्यों बहुत से लोगों की दादी देसी घी खाने की नसीहत देती हैं।

हमारे यहां घी सदियों से रसोई की शान रहा है! जो सुगंध और स्वाद घी के बने खाने में है वो और कहीं नहीं।

यदि कभी आप घी बनते हुए देख लें तो बस फिर और कुछ देखने की क्या जरूरत है। दरअसल घी भैंस या गाय के दूध से मिलने वाले मक्खन को धीमी आंच पर गर्म करके बनाया जाता है।

इस प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन आखिर में आपको मनमोहक खुशबू वाला एक तरल पदार्थ मिलता है, जो ठंडा होने के साथ गाढ़ा हो जाता है।

घर पर बना घी/विकिपीडिया

लेकिन मक्खन के भाई के लिए कुछ समय से चीज़ें ‘ऑल इज वैल’ नहीं हैं। जी हाँ, कुछ फिटनेस के दीवाने लोगों का दावा है कि घी शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसमें फैट होता है, जो कि हमारे दिल के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

पिछले कुछ दशकों में लोगों में बढ़ती कोरोनरी आर्टरी बीमारी और कोलेस्ट्रॉल के लिए घी में मौजूद फैटी एसिड को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। लेकिन अब इन सभी बातों को आराम देने का वक़्त है। जी हाँ, आज हम आपको बताएंगें कि आपकी दादी बिल्कुल सही कहती हैं।

आयर्वेद में घी को सभी खाद्य पदार्थों में ‘सबसे पहले और सबसे जरूरी’ बताया गया है। इसका उपयोग सभी रीती-रिवाजों के साथ-साथ मालिश करने व सभी स्वादिष्ट भोजन बनाने में भी किया जाता है। और ऐसा बहुत ही सही कारणों के चलते किया जाता है।

घी और उसके स्वास्थ्य-लाभों के बारे में किये गए एक अध्ययन में, चूहों के दो समूहों को रखा गया। एक को “मूंगफली का तेल” खिलाया गया, और दूसरे को चावल की भूसी में “घी” मिलाकर खिलाया गया। चूहों के तीसरे समूह को केवल चावल की भूसी खिलाई गयी।

शोधकर्ताओं ने प्रारंभिक सीरम कोलेस्ट्रॉल, और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तरों को नोट किया और उनके खाने के 40 दिनों के बाद एक बार फिर से जाँच की।

जाँच करने के बाद पता चला कि घी खाने वाले चूहों में कम डेन्सिटी (घनत्व) वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) की मात्रा में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और तेल खाने वाले चूहों की तुलना में अन्य सीरम कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम है। एलडीएल को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

बल्कि घी खाने वाले चूहों में एलडीएल की मात्रा काम हो गयी थी।

परिणाम बताते हैं कि मूंगफली का तेल घी की तुलना में ज्यादा नकारात्मक प्रभाव वाला है। बाकी स्वास्थ्य पर घी के सकारात्मक प्रभाव ही हैं।

न केवल घी की सामग्री बल्कि फ्राई करने के लिए भी इसका स्मोकिंग पॉइंट बहुत कम है। इसमें से गर्म होने बाद भी कोई कण नहीं निकलते हैं जैसा कि तेलों के साथ नहीं है।

यदि आप स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और स्वस्थ बने रहने की चाह रखते हैं, तो दिन का एक चम्मच घी आपके लिए कारगर सिद्ध हो सकता है। तो बिना किसी ना-नुकुर के अपनी रोटी-सब्ज़ी या फिर पराठे के साथ घी का लुत्फ़ उठाईये!

सलाह: अपने डाइट प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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