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दो भाइयों का इको फ्रेंडली बिज़नेस, हर खरीद पर लगाते हैं पौधे, अब तक 4500+ पौधे लगवाए

दो भाइयों का इको फ्रेंडली बिज़नेस, हर खरीद पर लगाते हैं पौधे, अब तक 4500+ पौधे लगवाए

मुंबई के रहने वाले मिशाल पारदीवाला (34) और मिकाइल पारदीवाला (31), अपने ब्रांड ‘TreeWear’ के जरिए, लोगों के लिए इको-फ्रेंडली उत्पाद जैसे- टी-शर्ट, हैंड सैनिटाइजर, डियोड्रेंट, लिप बाम आदि बना रहे हैं। इसके साथ ही, यहाँ से की गयी हरेक खरीद का कुछ प्रतिशत ‘पौधरोपण अभियान’ के लिए जाता है।

हम अपने शहरों पर गौर करें तो पाएंगे कि हमारे बचपन में ये शहर बहुत अलग हुआ करते थे। उन दिनों, हमें ज्यादा हरियाली, साफ़ पानी और ज्यादा पशु-पक्षी देखने को मिलते थे। लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल ही बदली हुई है। हरियाली की जगह, हर तरफ इमारतें दिखती हैं और पानी के स्रोतों में कचरा। ज्यादातर लोग इन चीजों को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए यही बदली हुई तस्वीर, कुछ अलग करने की वजह बनी है। हम बात कर रहे हैं, मुंबई में रहने वाले दो भाइयों की, जिन्होंने शहर में बढ़ते प्रदूषण और समुद्र में बढ़ते कचरे को देखकर, कुछ अलग करने की ठानी और शुरू किया इको-फ्रेंडली व्यवसाय (Eco Friendly Business)। 

मिशाल पारदीवाला (34) और मिकाइल पारदीवाला (31) का बचपन मुंबई के कोलाबा में बीता। पढ़ाई के लिए दोनों भाई, पहले शहर से बाहर गए और फिर ऑस्ट्रेलिया चले गए। मिशाल ने आर्किटेक्चर में पढ़ाई की तो वहीं मिकाइल ने सोशियोलॉजी में। साल 2012 की शुरुआत में, ये दोनों भाई भारत लौट आये और अपने-अपने क्षेत्र में काम करने लगे। वे कहते हैं, “जब हम मुंबई लौटे तो यहाँ बहुत कुछ बदल चुका था। हमारे घर से दिखने वाला समुद्र तरह-तरह के कचरे से भरा पड़ा था। इसलिए, अक्सर हम दोनों भाई इस बात पर चर्चा करने लगे कि पर्यावरण के लिए, क्या किया जा सकता है?” 

पर्यावरण को बचाने के लिए उन्हें यह समाधान नज़र आया कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं और पर्यावरण के अनुकूल ही उत्पाद इस्तेमाल किए जाएं। इसके लिए, वह अपने स्तर पर कुछ करना चाहते थे। मिकाइल कहते हैं, “कुछ समय, मिशाल ने आर्किटेक्चर क्षेत्र में काम किया और मैंने अपने पिता के साथ एक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट का बिज़नेस किया। लेकिन काफी सोच-विचार और शोध के बाद, हमने ऐसा कुछ करने का सोचा, जहाँ हम पर्यावरण के लिए कुछ कर सकें। इसलिए 2016 में, हमने अपने एक अलग व्यवसाय की शुरुआत की, जिसका नाम है ‘ट्रीवेयर‘।” 

Eco Friendly Business
मिकाइल पारदीवाला और मिशाल पारदीवाला

‘ट्रीवेयर’ एक सस्टेनेबल कंपनी है, जिसे मिशाल और मिकाइल ने अपने बचत के पैसों को निवेश करके शुरू किया। इसके जरिए, वे लोगों को टी-शर्ट, हैंड सैनिटाइजर, डियोड्रेंट, लिप बाम जैसे प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद उपलब्ध करवा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन सभी उत्पादों की पैकेजिंग भी सस्टेनेबल तरीकों से की जाती है। साथ ही, उनके यहाँ से की गयी हरेक खरीद का कुछ प्रतिशत, पौधरोपण के लिए जाता है।

प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद

ट्रीवेयर के सभी उत्पाद पर्यावरण को ध्यान में रखकर ही बनाए जाते हैं। जैसे उनकी टी-शर्ट जैविक कपास और डाई से बनती हैं। साथ ही, इनकी पैकेजिंग के लिए भी पुरानी, बेकार और कचरे में फेंकी गयी प्लास्टिक की बोतलों को अच्छे से साफ करके, इस्तेमाल किया जाता है। वे कहते हैं, “हम दोनों ही बहुत ज्यादा फैशन और ट्रेंड के पीछे नहीं जाते हैं। इसलिए, हमने इन टी-शर्ट को भी ऐसे ही डिज़ाइन किया है, जो पहनने में आरामदायक हैं और साथ ही, पर्यावरण के लिए अनुकूल तरीकों से बन रही हैं। शुरुआत में, हमने अपने दोस्तों व परिवार में लोगों को ये टी-शर्ट ट्राय करने के लिए कहा। हमें सभी से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।”

इसके अलावा, उन्होंने देखा कि निजी स्वच्छता को लेकर लोग काफी जागरूक हैं। लेकिन बाजार में उनके लिए जो उत्पाद उपलब्ध हैं, वे पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इसलिए उन्होंने महीनों तक शोध करके, बिना अल्कोहल और पैराबेन इस्तेमाल किए, एक खास हैंड सैनिटाइजर बनाया। इसे बनाने के लिए, उन्होंने सभी शुद्ध तेलों का इस्तेमाल किया है, जो प्राकृतिक हैं और त्वचा के लिए भी अच्छे हैं। आपके साथ-साथ ये आपके बच्चों के लिए भी सुरक्षित हैं। इसी तरह, उन्होंने प्राकृतिक डियोड्रेंट स्टिक बनाई  है, जो अल्कोहल, सल्फेट, एल्युमीनियम के साथ-साथ कृत्रिम सुगंध से भी मुक्त है। 

Eco Friendly Business
ट्रीवेयर उत्पाद

वे बताते हैं कि डियोड्रेंट स्टिक की पैकेजिंग के लिए, वे रीसायकल किए हुए कार्डबोर्ड (गत्ते) का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारे सभी उत्पाद की पैकेजिंग ऐसी होती है, जिसे फिर से रीसायकल किया जा सके। हम अपने उत्पादों के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्डबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं। आगे हमारी कोशिश अपने व्यवसाय को जीरो-वेस्ट बनाने की है।” 

हालांकि, अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से लोगों के बीच जागरूकता की कमी रही है। वे कहते हैं, “भारत में ज्यादातर मध्यम-वर्गीय परिवार हैं, जिनके लिए अच्छा खाना-पीना और रहन-सहन जुटा पाना ही उनकी प्राथमिकता है। रोजमर्रा की परेशानियों में उलझे रहने की वजह से, उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे पर्यावरण, प्रदूषण जैसे मामलों पर ज्यादा सोच पाएं। इसलिए, हम उन्हें दोष नहीं दे सकते हैं कि वे पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद क्यों नहीं खरीदते हैं?” 

फिर भी पिछले पाँच सालों में, उनके ग्राहकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। सोशल मीडिया पर जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने काफी हद तक, लोगों को खरीददारी करते समय सही चुनाव करने के लिए प्रेरित किया है। ट्रीवेयर को अब हर महीने 250 से ज्यादा आर्डर मिलते हैं और उन्हें लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है। 

अल्कोहल फ्री हैंड सैनीटाइजर

उनकी एक ग्राहक कीर्ति टिबरेवाल कहती हैं, “मैं पिछले दो साल से ट्रीवेयर के उत्पाद इस्तेमाल कर रही हूँ और मुझे उनकी डियोड्रेंट और लिप बाम बहुत ज्यादा पसंद हैं। ये बिल्कुल केमिकल-फ्री हैं। जिनकी त्वचा संवेदनशील है, ऐसे लोगों के लिए ये उत्पाद, एक बेहतरीन विकल्प हैं।” 

उनके एक और ग्राहक, दक्ष शर्मा कहते हैं कि आजकल ऐसा व्यवसाय मिलना मुश्किल है, जो आर्थिक विकास से ज्यादा प्रकृति से जुड़े संवेदनशील मामलों पर काम करे। वे कंपनी के सभी उत्पाद इस्तेमाल करते हैं क्योंकि, उन्हें पता है कि वे जो भी खरीद रहे हैं, उसके जरिए वे अपने पर्यावरण के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं। 

पौधरोपण पर जोर

उनके यहाँ से जो भी उत्पाद खरीदा जाता है, उसकी कमाई का कुछ हिस्सा ‘पौधरोपण अभियान’ के लिए जाता है। मिशाल कहते हैं, “हमने शुरू में ही ठान लिया था कि जितना ज्यादा हो सकेगा, हम पौधे लगाने की कोशिश करेंगे। लेकिन सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं हैं बल्कि इनकी देखभाल भी जरुरी है ताकि ये पौधे बड़े होकर पेड़ बनें और प्रकृति में हरियाली बढ़ाएं।” 

इसलिए, वह पौधरोपण के क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ काम करते हैं। उनके यहाँ से पौधरोपण अभियान के लिए फंड दिए जाते हैं और उनके साथ संगठन के लोग, कंपनी और उनके ग्राहकों की तरफ से पौधे लगाते हैं। वह बताते हैं, “पौधरोपण के काम के लिए ‘CommuniTree‘ हमारा पार्टनर है, हम उन्हें सभी फंड भेजते हैं और वे अपनी टीम के साथ मिलकर पौधरोपण कराते हैं। ‘ट्रीवेयर’ द्वारा फंड किए गए पौधे, राजस्थान के उदयपुर और पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में लगाए जा रहे हैं। साथ ही, इन पौधों को ‘जियोटैग’ भी किया जाता है।”

लगवा रहे हैं पौधे

इस संगठन के प्रोजेक्ट लीड, वरुण विठलानी कहते हैं कि ट्रीवेयर कंपनी, भारत के जंगल बढ़ाने में लगातार योगदान दे रही है। साथ ही, उनके इस योगदान से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने अब तक जितने भी पौधे लगवाए हैं, उनसे ग्रामीण लोगों को 420 दिन का रोजगार मिला है। वे कहते हैं कि दुनिया में इस तरह के और व्यवसायों की भी जरूरत है, जो पर्यावरण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ें। ट्रीवेयर के योगदान से, अब तक 4500 से ज्यादा पेड़ लग चुके हैं। 

मिकाइल और मिशाल के उत्पादों की मांग बढ़ रही है लेकिन, उन्होंने अपने व्यवसाय के स्तर को छोटा ही रखा है। उनकी टीम में अभी चार लोग काम कर रहे हैं। उत्पादों के निर्माण के लिए, उन्होंने अलीबाग में एक ‘महिला स्वयं सहायता समूह’ की महिलाओं को काम पर रखा हुआ है। लॉकडाउन के दौरान उनका काम कई महीनों तक बंद रहा लेकिन, अपने छोटे स्तर के चलते उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ा। फिलहाल, उनका सालाना टर्नओवर 20 लाख रूपये है। 

पौधरोपण करते दोनों भाई

अंत में दोनों भाई सिर्फ यही कहते हैं कि अपनी कंपनी के जरिए वे लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाना चाहते हैं। लोगों की उन्नत होने की चाह ने, पर्यावरण और धरती का सबसे ज्यादा नुकसान किया है और इसकी भरपाई, सही उत्पादों का चुनाव और ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करके की जा सकती है। 

अगर आप ‘ट्रीवेयर’ के उत्पाद ऑर्डर करना चाहते हैं या मिकाइल और मिशाल से संपर्क करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें। 

संपादन- जी एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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