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वैज्ञानिकों ने बनाई गेहूं की काली,नीली और बैंगनी किस्में, सामान्य गेंहू से बेहतर है पोषण

पंजाब के मोहाली में नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (NABI) की वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग ने गेहूं की तीन नई किस्में विकसित की हैं- काली, नीली और बैंगनी। जो ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और शरीर में वसा के स्तर को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

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क्या आपने खाई हैं काले या बैंगनी (जामुनी) रंग की रोटियां या इन रंगों के बिस्कुट और ब्रेड? अगर नहीं! तो खाना शुरू कर दीजिए। क्योंकि, ये हमारे सामान्य गेहूं से बने आटा की रोटियों, बिस्कुट और ब्रेड से ज्यादा स्वस्थ और फायदेमंद है। सबसे अच्छी बात यह है कि ये सब गेहूं से ही बने हुए हैं और इनमें अलग से कोई रंग नहीं मिलाया गया है। इन किस्मों में, काले गेहूं (Black Wheat), बैंगनी गेहूं (Purple Wheat) और नीले गेहूं (Blue Wheat) शामिल हैं। गेहूं की इन नयी किस्मों को बनाने का कमाल किया है, पंजाब के मोहाली स्थित नैशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट (NABI) के वैज्ञानिकों ने। 

गेहूं की ये किस्में न सिर्फ अलग-अलग रंगो में हैं बल्कि सामान्य गेहूं से ज्यादा पोषक और स्वास्थय के लिए लाभकारी हैं। काले और जामुनी गेहूं ब्लड शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल लेवल और शरीर में वसा का लेवल कम करने में सहायक सिद्ध हुए हैं। इस प्रोजेक्ट की मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. मोनिका गर्ग बतातीं हैं कि गेहूं को ‘एंथोसायनिन’ से उसका बैंगनी रंग मिलता है, जो एक रंग और एंटीऑक्सीडेंट भी है। 

Black Wheat
डॉ. मोनिका गर्ग और गेहूं की विकसित की गई तीन किस्में

वह आगे बताती हैं, “गेहूं की ये नई विकसित किस्में, पारंपरिक गेहूं की तुलना में अधिक पोषित हैं। इसमें जिंक तथा आयरन जैसे खनिज और एंटीऑक्सीडेंट हैं, जिन्हें एंथोसायनिन कहा जाता है। ये आमतौर पर जामुन, ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे फलों में पाए जाते हैं। हालांकि, ज्यादा मात्रा में इन फलों को खाने से आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। लेकिन, इन रंगीन गेहूं में भी एंटीऑक्सीडेंट की समान मात्रा होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का खतरा नहीं रहता और ये फायदेमंद होते हैं।” 

इन गेहूं के आटा का प्रयोग भी सामान्य आटा के जैसे- ब्रेड, बन, बिस्कुट, नूडल्स, रोटियां आदि व्यंजन बनाने के लिए किया जा सकता है। 

Black Wheat and purple wheat products
काले और बैंगनी गेहूं के बने व्यंजन

किया छह साल लंबा शोध

साल 2011 में, NABI में अपने शोध के लिए, मोनिका ने ‘बायो-फोर्टिफिकेशन’ पर काम करने का फैसला किया। यह शोध का ऐसा क्षेत्र है, जो हमेशा से कृषि बायोटेक्नोलॉजिस्ट के लिए एक चुनौती रहा है। जिसमें पोषण को बढ़ाने के लिए, फसलों के जीन में बदलाव या चुनिंदा फसलों का प्रजनन किया जाता है। 

वह आगे बताती हैं, “जापान की तोत्तोरी यूनिवर्सिटी में पहले ही बैंगनी गेहूं पर काफी शोध हो चुका है। मैंने इसकी तकनीकी जानकारी के लिए, वहाँ पर एक 45 वर्षीय प्रोफेसर से संपर्क किया। उसी वर्ष, मैंने जापान और अमेरिका से जीनोम प्लाज्मा भी मंगवाया ताकि पौधों का प्रजनन, भारत की जलवायु परिस्थितियों के अनुसार किया जा सके।” पौधों का प्रजनन, एक तरीका है, जिसमें क्रॉस-ब्रीडिंग (संकरण) के जरिए पौधों के अनुवांशिक गुणों में बदलाव किया जाता है। जिससे इनमें पोषण की मात्रा बढ़ जाती है और किसानों के लिए इन किस्मों को उगाना फायदेमंद रहता है। 

जीनोम में संशोधन के बाद, बीजों को यूनिवर्सिटी में ही, खेती के लिए उपलब्ध जमीन पर लगाया गया। मोनिका आगे कहती हैं, “शुरुआती कई प्रयासों में हमें सफलता नहीं मिली। मोहाली की जलवायु परिस्थितियों में बीजों को उगाने के लिए, बार-बार काम किया गया। इसके अलावा, हमें यह भी सुनिश्चित करना था कि इनकी खेती अन्य राज्यों में भी हो सके।” 

कई संशोधनों के बाद साल 2016 में, गेहूं की तीन किस्में विकसित हुईं – बैंगनी, नीली और काली। एंथोसायनिन की मात्रा के आधार पर, इनका रंग अलग-अलग था, काले गेहूं (Black Wheat) में सबसे अधिक एंथोसायनिन की मात्रा थी। 2017 में गेहूं की बैंगनी और काली किस्मों को व्यावसायिक तौर पर जारी कर दिया गया। 

Black Wheat
काले, नीले और बैंगनी गेहूं उगाने वाली डॉ. मोनिका और उनकी टीम

स्वस्थ विकल्प

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मोनिका के अनुसार, बीजों को तैयार करने के बाद, उनकी टीम ने प्रयोगशाला में परीक्षण करके, कच्चे माल (रॉ मटेरियल) और पके हुए व्यंजनों में पोषण मात्रा और गुणों की जांच की। उन्होंने 12 हफ्तों तक, चूहों को एक खुराक दी, जिसे बनाने में गेहूं की नयी किस्मों का प्रयोग हुआ था। इन प्रयोगों को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च’ (NIPER) की ‘संस्थागत पशु आचार समिति’ (Institutional Animal Ethics Committee) द्वारा मंजूरी दी गयी थी। 

चूहों को पाँच समूहों में विभाजित किया गया था। चूहों के कुछ समूहों को साधारण गेहूं से बना उच्च वसा वाला आहार दिया गया, जबकि अन्य को बैंगनी गेहूं से बना आहार दिया गया। इनका बारीकी से विश्लेषण करके, यह निष्कर्ष निकाला गया कि बैंगनी गेहूं से कोलेस्ट्रॉल स्तर, ट्राइग्लिसराइड और फ्री फैटी एसिड के स्तर में कमी आई।

वह कहती हैं, “आहार में एंथोसायनिन की नियमित मात्रा, शरीर से हानिकारक ‘फ्री रेडिकल्स’ को हटा सकती है। यह कई विकारों जैसे मोटापा, हृदय रोगों और मधुमेह को भी रोकती है।”

2017 में, आईटीसी, बंसल बेकर्स और विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड सहित 28 कंपनियां, इस गेहूं को उगाने और इसके आटा का उपयोग करके, खाद्य उत्पाद बनाने के लिए तैयार थीं। उन्होंने एनएबीआई, मोहाली के साथ बीजों की खरीद के लिए, समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किया और हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में फसलों को ‘कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग’ के माध्यम से उगाना शुरू किया। मोनिका कहती हैं कि किसान अपनी उपज की बिक्री के बाद, प्रति एकड़ दो हजार से चार हजार रुपये की उच्च आय प्राप्त करने में सक्षम रहे।

2018 में, इंदौर स्थित श्री लखदातार फूड्स के संस्थापक अनिल हुरकत ने काले गेहूं (Black Wheat) की खरीद के लिए, NABI के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए। अनिल ने बताया, “समझौते के बाद, मैंने किसानों से गेहूं खरीदा, जो पहले से ही, एक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग विधि के माध्यम से इसे उगा रहे थे। इन बीजों को शाजापुर जिले में स्थित मेरी प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार किया गया और इनसे आटा जैसे उत्पाद बनाकर, ‘संजीवनी’ ब्रांड नाम के तहत बेचा गया। लेकिन अभी इनकी बिक्री नहीं बढ़ी है।” अनिल कहते हैं कि काले गेहूं के फायदों के बारे में, अभी कम ही लोग जानते हैं।

जयपुर निवासी डॉ. राजेश मिश्रा काले गेहूं के नियमित उपभोक्ता हैं। वह 30 से अधिक वर्षों से दवा और खाद्य उद्योग में काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि यह एक अद्भुत भोजन है, जिसके कई फायदे हैं। एक बड़ी सर्जरी होने के बाद, उन्होंने तीन महीने पहले नियमित रूप से काले-गेहूं की बनी रोटियों का सेवन शुरू किया। डॉक्टरों ने उन्हें सामान्य गेहूं के भोजन से बचने और कई तरह के अनाजों का बना खाना खाने की सलाह दी थी।

Black Wheat Chapati
काले गेहूं (Black Wheat) के आटे से बनी रोटी

वह बताते हैं, “मैंने एक महीने तक मल्टीग्रेन आटा से बना भोजन खाने की कोशिश की। लेकिन, इससे ब्लड शुगर और पाचन की समस्या होने लगी। मैं फार्मास्युटिकल उद्योग में काम करता हूँ और इस दौरान मैंने काले / बैंगनी गेहूं के बारे में प्रकाशित एक लेख पढ़ा। मैंने इसके गुणों और लाभों का विश्लेषण करने के बाद, इसे खरीदना शुरू किया। सबसे पहला फायदा मैंने देखा कि मेरे पाचन में सुधार हुआ। यहाँ तक ​​कि मेरा शुगर लेवल भी स्थिर है। अब, मेरे साथ मेरे परिवार वाले भी केवल काले गेहूं की रोटियां ही खाते हैं।”

यदि आप काला गेहूं (Black Wheat) खरीदना चाहते हैं, तो आप 9893756350 पर अनिल को फ़ोन कर सकते हैं। अमेज़न पर विभिन्न ब्रांड नामों के तहत बैंगनी और काला गेहूं का आटा भी उपलब्ध है।

मूल लेख: रौशनी मुथुकुमार 

संपादन- जी एन झा

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