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चॉकलेट गणेश से मशहूर हुई रिन्तु कल्याणी राठौर कर रही है समाज कल्याण के लिए और भी बहुत कुछ !!

एक मूर्ति द्वारा त्यौहार का उत्साह भी, पर्यावरण की रक्षा भी और गरीबों में प्रसाद वितरित करने की नेक सोच भी। आईये जानते हैं इस अनूठी सोच की जननी रिन्तु कल्याणी राठौर के बारे में!

त्यौहार हमारे जीवन में सामाजिक महत्व भी रखते हैं। मूलतः हम सभी इस सामजिक दायरे को अपने परिवार एवं मित्रों तक ही सीमित कर देते हैं किन्तु रिन्तु ने इस दायरे को बढ़ा कर गणेश चतुर्थी को समाज के उस वर्ग के साथ मनाने का सोचा, जिनके लिए पैसो के आभाव के कारण, इन त्योहारों का कोई महत्त्व नहीं रह जाता।

रिन्तु कल्याणी राठौर, पेशे से डिजाइनर, शौक से एक बेकर, और दिल से एक समाज सेविका हैं।

इन्होने दो-तीन साल पहले 35 किलो चॉकलेट से गणपति की एक प्रतिमा बनायी थी। यह प्रतिमा 38 इंच लम्बी थी, जिसे बनाने में रिन्तु को 50 घंटे लग गए। रिन्तु ने इससे पहले भी ऐसी 28 किलो एवं 32 इंच की एक प्रतिमा बनायीं थी जिसका विसर्जन दूध में किया गया था। इस चॉकलेट दूध को प्रसाद के रूप में गरीब बच्चों में बाँट दिया गया।

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चॉकलेट से गणपति की मूर्ति बनाते हुए रिन्तु

रिन्तु की एक फेसबुक पोस्ट के अनुसार, “आशा करती हूँ इस बार और भी अधिक लोग इस प्रसाद को ग्रहण कर पायेंगे ताकि बप्पा उनके अन्दर वास कर पायें। वैसे भी बप्पा का प्रिय निवास हमारे भीतर रहना है, और कहीं नहीं।”

रिन्तु इस नेक कार्य के पीछे की सोच के बारे में बताती हैं,

“विसर्जन के बाद जुहू तट का दृश्य मुझसे देखा नहीं जाता था। श्रद्धा के नाम पर पर्यावरण को हानि पहुँचाना मुझे सही नहीं लगा। अतः मैंने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे त्यौहार का उत्साह भी बना रहे, और पर्यावरण भी दूषित न हो।”

रिन्तु के इस कार्य की कई लोगों ने सराहना की है। किन्तु रिन्तु का मकसद इससे पैसे कमाना नहीं है। अब वे निशुल्क वर्कशॉप आयोजित करती हैं जिसमे लोग उनसे ऐसी प्रतिमा बनाना सीखते हैं।

रिन्तु की उपलब्धि यहीं तक सीमित नहीं है। ये एक संस्था ‘फ़ूड आर्मी‘ की भी संचालिका हैं। जिसमे अभी करीब 100 सदस्य हैं जिन्हें ये ‘होम बेकर’ कहती है। रिन्तु की ये आर्मी आपदा की स्थिति में ज़रुरतमंदों की मदद करती हैं।

फ़ूड आर्मी की टीम

 

रिन्तु बताती हैं कश्मीर बाढ़ के दौरान वहां के लोगों की मदद के लिए हमारे हर सदस्य ने 35-35 थेपले बनाये थे। कुल 3500 थेपले हमारी ओर से कश्मीर भेजे गए थे। इसी प्रकार नेपाल भूकंप में हमारी संस्था ने 1 लाख थेपले भेजे थे।

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रिन्तु की फ़ूड आर्मी ने एक बार रामकृष्ण मिशन में एक विशाल कप केक से बनी गणपति जी की रंगोली भी बनायीं। प्रत्येंक सदस्य द्वारा 30 कप केक बनाये गए थे, जिन्हें बाद में 350 गरीब बच्चों में बाँट दिया गया।

फ़ूड आर्मी द्वारा बनाया गया कप केक से बनी भगवान गणेश की रंगोली

 

उन्होंने “बेटी बचाओ” की सोच पर एक छोटी बच्ची के रूप का केक भी बनाया था।

इस पर कई लोगों ने उनसे ये प्रश्न किया कि, ” इतनी प्यारी बच्ची के रूप का यह केक कैसे काटोगे?” इसका एक बहुत ही सटीक उत्तर रिन्तु ने दिया,

“एक केक के लिए हमें इतना बुरा लग रहा है??!!!! क्यूँ न हम बच्चियों के लिए भी थोड़ा सोच लें और उनके लिए कुछ करने का प्रयास करें।”

रिन्तु- अपने बनाये चॉकलेट गणेश के साथ

इस गणेशोत्सव पर, रिन्तु के चॉकलेट गणेश बनाकर गरीब बच्चों में खुशियाँ बांटने के कदम को आप सब लोगों ने बेहद सराहा! और कई लोगों ने रिन्तु की ही तरह अगले साल गणेशोत्सव मनाने की इच्छा भी जाहिर की। आप सभी के इसी सद्भाव को देखते हुए चोकलेट गणेश बनाने की विधि सीखने की चाह रखने वालों के लिए रिन्तु ने एक वर्कशॉप का आयोजन करने का निर्णय लिया है, जहाँ वे निःशुल्क चॉकलेट गणपति बनाना सिखाएंगी।

आपके लिए रिन्तु का सन्देश –

“चॉकलेट गणेश को आप सभी लोगो ने इतना सराहा, उसके लिए मैं आप सभी की आभारी हूँ। पर सिर्फ सराहना ही काफ़ी नहीं है जब तक कि आप भी इस विचार को अपना नहीं लेते। आप चाहे कहीं भी रहते हों, मैं आप तक पहुँच कर आपको चॉकलेट गणेश बनाने की विधि निःशुल्क सिखा सकती हूँ। इस साल भगवान् श्री गणेश ने मुझे माध्यम बनाकर बच्चो में खुशियाँ बांटी थी। अगले साल वे हज़ारों घरो में इसी तरह जन्म लेकर इन खुशियों को भी हज़ार गुना बढ़ा देंगे, यही आशा रखती हूँ।

इस वर्कशॉप का हिस्सा बनने के लिए निचे दिए लिंक पर रजिस्टर कर सकते हैं-

http://goo.gl/forms/073t2EIMDi

रिन्तु निश्चित तौर पर भारत को एक बेहतर देश बनाने की ओर बढ़ चुकी हैं। उनकी यह सोच एवं प्रयास प्रशंसा के काबिल हैं।

यदि आप भी इनकी फ़ूड आर्मी से जुड़ना चाहते हैं या इनकी वर्क शॉप के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो इनसे इनकी मेल आईडी rintu.rathod@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, इनकी वेबसाइट पर अधिक जानकारी ले सकते है!

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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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