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हर दिन 7 क्विंटल टमाटर उगाती हैं UP की यह महिला किसान, विदेश तक जाती है उपज

हर दिन 7 क्विंटल टमाटर उगाती हैं UP की यह महिला किसान, विदेश तक जाती है उपज

विट्टलपुर, उत्तर-प्रदेश की रहने वाली सफल महिला किसान, कनक लता, टमाटर की दो किस्म- दुर्ग और आर्यमन की खेती कर रहीं हैं, जो अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुँच रहे हैं।

रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग अपने बच्चों पर निर्भर हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि अब उनकी पूरी जिम्मेदारी उनके बच्चों को ही निभानी चाहिए। लेकिन वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को एक नए सफर के तौर पर लेते हैं। किसी और पर निर्भर होने की बजाय, खुद अपनी एक नयी पहचान बनाने में जुट जाते हैं। जैसा उत्तर-प्रदेश की कनक लता ने किया। पति के रिटायरमेंट के बाद, वह अपने गाँव लौटकर खेती करने लगी। शुरुआत में, कई असफलताएं मिलीं, लोगों ने मजाक भी बनाया पर कनक लता ने हार नहीं मानी और आज टमाटर की खेती (Tomato Farming) में एक सफल किसान बनकर उभरीं हैं। 

कहानी की शुरुआत होती है, साल 2017 से, जब कनक लता के पति वासुदेव पांडेय एक सहकारिता बैंक से रिटायर हुए। कुछ महीने तक अपने बेटे के पास अमेरिका में रहने के बाद, दोनों पति-पत्नी वतन लौट आये। यहाँ आकर वे उत्तर-प्रदेश में गाँव विट्टलपुर में रहने लगे, जो मिर्जापुर से 30 किमी दूर है। रिटायरमेंट के बाद उनकी कोई पेंशन नहीं थी, इसलिए अपनी आजीविका के लिए, उन्होंने अपनी डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती करने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने इससे पहले कभी खेती नहीं की थी। 

कनक बतातीं हैं, “हम किसान परिवार से आते हैं। मैंने हमेशा अपने दादाजी और रिश्तेदारों को खेतों में काम करते हुए देखा था।” 57 वर्षीया कनक ने अपनी थोड़ी-बहुत जानकारी के आधार पर ही अपने खेत में गेंहूँ, मटर और टमाटर आदि उगाना शुरू किया। लेकिन उन्हें जो उपज मिली, उससे वह संतुष्ट नहीं थीं। वह बताती हैं कि उनके खेतों से उपज बहुत ही कम थी और दूसरे पड़ोसी किसान भी उनका मजाक बनाते थे कि वे कम उर्वरकता वाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। 

इस तरह की कई असफलताओं के बाद कनक लता ने किसानी पर अपनी जानकारी को बढ़ाया और वैज्ञानिक तरीकों से खेती शुरू की। आज वह अपने खेत से एक दिन में सात क्विंटल टमाटर का उत्पादन ले रही हैं। साथ ही, उनके टमाटरों की सिर्फ आसपास के बाजारों में नहीं बल्कि यूनाइटेड किंगडम और ओमान में भी मांग है। 

अपनाए वैज्ञानिक तरीके

Tomato Farming
Kanak Lata Earned Success in Tomato Farming

कनक ने सफलता पाने के लिए निरंतर प्रयास किए। इसके लिए, उन्होंने नव चेतना कृषि केंद्र निर्माता कंपनी लिमिटेड से परामर्श किया, जो नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) का सहयोगी वेंचर है। जैविक खेती के प्रशिक्षण के तहत, उन्होंने अपने खेत में आवश्यक बदलाव करने के लिए दिल्ली में प्रयत्न संस्था से 50,000 रुपये का ऋण लिया।

कनक कहती हैं, “मैंने टमाटर उगाने (Tomato Farming) का फैसला किया और इसके लिए खेतों में जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट और अन्य कुछ पोषक तत्व डालकर मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाया।” अगस्त 2020 में उन्होंने दो किस्म के टमाटर लगाए- दुर्ग और आर्यमन। वह कहती हैं, “मैंने दुर्ग किस्म के टमाटरों की कुछ समय पहले ही उपज ली और बाजार में इनकी अच्छी मांग रही है। मुझे इन टमाटरों के लिए हर पेटी (क्रेट) पर 100 रुपये (सामान्य टमाटरों के मुकाबले) ज्यादा मिले। ये टमाटर कम खट्टे हैं और ज्यादा रस वाले हैं। इस टमाटर को लंबे समय तक रखा जा सकता है।”

जिला बागवानी अधिकारी (डीएचओ), मेवाराम, ने भी खेत का दौरा किया और कनक की उपज से नमूने (सैंपल) लिए। वह कहते हैं, “ये टमाटर रेफ्रिजरेटर में रखे बिना कम से कम दो सप्ताह तक चल सकते हैं। अन्य देसी किस्मों की तुलना में वे लंबे, गोल और बेहतर हैं।”

कनक का दावा है कि वह अपने खेतों से हर दिन 50 टोकरी टमाटर की उपज ले रही हैं। वह कहतीं हैं, “हर पेटी में 25 किलो टमाटर होते हैं। मैंने इससे अच्छी आय कमाई है, जिससे ऋण और अन्य निवेशों को चुकाने में मदद मिली। जल्द ही मुनाफा आने लगेगा और मुझे लगभग 2.5 लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है।”

मेहनत से मिली सफलता

Tomato Farming
Vasudev and Kanak Lata doing Tomato Farming

नव चेतना एग्रो सेंटर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के सीईओ मुकेश पांडे कहते हैं, “वैज्ञानिक तरीकों जैसे मल्चिंग, ड्रिप इरिगेशन और अन्य पहलुओं ने कनक को सफलता हासिल करने में मदद की। उनके टमाटरों को राजभवन भेजा गया और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने उनकी सराहना की है। अपने टमाटरों के चलते वह एक प्रेरणा बन गई हैं।”

मुकेश कहते हैं कि कनक की सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “वे अगले सीजन में दुर्ग और आर्यमन टमाटर ही उगाएंगे।” 

कनक कहती हैं कि खेती के तरीकों को सीखने के अलावा, उन्होंने मजदूरों की कमी, पानी की आपूर्ति और तकनीकी कठिनाइयों को भी हल किया है। अब अपनी उपलब्धि से संतुष्ट, कनक शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट और काले टमाटर के साथ प्रयोग करने के लिए तैयार हैं।

वह कहतीं हैं, “मुझे यह सफलता कृषि विषेशज्ञों की सलाह की वजह से मिली है। यह सुनकर अच्छा लगता है कि लोगों को मेरे खेत की फसल पसंद आ रही है और ग्राहक बार-बार मेरे टमाटर खरीदने आ रहे हैं। फलते-फूलते खेत का नजारा संतोषजनक है। इस पूरे काम में मेरे पति का भी पूरा सहयोग रहा है।” 

वासुदेव कहते हैं कि बहुत से लोग रिटायरमेंट के बाद, खाली बैठे उदास होने लगते हैं लेकिन, इसके बजाय इसे जीवन की एक नयी पारी के रूप में लेना चाहिए। वह कहते हैं, “लोग अक्सर महसूस करते हैं कि नौकरी के बाद, जीवन में उनका उद्देश्य समाप्त हो गया है। लेकिन यह समय उन्हें अपने उन शौक को पूरा करने के लिए उपयोग में लेना चाहिए, जो वे नौकरी के दौरान न कर सके।” 

कनक सभी किसानों से अपील करती हैं कि वे ऐसे सिंचाई के तरीके इस्तेमाल करें, जिससे बिजली और पानी की बचत हो। वह कहती हैं, “मिर्जापुर एक पहाड़ी क्षेत्र है, और किसानों को अक्सर पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। ड्रिप सिंचाई से पानी की खपत कम होगी और उपज बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसानों को पारंपरिक तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक तरीकों पर भरोसा करना शुरू कर देना चाहिए।”

मूल लेख: हिमांशु नित्नावरे 

संपादन- जी एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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