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इस एक शख्स ने व्हाट्सएप और ट्विटर पर, 23 लाख किसानों की उपज बेचने में की मदद, जानिए कैसे

इस एक शख्स ने व्हाट्सएप और ट्विटर पर, 23 लाख किसानों की उपज बेचने में की मदद, जानिए कैसे

चंडीगढ़ के एग्री-टेक स्टार्टअप ‘Harvesting’ के फाउंडर और CEO, रुचित गर्ग के ट्विटर हैंडल ‘Harvesting Farmer Network’ के द्वारा करोना महामारी के दौरान, भारत के 23 लाख किसानों को 168 करोड़ रूपये से ज्यादा लागत की फसल की उपज बेचने में मदद मिली।

पिछले साल अप्रैल में जब कोरोनो महामारी के कारण, देश भर में लॉकडाउन लगा हुआ था, तब एग्री-टेक स्टार्टअप ‘हार्वेस्टिंग’ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रुचित गर्ग ने ‘हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क‘ (HFN) नामक एक ट्विटर अकाउंट बनाया। इस अकाउंट को उन्होंने, देश भर के संकटग्रस्त किसानों को अपनी फसल बेचने में मदद (Helping Farmers) करने के लिए बनाया था। इसके लॉन्च के कुछ दिनों के भीतर ही, @harvestingfn ट्विटर हैंडल के लगभग 15 हजार फॉलोवर्स बढ़ गए। किसानों द्वारा मदद मांगे जाने के बाद रुचित, किसानों के नाम, फसल के प्रकार, उपज की मात्रा, स्थान तथा फोन नंबर जैसी जानकारियां, खरीदारों से साझा किया करते थे। जिससे खरीदार किसानों से सीधा संपर्क कर, उनकी फसलें खरीद सकते थे।

हार्वेस्टिंग के संस्थापक रुचित गर्ग

रुचित का दावा है कि 10 महीनों में, किसानों ने 168 करोड़ (23 मिलियन डॉलर) से अधिक कीमत की कृषि-उपज को सूचीबद्ध किया है, जिसमें 23 लाख किसान शामिल हैं। इस ट्विटर हैंडल के माध्यम से 22 राज्यों के सामान्य किसान और किसान उत्पादक संगठन (FPO) जुड़े हैं। इस प्रणाली में किसान, उत्पाद के मुख्य विवरण और उनकी तस्वीरों के साथ HFN टीम को व्हाट्सएप संदेश भेजते थे। यह मंच किसानों की जानकारी को ट्विटर पर साझा कर, खरीदारों तक पहुँचाता था।


HFN ट्विटर पेज ने 200 से अधिक कृषि उत्पादों को सूचीबद्ध किया, जिन्हें तब खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों (food-processing companies), खाद्य और पेय पदार्थ (F&B) रेस्तराओं, खाद्य निर्यातकों और पाँच सितारा होटलों द्वारा खरीदा गया। रुचित और उनकी टीम ने ट्विटर पर अपने पेज के माध्यम से यह सब किया, लेकिन इनमें कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने की जरूरत थी।

इन कमियों को दूर करने के लिए उनके स्टार्टअप ने आज भारतीय किसानों को सीधे बाजार में मदद करने और अपने कृषि उत्पादों को थोक खरीदारों को बेचने के लिए HFNMandi.com शुरू करने की घोषणा की है। उनकी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “HFN मंडी किसानों के लिए भारत और दुनियाभर में, वास्तविक खरीदारों के साथ जुड़ने और लेनदेन करने के लिए, एक मुफ्त ऑनलाइन सेवा है।”

ट्विटर पेज की सीमाएँ

रुचित ने द बेटर इंडिया को बताया, “हालांकि, कई किसानों ने HFN की मदद से अपनी उपज बेची। लेकिन, हमने महसूस किया कि किसान परिवहन खोजने, मिनिमम ऑर्डर क्वांटिटी (MOQ) का पता लगाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। साथ ही, वे खरीदारों पर भी पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि न तो वे उनके गाँव और न ही उनके जिला या राज्य के थे।”
उन्होंने आगे बताया, “अनजान लोगों को उपज बेचने को लेकर, किसानों को हमेशा आशंका रहती थी।”
इन मुद्दों को हल करने के लिए, उनकी 15-सदस्यीय टीम ने महसूस किया कि किसानों के बारे में सिर्फ जानकारी देना और उनकी उपज की मात्रा बताना ही पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने बताया, “हमें लगा कि किसानों को भुगतान, लेन-देन संबंधी जानकारी की जरूरत है। साथ ही, खरीदार, विक्रेता और ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने वालों के बीच विश्वास सुनिश्चित करना भी जरूरी है। हमने तब एक ऑनलाइन बाजार बनाने का निर्णय लिया, जो भारत में अपनी तरह का पहला बाजार है। जहाँ किसान अपनी फसलों को सीधे सूचीबद्ध कर रहे हैं और खरीदार उनसे सीधी खरीदारी कर रहे हैं। हमारे इस मंच के साथ, किसानों और खरीदारों को मिनिमम ऑर्डर क्वांटिटी (MOQ) के बारे में ज्यादा विचार करने की जरूरत नहीं है। आतंरिक (इन-हाउस) तौर पर विकसित एल्गोरिदम का उपयोग करके, हम सही ढंग से यह तय कर सकते हैं कि खरीदारों और किसानों को व्यापार करने के लिए, कम से कम कितने ऑर्डर की जरूरत है। खरीदार कितनी दूर रहते हैं, हमारा सिस्टम इसके आधार पर, अपने आप ही खरीद किये जाने वाले MOQ की गणना कर सकता है। जिसमें फसल के ताजा बने रहने की अवधि और यह उत्पाद किस सेक्टर में जा रहा है आदि प्रभावित करने वाले बिंदु भी शामिल हैं।”

किसानों के लिए

हार्वेस्टिंग ने एक परिवहन लॉजिस्टिक कंपनी के साथ भी समझौता किया है, जो खरीदार और किसान, दोनों को ही परिवहन संबंधी सेवाओं के लिए आश्वस्त करता है।

अपने इन-हाउस एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए हार्वेस्टिंग, ऑटोमेटिक रूप से परिवहन की दूरी और लागत की गणना करता है और इसे अपने मंच पर साझा करता है ताकि खरीदार को लैंडिंग कॉस्ट (उतराई-लागत) का पता चल सके। खरीदारों के पास किसान को कॉल करने और अपनी चिंताओं को बताने या प्रश्नों को पूछने का विकल्प भी है। खरीदार ऑर्डर देता है और पैसे जमा करता है, जबकि ‘हार्वेस्टिंग’ किसान को बताता है कि उन्हें एक ऑर्डर मिला है और किसान को अपनी उपज को भेजने के लिए तैयार रहना चाहिए।

वह कहते हैं, “किसानों के लिए हमने एक सरल तकनीक प्रणाली बना रखी है। क्योंकि, ज्यादातर किसान ऑनलाइन काम करने में सहज नहीं हैं। इसके बजाय, किसान हमारे साथ व्हाट्सएप नंबर पर बातचीत करते हैं। वे जिन उत्पादों को सूचीबद्ध करना चाहते हैं, वे हमें उनसे सम्बंधित सन्देश और उनकी तस्वीरें भेजते हैं। जब वे अपना पहला सन्देश (नमस्ते या किसी अन्य तरह का अभिवादन) भेजते हैं तो एक कंप्यूटर जनित प्रणाली (computer-generated system) के द्वारा उन्हें तीन भाषाओं (हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी) का विकल्प मिलता है। उनकी भाषा के विकल्प के आधार पर, कंप्यूटर द्वारा उनके नाम, जगह, फसल के प्रकार और वे कितनी फसल बेचना चाहते हैं, जैसे कुछ सवाल पूछे जाते हैं।”

इन मूल जानकारियों को इकठ्ठा करने के बाद, हार्वेस्टिंग के एजेंट इनकी समीक्षा करते हैं। यदि कोई स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ती है, तो उनके एजेंट किसान से सीधा फ़ोन पर संपर्क करते हैं। वेरिफिकेशन के लिए, HFN किसानों से उनके आधार और पैन कार्ड की सारी जानकारी लेता है, और यदि वे FPO के होने का दावा करते हैं तो उनसे कुछ अन्य जरूरी दस्तावेजों की मांग की जाती है। रुचित का मानना ​​है कि ऐसा होने से खरीदारों का किसानों पर विश्वास बढ़ता है। एक बार सभी जानकारी सत्यापित हो जाने के बाद, उन्हें HFN मंडी वेबसाइट पर डाल दिया जाता है, जहाँ संभावित खरीदार कई सूचीबद्ध कृषि-उत्पादों की तुलना कर सकते हैं।

वह बताते हैं, “यह खरीदारों के लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि इससे पहले किसी वेबसाइट पर इतने पारदर्शी रूप से, किसानों द्वारा कृषि-उत्पादों को सूचीबद्ध नहीं किया गया था। पहले खरीदार एक ही मंच पर, इतना सब खोजने में सक्षम नहीं थे। जैसे अगर, किसी खरीदार को यह जानना हो कि उनके आस-पास अच्छी गुणवत्ता के पपीते कहाँ मिलते हैं, तो वे इस वेबसाइट की मदद से अब उन्हें आसानी से खोज सकते हैं। हम गुणवत्ता की जाँच करते हैं और खरीदारों को ट्रांसपोर्ट से उत्पाद, उन तक पहुँचाने के दौरान लाइव अपडेट भी देते रहते हैं। हमारे मंच पर उत्पादों को सूचीबद्ध करने से, मेघालय के किसान अब दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी अपनी फसलों का निर्यात करने में सक्षम हैं। हमने इससे पहले भी दक्षिण अफ्रीका में, 20 हजार किलो अदरक का निर्यात करने में किसानों की मदद की थी।”

Helping Farmers
अपने कार्यों के लिए मेघालय सरकार द्वारा किए गए सम्मानित

उनकी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “यहाँ कीमतें किसानों द्वारा तय की जाती हैं और ऑर्डर खुद किसानों द्वारा पूरे किए जाते हैं। खरीदारों के लिए, यह न केवल आकर्षक कीमतों पर एक ही छत के नीचे, बड़े पैमाने पर फसलों के चयन का विकल्प प्रदान करता है, बल्कि थोक में कृषि की उपज खरीदने का एक सहज अनुभव भी प्रदान करता है। जिसमें परिवहन की बुकिंग, जमीन की गुणवत्ता की जाँच, कानूनी अनुबंध आदि शामिल हैं।”

पश्चिम एशिया और अमेरिका में निर्यात करने वाले दिल्ली के शशांक कहते हैं, “HFN मंडी ने एक निर्यातक के रूप में मेरा जीवन बहुत आसान बना दिया है। HFN टीम बहुत जल्दी और कुशलता से काम करती है। निष्पक्षता से बिजनेस करने के उनके तरीके अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। HFN से ही मेरी सभी कृषि-निर्यात जरूरतें पूरी हो जाती हैं। MOQ की ऑटोमेटिक गणना, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और परिवहन की सुविधाओं आदि से मुझे, अपने काम में अब काफी राहत मिलती है।”

वर्तमान में, चंडीगढ़ स्थित ‘HFN’ व्यक्तिगत लागत लगा कर, तैयार किया गया एक स्टार्टअप है। हालांकि, वे कई निवेशकों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जिन्होंने इस मंच में रुचि दिखाते हुए, किसानों को अतिरिक्त आय कमाने के लिए, एक वैकल्पिक माध्यम की पेशकश की है। अंत में, रुचित कहते हैं कि यह उन 12 करोड़ छोटे किसानों के लिए एक मंच है, जिनका अच्छा समय अब आ गया है।

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक

संपादन- जी एन झा

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प्रीति महावर

प्रीति महावर को संपादन, रिपोर्टिंग, साक्षात्कार, रचनात्मक लेखन और फोटोग्राफी में लगभग 5+ वर्षों का अनुभव है। प्रीति ने स्नातकोत्तर की उपाधि ‘जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन’ विषय में प्राप्त की है। इन्हें मीडिया के तीनो स्तम्भ प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा न्यू मीडिया का अनुभव है और इन्होंने सी.एन.बी.सी. आवाज़, दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख मीडिया हाउसेस के साथ कार्य किया है।
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