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लॉकडाउन की मार बनी सफलता का औजार: घर में मछली-पालन कर, कमा रहे रु. 25,000/माह

केरल में कारपेंटर का काम करने वाले अयप्पा दास मछली-पालन से हर माह रु. 25000 रूपये की कमाई कर रहे हैं।

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करोना महामारी के कारण लगे विश्व-व्यापी लॉकडाउन ने, पूरी दुनिया को अपने घर पर रहने के लिए मजबूर कर दिया था। देश में, लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन इस विपदा की घड़ी में कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने समस्या में समाधान खोज कर, अपने रोजगार की सफल शुरुआत की। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिन्होंने मछली पालन (Fish Business) को अपनी सफलता का औजार बनाया है।

केरल के एर्नाकुलम जिले के निवासी, अयप्पा दास, लॉकडाउन से पहले, कारपेंटर का काम करते थे। लेकिन जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तो वह उन लाखों लोगों में से एक थे, जो बिना किसी आमदनी के घर पर रहने के लिए मजबूर थे। लेकिन आज, अयप्पा के हालात पहले से बिलकुल अलग हैं। आज वह एक सफल मछली पालक हैं।

अयप्पा ने द बेटर इंडिया को बताया, “लॉकडाउन के दौरान, मैंने इंटरनेट पर नया बिजनेस शुरू करने के बारे में ढेर सारी जानकारी इकट्ठा की। मैंने देखा कि कोई अचार का बिजनेस शुरू कर रहा है तो कोई कमल की खेती कर रहा है। मेरा ध्यान मछली पालन की तरफ था क्योंकि, मेरे घर पर पहले से ही एक अलग प्रजाति की मछली गपी’ का पालन हो रहा था, मैंने इसी मछली का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।”

क्या है गपी मछली

गपी, जिसे मिलियन फिश, रेनबो फिश और पिसीलिया रेटिक्युलैटा (लैटिन) के रूप में भी जाना जाता है, एक्वैरियम मछली की प्रजातियों में से एक है।

अयप्पा ने अपना फेसबुक पेज तैयार किया, जिसमें उन्होंने गपी मछलियों की तस्वीरें पोस्ट की, जिसके कारण उनके दोस्तों और रिश्तेदारों को इसके बारे में पता चला और वे इन मछलियों के आर्डर देने लगे। उन्होंने इसके बाद दो नए फिश टैंक खरीदे, जिसमें नर मछली तथा मादा मछली दोनों थे, जो सिर्फ दो महीने के ही थे।

अयप्पा बताते हैं, “जब यह मछली चार महीने की हो जाती है, तब वे प्रजनन कर सकते हैं। इसके बाद मैंने उन्हें एक ही कटोरे में डाल दिया ताकि वे प्रजनन कर सकें। तीन महीनों के भीतर, उन्होंने बच्चों को जन्म देना शुरू कर दिया।”

39 वर्षीय अयप्पा कहते हैं, “पहली बार में उन्होंने 10-25 बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दूसरी बार में लगभग 80 बच्चों को जन्म दिया। वे कम से कम पाँच बार बच्चों को जन्म दे सकते हैं, लेकिन दूसरी बार में पैदा हुए बच्चे, पहले बच्चों की तुलना में स्वस्थ नहीं होते हैं।”

अयप्पा अपने ग्राहकों को, दो महीने के बच्चे बेचते है, क्योंकि वे माँ की तुलना में अधिक स्वस्थ रहते हैं। उनका कहना है कि, प्रसव के बाद गपी मछलियां कुछ बच्चों को खा सकती है, इसलिए, टैंक में मछलियों के खाने की अच्छी-खासी व्यवस्था होने के साथ उसमें बच्चों के छिपने के लिए बहुत सारे स्थान भी होने चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो, तो प्रसव के तुरंत बाद माँ को, किसी दूसरे टैंक में रख देना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि, “यदि आप अपने टैंक में विभिन्न प्रकार की गपी मछलियां चाहते हैं, तो प्रत्येक नर के लिए दो से तीन मादा मछलियों को टैंक में रखें। गपी मछलियों की औसतन लम्बाई 2 इंच होती है, इसीलिए, 5 गैलन के टैंक में 3 मछलियों को ही रखा जाना चाहिए। लेकिन लंबे समय के के लिए, 10-20 गैलन के टैंक का उपयोग बेहतर होगा।”

अयप्पा के पास, ‘प्लैटिनम रेड’, ‘चिली रेड’, ‘एलबिनो रेड’, और ‘रेड ड्रैगन’ सहित 18 किस्मों के 1,500 से अधिक गपी मछलियां हैं। वह इन मछलियों के बिजनेस से, महीने में 25,000 रुपये कमाते हैं, और अब तक, 5,000 से अधिक मछलियां बेच चुके हैं। उनका परिवार इस काम में उनकी मदद करता है। इसके बारे में वह कहते हैं, ” इस प्रजाति के मछली की देखभाल करना आसान है। मेरे बच्चे भी उनकी देखभाल आसानी कर लेते हैं।”

उन्होंने बताया कि, “अगर कोई, फुल टाइम नौकरी भी कर रहे हैं, तो वे भी इन गपी मछलियों की देखभाल कर सकते हैं। मछली को केवल खिलाने की आवश्यकता होती है, और उनके टैंक को हर रोज साफ करना होता है।”

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अयप्पा गपी मछली पालन के लिए कुछ टिप्स दे रहे हैं:

पानी की जाँच करें: टैंक को हर हफ्ते साफ किया जाना चाहिए। पुराने पानी में ताजे पानी का अनुपात 60:40 होना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो मछली मर सकती है।

मछली की जाँच करें: यदि कोई मछली, लंबी अवधि के लिए आपको टैंक के तल पर तैरती हुई मिलती है, तो समझ लें कि पानी में खराबी है। ऐसे पानी को तुरंत बदल देना चाहिए।

ताजी हवा: इस प्रजाति की मछली को प्राकृतिक रूप से ताजी हवा मिलती है, तो उन्हें किसी फिल्टर की जरुरत नहीं होती है। यदि नहीं, तो मछलियों के लिए ‘स्पंज फिल्टर’ की व्यवस्था करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि अन्य फ़िल्टर छोटी मछलियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

भोजन: अयप्पा अपनी मछलीयों को दिन में दो बार खिलाते हैं। सुबह में, वह उन्हें फ्लेक्स खिलाते हैं, ताकि मछली उन्हें आसानी से खा सके। शाम को वह उन्हें फ्रेश मोइना खिलाते हैं। वह अपने घर में ‘मोइना कल्चर’ प्रजनन भी करते हैं। इस प्रजाति की मछली की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये एक सप्ताह तक खाने के बिना जीवित रह सकती हैं।

मछली को संक्रमण से बचाएं: यदि आप टैंक में किसी मरी हुई मछली देखते हैं, तो संक्रमण से बचने के लिए, इसे तुरंत टैंक से बाहर निकालें। आप मरी हुई मछलियों का आसानी से पता लगा सकते हैं, क्योंकि वे पानी के ऊपरी तल पर ही पड़ी रहती हैं।

मूल लेख – संजना संतोष
संपादन- जी एन झा

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