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मिलिए भारत के आयरनमैन पूर्व समुद्री कमांडो प्रवीण तेवतिया से, 26/11 हमले के बाद खो दी थी सुनने की क्षमता!

पूर्व समुद्री कमांडों प्रवीण तेवतिया (33 वर्षीय) भारत के पहले दिव्यांग आयरनमैन बन गए हैं। हाल ही में उन्होंने  दक्षिण अफ्रीका में आयरनमैन ट्रायथलॉन चैम्पियनशिप 2018 की दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब जीता है।

साल 2008 में  मुंबई में हुए ताज हमले में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान प्रवीण को चार गोली लगी थी। उन्हें गोली उनके फेफड़ों और कान में लगी थी। जिसके चलते उनके सुनने की क्षमता चली गयी। इसके बाद उन्हें सर्विस में नॉन-एक्टिव ड्यूटी दी गयी।

पर तेवतिया इस से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने स्वयं को ड्यूटी के लिए पूरी तरह से फिट बनाने का फैसला किया। इसीलिए उन्होंने मैराथन में भाग लेना शुरू किया।

यूपी के बुलंदशहर से ताल्लुक रखने वाले वाले तेवतिया ने बताया, “मैं स्वयं को और नेवी को यह साबित करना चाहता था कि मैं न केवल अपने हौसलों से बल्कि शारीरिक रूप से भी ड्यूटी के लिए फिट हूँ। आज तक भारत में किसी भी नेवी सैनिक ने आयरनमैन का ख़िताब नहीं जीता है।”

आयरनमैन ट्रायथलॉन में 180.2 किलोमीटर तक साइकिल चलानी होती है। 110 किमी के लिए साइकिल चलाने के बाद, तेवतिया की साइकिल का डरेलर टूट गया और वे सड़क पर गिर गये। इस दुर्घटना में उनके घुटने व टखने में चोट आयी; लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

कुछ दुरी पर ही साइकिल की मरम्मत करने वाली टीम का टैंट था। जिन्होंने उनकी साइकिल को 35 मिनट में ठीक करके दिया।

तेवतिया ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया, “अगले 70 किमी तक साइकिल से चढ़ाई करना वाकई मुश्किल था, लेकिन मैंने हौंसला नहीं खोया और 7:37 घंटों में 180.2 किमी को पूरा किया।”

अब अगले साल फरवरी में अमेरिका के अल्ट्रामन ख़िताब को जीतना उनका लक्ष्य है। हम प्रवीण को उनकी जीत के लिए बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि और भी लोग उनसे प्रेरणा लेंगें।

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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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