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भारत के महान अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य से जुड़ी 10 अद्भुत बातें!

हाल ही में अभिनेता अजय देवगन ने अपनी आने वाली फिल्म के बारे में लोगों को बताया। उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया कि उनकी आने वाली फिल्म भारत के महान राजनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य पर आधारित होगी। अजय देवगन इसमें चाणक्य की मुख्य भूमिका में नजर आयेंगें।

हालाँकि अभी तारीखों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गयी है। लेकिन इस फिल्म को नीरज पांडेय निर्देशित करेंगें। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में पैदा हुए, चाणक्य न केवल एक महान योद्धा बल्कि शिक्षक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक सलाहकार भी थे।

कोई ही होगा जिसने भारत में चाणक्य का नाम नहीं सुना होगा। चाणक्य पर इससे पहले टेलीविज़न सीरीज भी बन चुके हैं। इसके अलावा जब भी सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य पर को धारावाहिक बना तो चाणक्य के किरदार को उसमें बहुत मजबूती से दिखाया गया।

आज हम बता रहे हैं उन्हीं चाणक्य से संबंधित कुछ बातें जिन्होंने भारत को सबसे ताकतवर मौर्य साम्राज्य दिया।

  1. भारतीय इतिहास में आचार्य चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। संस्कृत के एक नाटक ‘मुद्राराक्षस’ के हिसाब से चाणक्य ही विष्णुगुप्त हैं, जिन्होंने ‘पंचतंत्र’ की रचना की।
  2. जब मगध के नन्द वंश में चाणक्य का अपमान हुआ तो उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे नन्द के विनाश के बाद ही अपनी शिखा (चोटी) बांधेंगे। उन्होंने मगध के राजा धनानंद को परास्त कर चन्द्रगुप्त को राजा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  3. चाणक्य ने चन्द्रगुप्त की माँ ‘मूरा’ के नाम पर उसे ‘मौर्य’ उपनाम दिया और बाद में नन्द वंश को खत्म कर मगध में मौर्य वंश की स्थापना की गयी।

    फोटो: वर्डप्रेस
  4. एक बेहतरीन सलाहकार होने के साथ- साथ चाणक्य दूरदर्शी भी थे। उन्होंने सिकंदर के इरादों को बहुत पहले ही भांप लिया था। इसीलिए उन्होंने वर्षों पहले से ही चन्द्रगुप्त को भविष्य में होने वाले युद्ध के लिए प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया था।
  5. नन्द को परास्त करने के बाद जब चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को राजा बनाया तो वे भली-भांति जानते थे कि यदि राजा की कोई हत्या कर दे तो उस व्यक्ति का सिंहासन पर अधिकार हो जाता है। इसलिए उन्होंने चन्द्रगुप्त के जीवन को सुरक्षित रखने की प्रतिज्ञा ली।
  6. किसी हथियार से चन्द्रगुप्त की जान लेना असंभव था क्योंकि वह एक योद्धा था। पर  हो सकता था कि उसे कभी जहर दिया जाये। इसलिए चाणक्य चन्द्रगुप्त के खाने में थोड़ा-थोड़ा जहर मिलाने लगे। ताकि अन्य विष के प्रति चन्द्रगुप्त के शरीर में प्रतिरोधी क्षमता पैदा हो जाये। इस जहर की खुराक हर रोज थोड़ी मात्रा में बढ़ा दी जाती थी।

    फोटो: अमेज़न
  7. अनजाने में एक बार चन्द्रगुप्त ने अपने भोजन का एक निवाला रानी दुर्धरा को खिलाया। जो उस समय गर्भवती थीं। उनका प्रसव होने में केवल सात दिन बचे थे। निवाला खाते ही रानी ज़हर के चलते बेहोश हो गयी। बताया जाता है कि उत्तराधिकारी को बचाने के लिए, चाणक्य ने रानी के पेट को चीरकर बच्चे को बहार निकाल लिया। हालाँकि, जहर की एक बून्द बच्चे के माथे को छू गयी थी जिससे एक बिंदु पड़ गया और इसीलिए बच्चे को बिन्दुसार नाम दिया गया।
  8. चाणक्य अपनी बुद्धिमानी के साथ-साथ क्रूरता के लिए भी जाने जाते थे। कहा जाता है कि जब धनानंद को मार दिया गया तो चाणक्य स्वयं वहां उसे देखने गए। अपनी शिखा बांधने से पहले उन्होंने आदेश दिया कि धनानंद का अंतिम संस्कार न किया जाये और शरीर को ऐसे ही कीड़े-मकोड़ों के खाने के लिए छोड़ दिया गया।

    फोटो: द खोज
  9. एक बार एक ग्रीक एथनोग्राफर चाणक्य से मिलने आये। जब वे पहुंचे तो चाणक्य राज्य-संबंधित काम कर रहे थे। इसलिए वे पास में ही बैठकर उनके कार्य खत्म होने की प्रतीक्षा करने लगे। जैसे ही काम खत्म हुआ तो चाणक्य ने पास में जल रहे एक दिए को बुझा दिया और फिर एक दूसरा दिया जलाया। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह दिया राज्य का था इसलिए उसे राज्य के काम के वक़्त ही इस्तेमाल करना चाहिए। अपने निजी कार्यों के लिए मुझे अपनी वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
  10. चाणक्य की मृत्यु के बारे में कोई भी प्रमाणिक लेख नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने जैन धर्म के लोगों की तरह स्वयं को भूख से तड़पा कर अपने प्राण दिए। बाकी कुछ लोग कहते हैं कि जब बिन्दुसार को अपने जन्म का सत्य पता चला तो वे चाणक्य से नफरत करने लगे। क्योंकि उन्हें बताया गया कि चाणक्य ने उनकी माँ की जान ली है। इससे दुखी होकर चाणक्य ने महल त्याग दिया और वन में चले गए।

अजय देवगन की फिल्म के लिए तो अभी दर्शकों को इंतज़ार करना होगा। अब देखना यह है कि स्पेशल 26 और रुस्तम जैसी फिल्मों के लिए जाने जाने वाले नीरज पांडेय कैसे इस महान राजनीतिज्ञ व अर्थशास्त्री की कहानी को दर्शकों तक पहुंचते हैं।


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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