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मिलिए मशहूर कार्टून शो ‘छोटा भीम’ की लेखिका से, जिन्हें मिला है एमी अवार्ड

मिलिए मशहूर कार्टून शो ‘छोटा भीम’ की लेखिका से, जिन्हें मिला है एमी अवार्ड

एमी अवॉर्ड जीतने वाली सोनम शेखावत ने शक्तिमान एनिमेटेड, छोटा भीम, माइटी राजू, ऑल हेल किंग जुलियन जैसे कार्टून शो लिखे हैं!

कार्टून शो की जब भी बात होती है तो लोग यही कहते हैं कि यह बच्चों की चीज़ है लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी उम्र के लोग इन्हें देख सकते हैं। अब देखिए न कि मास्टर्स कर रहा मेरा भाई अभी भी यूट्यूब पर छोटा भीम (Chota Bheem) जैसे कार्टून शो देखता है। बचपन में जब भी हम कोई कार्टून देखते थे, तो सोचते थे कि आखिर इन्हें बनाता कौन है? ऐसी सुंदर-सुंदर रोचक कहानियां लिखता कौन है? तो चलिए आज हम आपको एक ऐसी ही लेखिका से मिलवाते हैं, जो लंबे अरसे से कार्टून शो के लिए कहानियां लिख रहीं हैं और जिन्हें एमी (Emmy) अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है।

यह कहानी है राजस्थान के करौली में जन्मीं और जयपुर में पली-बढ़ी सोनम शेखावत की। सोनम कोई पाँच साल की थीं, जब पहली बार अपने पिता के साथ थिएटर में जुरासिक पार्क फिल्म देखने गयीं थीं। इस फिल्म का असर उन पर इतना अधिक हुआ कि वह सोचने लगी कि वह भी किरदार गढ़ सकती हैं।

उन्हें लिखने का शौक था। 11 साल की छोटी उम्र से ही वह कविता लिखने लगीं थीं। जब वह 15 साल की हुई तो कहानियां लिखने लगीं। 

बचपन के दिनों को याद करते हुए सोनम ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने 500 पन्नों का एक उपन्यास भी लिखा, पर वह छपा नहीं। दरअसल मैं चार भाइयों की कहानी लिख रही थी। यह रामायण की तरह थी लेकिन आधुनिक पृष्ठभूमि में। जब मैंने इसे लिखते हुए अपने स्कूल की सभी कॉपियां भर दीं, तो मुझे अहसास हुआ कि मैंने यह कितना बड़ा लिख दिया है। मुझे मम्मी से कहना पड़ा कि अब मुझे और कॉपी चाहिए। घर पर सभी हैरान थे कि साल की शुरुआत में ही कैसे मेरी सभी कॉपियां भर गईं।” 

किए हैं बहुत से अच्छे प्रोजेक्ट्स

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सोनम ने बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एनीमेशन और मल्टीमीडिया में डिग्री कर ली। कॉलेज के बाद उन्हें रिलायंस एनीमेशन के साथ बतौर 3डी आर्टिस्ट इंटर्न काम करने का मौका मिला। उन्होंने वहाँ तीन महीने काम किया और इस दौरान उनके एक सीनियर साथी कर्मचारी ने उन्हें मेन्सा के बारे में बताया और उनसे IQ टेस्ट में बैठने के लिए कहा। जब नतीजा आया, तो सोनम खुद हैरान थीं। उनका IQ दुनिया की मात्र 2% जनसंख्या से मेल खाता है। इससे उनकी तेज मेमोरी और क्रिएटिविटी का पता चला। 

इंटर्नशिप के दौरान ही उन्हें शक्तिमान एनिमेटेड नामक एक सीरीज के लिए लिखने का अवसर मिला, जो सोनिक और निकेलोडियन पर प्रसारित होता था। उन्होंने इस सीरीज का टाइटल थीम और इसके साउंडट्रैक के कई ट्रैक लिखे।

2012 में, सोनम ग्रीन गोल्ड एनिमेशन से जुड़ीं, जो उस समय Disney के साथ काम करने वाली एकमात्र कंपनी थी। उन्होंने लोकप्रिय कार्टून माइटी राजू के लिए एक शो लिखा। उन्होंने छोटा भीम के लिए 50-60 एपिसोड लिखें, और इसकी फ्रैंचाइज़ी की चार-पाँच फिल्मों की स्क्रिप्ट और 20-30 गाने भी लिखें।

सोनम ने लिटिल सिंघम, गोलमाल जूनियर और भूत बंधु जैसे शो भी बनाए हैं। अब तक, भारत में निर्मित 17 शो उनके द्वारा लिखे गए हैं। यूरोप और अमेरिका में प्रसारित होने वाले कई शो का उन्होंने निर्माण किया है। 

Chota Bheem Cartoon Writer

वह अपने शो के माध्यम से बच्चों के साथ कैसे जुड़ती हैं, यह पूछने पर सोनम कहतीं हैं, “मैं शरीर से एडल्ट हूँ और मन से बच्ची, इसलिए मैं खुद को बच्चों के साथ बहुत आसानी से जोड़ती हूँ। मुझे हमेशा लगा जैसे कि मैं एनीमेशन इंडस्ट्री के लिए ही बनी हूँ।” 

2015 में, अपने लेखन में थोड़े बदलाव के लिए, सोनम ड्रीमवर्क्स एनीमेशन – ऑस्समनेस टीवी से जुड़ गयीं। यहाँ, उन्होंने ‘ऑल हेल किंग जुलियन’ नामक एक शो के लिए लिखा, जो वर्तमान में नेटफ्लिक्स पर है। इस शो के सभी तीन सीजन को एमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। सोनम ने अपनी एनिमेटेड सीरीज के तीसरे सीजन के लिए उत्कृष्ट लेखन के लिए एमी पुरस्कार जीता। इसके साथ, वह लेखन के लिए एमी अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।

वर्तमान में, वह न्यूक्लियस मीडिया, लंदन के चिल्ड्रन एंड फैमिली डिवीजन की प्रमुख हैं। वह अपने छह वर्षीय बेटे को अपनी जीत में अहम भूमिका निभाने का श्रेय देती हैं। वह कहतीं हैं कि उससे ही उन्हें बच्चों की बेहतर समझ हासिल करने में मदद मिली है। 

“मेरा बेटा बहुत सारे कार्टून शो देखता है, और वह खुद अच्छा स्टोरीटेलर है और काफी क्रिएटिव भी है। वह मुझे हमेशा काम करने के लिए प्रेरित करता है – वह अपने दोस्तों को बताता है कि उसकी माँ कार्टून बनाती है और वह भी बड़ा होकर यही करेगा,” सोनम ने कहा।

वह कहती हैं, ”मुझे हमेशा से पता था कि मुझे बच्चे पसंद हैं, लेकिन जब मेरा बेटा पैदा हुआ, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं उन्हें कितना प्यार करती हूँ। यह मेरे जीवन का सबसे अद्भुत पहलू है। उसके माध्यम से, मुझे पता चला कि जब बच्चे टीवी पर कुछ देखते हैं तो कितना निरीक्षण करते हैं। वह सिर्फ किरदार नहीं बल्कि बैकग्राउंड में इस्तेमाल हुई हर एक चीज़ को देखते हैं। एक और पहलू मुझे बच्चों के बारे में बहुत पसंद है कि कैसे उनके समाधान हमेशा अलग और रचनात्मक होते हैं। इससे मेरे लेखन में एक बदलाव आया, और मैंने ऐसे पात्र गढ़ना शुरू किया जो अपनी क्रिएटिविटी से समस्याओं का समाधान ढूंढें।”

एनीमेशन की एनसाइक्लोपीडिया

सोनम कहती हैं, “मैं केवल 20 साल की थी, जब मैंने अपना करियर शुरू किया था, लेकिन मैं 16 साल की लगती थी – इसलिए नहीं कि मैं छोटी थी, बल्कि इसलिए कि मैं हमेशा स्वभाव से बचकानी थी। मैं बहुत उत्सुक रहती थी और उछल-कूद करती रहती थी। लोग मुझे सीरियसली नहीं लेते थे, लेकिन मैंने फिर बहुत सारे बदलाव किए। फिर एक वक़्त के बाद, लोगों ने मेरे काम और रचनात्मकता को देखना शुरू कर दिया।”

उनकी फोटोग्राफिक मेमोरी के कारण उन्हें ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ एनिमेशन’ उपनाम मिला। प्रोडक्शन के दौरान वह फ्रेम टू फ्रेम एपिसोड को याद रखतीं थीं, और यह भी झट से याद कर लेतीं थीं कि पुराने एपिसोड के फ्रेम या शॉट को हम फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं।

वह कहती हैं कि उन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं, तो एमी हमेशा उनके लिए खास रहेगा, क्योंकि इसे जीतने वाली वह पहली भारतीय लेखिका हैं।

“पुरस्कार विजेता लेखक होना निश्चित रूप से गर्व की बात है। इसके बाद लोगों ने अचानक मुझे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर पहचानना शुरू कर दिया। इसने मेरे करियर की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया। मुझे अब यह चिंता करने की ज़रूरत नहीं कि कोई स्टूडियो मुझे लेगा या नहीं बल्कि अब मैं तय करती हूँ कि किस स्टूडियो के साथ काम करना है,” उन्होंने आगे बताया। 

वह कहती हैं, “जब पत्रिकाओं में मेरी खबरें छपीं, तो कई महिलाओं ने सम्पर्क किया और कहा कि वह मुझसे अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित हुईं हैं। मेरे हिसाब से महिलाओं का करियर और परिवार, दोनों साथ में हो सकते हैं। मैं एक लेखक हूँ, लेकिन मैं एक माँ भी हूँ। यदि हम सभी महिलाओं के लिए अवसर बनाएं तो यकीनन वह आगे बढ़ेंगी।”

सोनम कहती हैं कि शादी के बाद, उन्होंने अपने साथ काम करने वाले लोगों को बताया कि अब उन पर परिवार की ज़िम्मेदारियाँ भी हैं। “मुझे कभी भी अपने परिवार और काम के बीच चयन करने के लिए नहीं कहा गया। मैं इसके बारे में बहुत स्पष्ट थी। बहुत से लोग हैं जिन्हें लगता है कि अगर वह पारिवारिक ज़िम्मेदारियों की बात करेंगे तो लगेगा कि कमजोर हैं। लेकिन यह वास्तव में उनकी गलती नहीं है, क्योंकि पुरुषों ने महिलाओं के लिए दुनिया बहुत मुश्किल बना दी है, और इसे बदलने की जरूरत है,” वह आगे कहती हैं।

उनके करियर की शुरुआत आसान नहीं थी। पहली चुनौती थी लोगों को यह समझना कि वह यह कर सकती हैं मतलब कि वह लिख सकती हैं। वह कहतीं हैं, “प्रोड्यूसर से लेकर मार्केटिंग से जुड़े लोग और डायरेक्टर तक, हर कोई खुद को लेखक ही समझता है। ऐसे में सबको समझाना आसान काम नहीं था।” 

सोनम आगे बतातीं हैं, “मेरे पति जब खुद को इन्वेस्टमेंट बैंकर या फिर भाई खुद को आर्किटेक्ट बताते हैं तो कोई नहीं कहता कि वह शौकिया तौर पर काम करता है। लेखकों के लिए भी ऐसा ही है। निर्देशक, निर्माता और कलाकारों से भरे कमरे में बैठकर, हर किसी को यह बताना मुश्किल था कि वह शो लिखने वाले नहीं हैं – शो मैं लिखूंगी,” उन्होंने आगे कहा। 

सोनम के सामने एक और चुनौती थी दिलचस्प और आकर्षित करने वाली कहानियां सुनाना। इसके बारे में वह बतातीं हैं, “अपनी कहानी को टीवी पर अच्छी तरह दिखाने में सक्षम होने के लिए बहुत अनुभव चाहिए होता है। आपको अपनी कहानी कहने के कौशल पर भरोसा करना होगा। आपको 50 लोगों के सामने खड़े होने और ऐसी कहानी सुनाने में सक्षम होना चाहिए जो उन्हें हँसा और रुला सके, और हर उस भावना का अनुभव करें जिसे आप चित्रित करने की कोशिश कर रहे हैं,” वह कहती हैं।

सोनम ने कहा कि उन्होंने रचनात्मक उद्योग में काम करने से बहुत कुछ हासिल हुआ है। वह कहतीं हैं, “उद्योग के लोगों ने मुझे कहानी कहने के सिद्धांत सिखाए। चरित्र की उलझनों को समझना और उनका प्रबंधन करना, यह सबकुछ मैंने काम करते हुए सीखा है।”

कुछ यादगार पल

सोनम को बहुत से प्रशंसा के ईमेल आते हैं। लेकिन एक ईमेल जो उनके लिए बहुत ही खास है, जिसे एक न्यूज़ चैनल चलाने वाले सुशांत एस मोहन ने लिखा था। वह ईमेल कुछ इस तरह से है, “हाय सोनम, मैंने छोटा भीम का बायस्कोप एपिसोड देखा। शायद आप ही इसकी लेखिका हैं। मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि इस एपिसोड ने मुझे मेरे बचपन के दिन याद दिला दिए। मैं अपने गाँव में राजा-रानियों की कहानियां देखने के लिए 10 पैसे लेकर बायस्कोप देखने जाता था।” 

इस ईमेल के बारे में सोनम कहतीं हैं, “यह संदेश एक वयस्क का था। जिन्होंने कुछ समय के लिए अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर एक कार्टून शो का एक एपिसोड देखा। उन्होंने इसे देखने के लिए समय निकाला और मुझे एक संदेश भेजा। यह सबसे ख़ास मैसेज है जो मुझे मिला।” 

आगे की योजना

वर्तमान में, सोनम कई परियोजनाओं पर काम कर रहीं हैं। वह कुछ शो भारतीय पौराणिक कथाओं को लेकर भी कर रहीं हैं। इसके बारे में वह कहतीं हैं, “भारतीय एनीमेशन उद्योग स्थानीय दर्शकों के लिए शो बनाता है और जब हमने अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर कुछ लोकप्रियता हासिल की है, तो मैं कुछ बनाना चाहतीं हूँ जिसे पीढ़ियाँ याद रख सके।” 

मूल लेख: कृष्णा प्रसाद

संपादन – जी. एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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