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केरल: चलाते हैं इलेक्ट्रिक कार, फिर भी 96% कम हुआ बिजली बिल, जानिए कैसे

केरल के रहने वाले डॉ. जोजो जॉन ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पहले इलेक्ट्रिक कार ली और फिर सोलर सिस्टम लगवाया और आज वह न के बराबर बिजली और पेट्रोल पर खर्च कर रहे हैं!

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यह कहानी केरल के एक ऐसे डॉक्टर (Kerala Doctor) की है, जिन्होंने अपने स्तर से पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लिया है। वैसे यह सच है कि यदि आप ढूँढना चाहें तो आपको आज ऐसी बहुत सी वजहें मिल जाएंगी, जो किसी व्यक्ति को जीवन सस्टेनेबल तरीके से जीने के लिए प्रेरित करते हैं। केरल के कोच्चि के निवासी डॉक्टर जोजो जॉन ऐसे ही लोगों में एक हैं।

जोजो जॉन ने खबरों में कहीं पढ़ा था कि यूनाइटेड किंगडम 2030 तक ईंधन वाहनों पर प्रतिबंध लगाने वाला है। वह इस खबर को पढ़कर काफी प्रेरित हुए कि कैसे एक पूरा देश परिवहन के वैकल्पिक साधनों पर स्विच करेगा, और उन्होंने एक इलेक्ट्रिक कार खरीदने का फैसला किया और यहाँ तक ​​कि अपने घर को भी सोलर एनर्जी से जोड़ा।

जोजो ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरा बिजली का बिल बढ़ गया था और गर्मी के मौसम में हर महीने 4,000 रुपये तक पहुँच जाता था। इसलिए, मैंने दैनिक उपयोग के उपकरणों को चलाने के लिए जनवरी 2020 में सौर पैनल लगाए। मैं एक इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर भी विचार कर रहा था क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि सोलर पैनल से इलेक्ट्रिक वाहन भी चार्ज किया जा सकता है। आगे सोचा कि सौर ऊर्जा से चलने वाली मेरी इलेक्ट्रिक कार प्रदूषण को कम कर सकती है और इससे ईंधन की लागत भी नहीं होगी।” 

जोजो, एक सरकारी अस्पताल में एनेस्थिस्ट हैं, उन्होंने कहा कि उन्होंने 3.25 लाख रुपये में 5 किलोवाट का सौर ऊर्जा संचालित सिस्टम स्थापित किया और इसे केरल इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ग्रिड के साथ सिंक्रनाइज़ किया। डॉक्टर जोजो ने जून 2020 में एक Tata Nexon EV खरीदी, और दावा किया कि न केवल उनकी कार बल्कि उनके घर के सभी उपकरण भी सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं।

ग्रिड पर कम हुई निर्भरता:

“मैंने कैलकुलेट किया कि कार चलाने के लिए ईंधन की लागत लगभग 8 रुपये प्रति किलोमीटर है। इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने के लिए ग्रिड से बिजली का उपयोग करने पर 50 पैसे और 1 रुपए के बीच खर्च होता है। लेकिन अगर मैं वाहन को चार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करता हूँ, तो लागत शून्य हो जाती है। कार की बैटरी की लाइफ आठ साल है, जिसमें रखरखाव की कोई लागत नहीं है। यह बहुत ही किफायती है,” जोजो कहते हैं।

Kerala Doctor
Jojo’s solar power system above his EV parked in the garage.

वह कहते हैं, सौर पैनल से एक दिन में लगभग 30 यूनिट बिजली पैदा होती है और उनकी कार को पूरे चार्ज के लिए 25 यूनिट बिजली की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “मुझे शहर में अपने आवागमन के लिए रोजाना कार को चार्ज करने की आवश्यकता नहीं है। एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, सीसीटीवी, माइक्रोवेव और टेलीविजन सभी सौर ऊर्जा पर चलते हैं। हालांकि, मानसून या बादल के दिनों में, मैं ग्रिड से बिजली का उपयोग करता हूँ।”

जोजो के घर पर सोलर पैनल लगाने वाली कंपनी सोलर कार्ट के संस्थापक अकील एलेक्स बताते हैं, ”सोलर पैनल एक दिन में 4,000 वाट का उत्पादन करते हैं और जोजो की जरूरतें लगभग 2,000 वाट हैं। अतिरिक्त बिजली, यदि उपयोग में नहीं है, तो ग्रिड में वापस आ जाती है। जब मानसून के दिनों में सौर पैनल कम बिजली उत्पन्न करते हैं, उदाहरण के लिए, 500 वाट, उनका घर बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रिड से बिजली का उपयोग कर सकता है।”

डॉक्टर जोजो कहते हैं कि पिछले एक साल में उन्होंने ग्रिड से लेने वाली बिजली के लिए 70 रुपये से 140 रुपये (गर्मियों के महीनों के दौरान) का भुगतान किया है।

जोजो बताते हैं कि सौर पैनलों का उपयोग करने से उन्हें कोयले से उत्पन्न बिजली के उपयोग के अपराधबोध से राहत मिली है। “मैंने निर्णय लेने से पहले सभी चीज़ों को समझने के लिए तीन महीने तक रिसर्च किया। कोच्चि में किसी ने भी पहले ऐसा नहीं किया था, और कोई संदर्भ नहीं होने के साथ चीजों को सही करना मुश्किल हो गया। लेकिन अब मैं परिणामों से संतुष्ट हूँ,” उन्होंने कहा। 

जोजो का कहना है कि बेहतर होगा कि देश भर में अधिक चार्जिंग स्टेशन हों ताकि इको-फ्रेंडली वाहनों में लंबी यात्राओं के लिए भी एक विकल्प हों।

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जोजो बने एक प्रेरणा:

अकील का कहना है कि जोजो द्वारा उनके घर और कार को सौर ऊर्जा से संचालित करने की पहल के बाद उन्हें 200 से अधिक कॉल आई हैं और उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इंडियन नेटवर्क ऑन एथिक्स एंड क्लाइमेट चेंज (INECC) की कार्यकारी सदस्य प्रियदर्शनी कर्वे का कहना है कि अक्षय ऊर्जा से इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना स्वच्छ ऊर्जा को उपयोग करने का सही तरीका है।

“इलेक्ट्रिक वाहन अक्सर उस बिजली से चार्ज होते हैं जो कोयले से बनती है इसलिए यह स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग करने के उद्देश्य को ना के बराबर पूरा करता है। ट्रैफ़िक सिग्नल पर या आवागमन के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा कार्बन उत्सर्जन शून्य हो सकता है। लेकिन फिर भी यह कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है, क्योंकि अक्सर बैटरी को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली कोयले से बनती है,” प्रियदर्शनी कहती हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को जोजो से एक प्रेरणा लेनी चाहिए। वह कहती हैं, ”केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए ऊर्जा के नवीकरणीय रूप का उपयोग करने से ग्रीनहाउस गैसों को कम करने और सच्चे अर्थों में जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद मिलेगी।” 

यक़ीनन, जोजो की यह पहल हम सबके लिए एक प्रेरणा है!

मूल लेख: हिमांशु निंतावरे

संपादन – जी. एन झा

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