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हिमाचल: बिना मिट्टी और 90% कम पानी में उगाते हैं पोषण से भरपूर सब्ज़ियाँ

हिमाचल: बिना मिट्टी और 90% कम पानी में उगाते हैं पोषण से भरपूर सब्ज़ियाँ

हिमाचल प्रदेश के रहने वाले किसान युसूफ खान, साल 2017 से बिना मिट्टी की खेती कर रहे हैं।

हाई-टेक खेती के बारे में जिस तरह से भारत में जागरूकता बढ़ रही है, ज़्यादा से ज़्यादा लोग भी इसकी तरफ बढ़ रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही किसान से मिलवा रहे हैं जो हाइड्रोपोनिक्स विधि से बिना मिट्टी के खेती कर रहे हैं। 

यह कहानी हिमाचल प्रदेश के ऊना में रहने वाले युसूफ खान की है जो सिर्फ पोषण युक्त पानी में फसलें उगा रहे हैं। इस विषय में लगभग 4 साल तक शोध करने के बाद, 51 वर्षीय युसूफ खान अपने खेतों में फल और सब्ज़ियाँ उगा रहे हैं जिनमें स्ट्रॉबेरी, टमाटर, लेटस, खीरा, शिमला मिर्च आदि शामिल हैं। 

युसूफ ने द बेटर इंडिया को बताया, “प्लांट पैथोलॉजी और माइकोलॉजी में पोस्ट- ग्रैजुएशन के दौरान मुझे पता चला कि सिर्फ पोषण से भरपूर पानी में पौधे उगाए जा सकते हैं और ये ज़्यादा फायदेमंद होते हैं।”

युसूफ ने इस पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “शुरुआत में मुझे इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। लेकिन 2013 में मैंने इस विषय पर शोध शुरू किया और फिर 2017 में कल्टीवेशन शुरू किया। हमने सबसे पहले इस तरीके से खीरा और लेटस उगाया। हाइड्रोपोनिक्स लगाते समय पीवीसी पाइप को पिरामिड तरीके से लगाकर इनमें फसल लगाई। इन सभी पेड़-पौधों को पानी और न्यूट्रिएंट्स का घोल दिया गया।” 

Hydroponics

उनके पास फिलहाल छह ग्रीनहाउस हैं जो पौधों उगने के लिए एकदम उचित स्थिति प्रदान करते हैं और उन्हें कीटों और प्रतिकूल मौसम से बचाते हैं। उन्होंने अपने खेत में पानी और पोषक तत्व युक्त एक टैंक भी स्थापित किया है। यहाँ से, पानी दूसरे टैंक में जाता है, एक पंप के माध्यम से पौधे तक पहुँचता है। यह प्रक्रिया बार-बार होती है।

सिर्फ पानी से अच्छा फायदा

अन्य खेती के तरीकों की तुलना में हाइड्रोपोनिक्स को 90% कम पानी की आवश्यकता होती है। युसूफ का कहना है कि उनके पौधों में मिट्टी से आने वाली कोई बीमारी या खरपतवार की समस्या नहीं है। 

“कई लोग कहते हैं कि उनके पास सब्जियों की खेती करने के लिए घर में जगह नहीं है। हाइड्रोपोनिक्स के साथ, आप कम जगह में सब्ज़ियाँ उगा सकते हैं। हाइड्रोपोनिक्स को छत पर लगाया  जा सकता है, साथ ही घर के अंदर भी। पैसे की जरूरत सिर्फ पहले चरण के दौरान पड़ती है – टैंक और पंप स्थापित करते समय।” वह कहते हैं।

युसूफ ने अपने घर पर पंप और टैंक स्थापित करने के लिए 4 लाख रुपये का निवेश किया है। वह कहते हैं, “इसके अलावा, मैंने खेती में एक पैसा भी निवेश नहीं किया है। क्योंकि मुझे पता था कि प्रक्रिया कैसे होती है, और यह मेरे लिए बहुत आसान था।”

Himachal Pradesh

वह कहते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग करके उगाए गए फलों और सब्जियों का लाभ अन्य तरीकों की तुलना में अधिक है। इस तरीके से उगाये गए फल-सब्ज़ियाँ स्वाद में समृद्ध होते हैं।

पिछले तीन वर्षों से, वह अपने खेत के उत्पादों को दोस्तों और रिश्तेदारों को मुफ्त में बाँट रहे हैं। इसके अलावा वह अपनी उपज के बारे स्कूली बच्चों को बताते भी हैं।

युसूफ कहते हैं कि अब वह अपनी उपज को बाजार तक पहुँचाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब मैं अपनी उपज को कृषि मंडी तक पहुँचाने की कोशिश करूंगा। स्थानीय ऊना कृषि बाजार से संपर्क करने की योजना है। मुझे उम्मीद है कि हाइड्रोपोनिक्स तरीके से उगाई गई सब्जियों को लोग पसंद करेंगे।”

खेती के अलावा, वह उन नुट्रिएंट सोल्यूशन को भी बेचते हैं जो उन्होंने वर्षों के अनुसंधान के बाद विकसित किए हैं।

ट्रेनिंग है ज़रूरी

Himachal Pradesh Farmer

युसूफ का कहना है कि हाइड्रोपोनिक्स या खेती के किसी अन्य तरीके में रुचि रखने वालों को पहले प्रशिक्षण लेना चाहिए। सही पद्धति का उपयोग किए बिना, इस प्रक्रिया से आपको बहुत अधिक आय नहीं मिल पाएगी। “अगर कोई बिना प्रशिक्षण के हाइड्रोपोनिक्स करता है, तो उन्हें कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है। मैं हमेशा लोगों को सलाह देता हूँ कि वह शुरू करने से पहले किसी संस्थान से प्रशिक्षण लें।”

पालमपुर, जालंधर और भारत के कई अन्य हिस्सों से छात्र हाइड्रोपोनिक्स पर ट्रेनिंग लेने के लिए उनके खेत पर आते हैं। वह बताते हैं, “यहाँ तक ​​कि किसान और विभिन्न आयु वर्ग के लोग मेरी मदद लेते हैं, और मुझे उनकी मदद करने में खुशी होती है।”

हाइड्रोपोनिक्स फार्म और ट्रेनिंग सेशन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप युसूफ से 9418178839 पर संपर्क कर सकते हैं।

मूल लेख: संजना संतोष

संपादन – जी. एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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