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पूरी दुनिया में कर्नाटक की इन महिलाओं द्वारा बनाये गए तिरंगों को किया जाता है सलाम!

फोटो: एनडीटीवी

र्नाटक का तुलसीगरी में भारत की एकमात्र तिरंगा बनाने वाली कंपनी हैं। कर्नाटक कॉटन विलेज एंटरप्राइज में अधिकांश स्थानीय औरतें काम करती हैं।

इन औरतों ने भले ही अपने गांव से बाहर की दुनिया नहीं देखी, लेकिन इनके द्वारा बनाये गए तिरंगे का पूरी दुनिया में सम्मान होता है। राजधानी से 2,000 किलोमीटर (1,200 मील) दूर इस कंपनी में लगभग 400 कर्मचारी काम करते हैं। जिनमें से औरतों की संख्या पुरुषों की तुलना में बहुत ज्यादा है।

कम्पनी की सुपरवाइज़र अन्नपूर्णा कोटी ने कहा, “औरतों के मुकाबले आदमियों में कम धैर्य होता है। बहुत बार जल्दी में वे माप गलत ले लेते हैं।”

“ऐसा होने पर फिर से सिलाई उधेड़ कर दोबारा सारी प्रक्रिया करनी पड़ती है। 4 दिन के बाद वे काम छोड़कर चले जाते हैं और वापिस नहीं आते।”

यहां औरतें ही सबकुछ करती हैं। कपास की कताई से लकेर सिलाई तक। पिछले साल, उन्होंने लगभग 60,000 तिरंगा बनाये थे।

दुनिया भर में भारतीय दूतावासों के साथ-साथ स्कूलों, गांवों के हॉलों और आधिकारिक कारों पर, आधिकारिक कार्यक्रमों और सरकारी भवनों पर उनके द्वारा बनाये तिरंगें लगाए जाते हैं।

तिरंगें के रंगों से लेकर सिलाई के माप तक सबकुछ भारतीय ध्वज संहिता और भारतीय मानक ब्यूरो से दिशानिर्देश के अनुसार किया जाता है। 15 साल से प्रिंटिंग विभाग में काम कर रहीं निर्मला एस इलाकाल ने बताया कि यदि जरा सी भी गलती हो तो भी पीस वापिस आ जाता है।

ये सभी महिला कर्मचारी काम के साथ-साथ अपना घर भी देखती हैं। शायद ही ये कभी अपने ज़िले से बाहर गयी हों। इस पर सुपरवाइज़र कोटी ने कहा, “हम अलग-अलग जगह नहीं जा पाते। लेकिन जो तिरंगा हम बनाते हैं वह पूरी दुनिया में जाते हैं और गर्व महसूस होता है जब लोग उन्हें सलाम करते हैं।”


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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