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समर्थ लोगों से खाना लेकर ज़रूरतमंदों को खिलाते हैं, हर दिन भरते हैं किसी न किसी का पेट

समर्थ लोगों से खाना लेकर ज़रूरतमंदों को खिलाते हैं, हर दिन भरते हैं किसी न किसी का पेट

केरल के 64 वर्षीय सुरेश कुमार पिछले 12 सालों में 4 लाख लोगों को खाना खिला चुके हैं!

कोविड-19 महामारी के दौरान जहाँ अनगिनत लोग तमाम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं वहीं ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो जरूरतमंदों की सेवा में दिन-रात जुटकर समाज में मिसाल पेश कर रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो पिछले 12 साल से जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। लोगों की मदद करने के लिए यह शख्स हर पल तत्पर रहते हैं। फिर चाहे कोई महामारी हो या न हो, उन्हें बस इस बात से मतलब है कि उनके रहते हुए कोई भूखा न सोए।

यह प्रेरक कहानी केरल के कन्नूर जिला के सीपी सुरेश कुमार की है। पिछले 12 साल से सुरेश लोगों को खाना खिला रहे हैं और जरूरतमंदों को कपड़े भी बांटते हैं। अब तक वह लगभग 4 लाख लोगों को खाना खिला चुके हैं।

सुरेश ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो कभी अमीर थे लेकिन किसी वजह से आज उनके पास एक पैसा भी नहीं है। कुछ तो इस हालत में भी नहीं हैं कि अपने लिए भोजन की व्यवस्था कर सकें। मैं अक्सर काम पर जाते हुए लोगों को भीख मांगते हुए देखता हूँ तो बहुत दुख होता है।”

हमेशा से ही लोगों की मदद करने में विश्वास रखने वाले सुरेश ने तय किया कि क्यों न वह इन लोगों को खाना खिलाएं। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने दूसरों से मदद लेने की सोची।

शुरू हुई एक सामुदायिक पहल

बेकरी और अन्य दुकानों पर छोटे-मोटे काम करते हुए सुरेश ने जो भी बचत की थी, उसमें से उन्होंने 50 प्रिंटआउट छपवाए। इन्हें उन्होंने अलग-अलग बस स्टैंड पर लगा दिया। वह बताते हैं, “मुझे कोई उम्मीद नहीं थी कि मदद मिल जाएगी। पर मैंने एक कोशिश करने की सोची। मैंने जो नोटिस लगाए वह किसी को मदद करने के लिए बाध्य नहीं करते बल्कि अगर कोई मदद करना चाहता है तो वह खाना लाकर कन्नूर तालुका ऑफिस पर ज़रुरतमंदों के लिए दे सकता है।”

 

Kerala Man Feeding Poor
Feeding The Poor

 

उनके नोटिस में लिखा था, “अगर किसी के घर ज्यादा खाना बन गया है तो वह इसे दोपहर में 1 से दो बजे के बाच कनूर तालुका ऑफिस लाकर बाँट सकते हैं। भोजन किसी भी मात्रा में हो या फिर शाकाहारी और मांसाहारी हो सकता है। बस यह भोजन जूठा, खराब या फिर दूषित नहीं होना चाहिए ताकि इसे खाने वाले कोई फ़ूड प्वाइजनिंग न हो।”

64 वर्षीय सुरेश कहते हैं कि पहले दिन से ही लोगों ने खाना लाना शुरू कर दिया। उन्हें आज भी याद है कि उन्हें उस दिन खाने के 25 पैकेट मिले और उन्होंने इन्हें 25 लोगों को दिया था। इन लोगों के चेहरे पर खाना खाने के बाद जो मुस्कान थी, वह संतोषजनक थी। इसी मुस्कान ने सुरेश को प्रेरित किया कि वह और लोगों तक खाना पहुँचाए और दिलचस्प बात यह थी कि दूसरे दिन से उन्हें और ज्यादा खाने के पैकेट मिलने लगे।

बहुत बार ऐसा भी हुआ, जब सुरेश ने एक ही दिन में 200 से अधिक लोगों को भोजन वितरित किया। सुरेश के अभियान शुरू करने से लेकर आज तक, 12 साल में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब उन्होंने खाना नहीं बांटा हो।

केरल बिजली बोर्ड में काम करने वाले शिनी सनद कहतीं हैं कि वह अपने बच्चों के जन्मदिन पर ज्यादा खाना बनाती हैं। इस खाने को वह सुरेश को दे देती हैं ताकि वह ज़रुरतमंदों में बाँट दें। वह कहतीं हैं, “पिछले 8 सालों में मैंने कम से कम 16 बार ज़रूरतमंदों के लिए खाना दिया है।”

सुरेश कहते हैं कि किसी दिन उन्हें दिन में सिर्फ दो बार का खाना मिलता है तो कई बार बहुत ज्यादा। इसलिए वह बैलेंस करके इसे लोगों में बाँट देते हैं ताकि वह लोग रात का खाना भी इसमें से खा सकें। कई बार खाने में बहुत अलग-अलग चीजें मिलती हैं तो कई बार एक जैसी। पर खाने वाले कभी शिकायत नहीं करते क्योंकि उनके लिए खाना मिलना बड़ी बात है और वह ख़ुशी से अपना खाना खाते हैं।

सिर्फ भोजन तक नहीं हैं सीमित

ज़्यादातर लोग खाना ही लेकर आते हैं। लेकिन बहुत बार होता है कि लोग ज़रुरतमंदों के लिए कपड़े देते हैं और कई लोग चावल आदि भी देकर जाते हैं।

ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो सुरेश की मदद करना चाहते हैं लेकिन कन्नूर तक ट्रेवल नहीं कर सकते हैं। उन्होंने सुरेश से कहा कि वह अपना बैंक अकाउंट नंबर उन्हें दे दें ताकि वह आर्थिक तौर पर इस अभियान में मदद कर पाएं।

सुरेश कहते हैं, “मुझे अपने जीवन में कभी बैंक खाते की आवश्यकता महसूस नहीं हुई, लेकिन जब मुझे ऐसे लोगों से कई फोन आए, जो दूर से मदद करना चाहते थे, तो इससे मेरी धारणा बदल गई। आज, कहीं से भी लोग मुझे पैसे भेज सकते हैं और उनकी ओर से मैं जरूरतमंदों को खाना खिलाता हूँ।”

सुरेश की यह पहल जितनी दिल को छूने वाली है, उतनी ही वह इसे सफल बनाने के लिए मेहनत करते हैं। अगर आप उनकी मदद करना चाहते हैं तो आप उनसे इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं – 9447234701 और उनके बैंक के खाते की जानकारी यहाँ है:

Suresh Kumar
Syndicate Bank
Account number: 42152610007085
IFSC Code: SYNB0004215

संपादन – जी. एन झा 

मूल लेख: संजना संतोष 

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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