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फसल क्रांति: 5 मिनट में इंस्टॉल होने वाली इस तकनीक ने बचाया 300 करोड़ लीटर पानी

फसल क्रांति, IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और सेंसर आधारित प्रणाली है जो किसानों को सिंचाई, प्रजनन, बीमारी और कीट प्रबंधन के संबंध में जानकारी देता है!

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हमारे देश में किसानों के लिए एक तरफ जहाँ बिचौलिए, साहूकार और मंडी की समस्या है वहीं मौसम की मार भी उन्हें हर साल सहनी पड़ती है। हम अक्सर किसानों को बिचौलियों के चंगुल से निकल खुद अपनी उपज को ग्राहकों तक पहुँचाने की बात करते हैं। लेकिन मौसम की मार और प्राकृतिक आपदाओं से उन्हें कैसे बचाया जाए? कितनी ही बार भारी बारिश के चलते किसानों की खड़ी फसल डूब जाती है तो कई बार बारिश को तरसती ज़मीन में कुछ पनपता ही नहीं है।

इसलिए किसानों की बाजार संबंधित परेशानियों को हल करने के साथ-साथ हमें ऐसी तकनीकों पर भी काम करना चाहिए जो किसान को मौसम के हिसाब से काम करने में मदद करें। ऐसी तकनीकें जो मिट्टी की जाँच कर उन्हें यह बताए कि कब, कौन सी फसल लगाएं, फसल में क्या बीमारी हुई है और कैसे पेस्ट मैनेजमेंट करें- इन सब परेशानियों में मदद करें। ज़्यादातर लोगों को लगता है कि यह संभव नहीं है क्योंकि अभी भी लोग खेती को तकनीक से जोड़कर नहीं देखते हैं।

लेकिन यह संभव है क्योंकि आजकल बहुत से ऐसे उद्यम हैं जो खासतौर पर किसानों के लिए तकनीक बना रहे हैं। आज ऐसे ही दो इंजीनियर्स के बारे में हम आपको बता रहे हैं, जिन्होंने किसानों की मदद के लिए अपनी नौकरी छोड़कर स्टार्टअप शुरू किया। उनका उद्देश्य किसानों के लिए नए-नये इनोवेशन करके तकनीक बनाना है।

हम बात कर रहे हैं वाराणसी से प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में स्नातक शैलेन्द्र तिवारी और आजमगढ़ के एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर आनंद वर्मा की। ये दोनों ही किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने खेती संबंधित परेशानियों को बहुत करीब से देखा है।

 

Engineers
Shailendra Tiwari (Left) and Ananda Verma

कॉरपोरेट सेक्टर में कुछ साल काम करने के बाद, दोनों दोस्तों ने 2017 के आखिरी में अपना स्टार्टअप, ‘फसल’ शुरू किया। यह बेंगलुरु स्थित एक कृषि स्टार्टअप है, जो बागवानी फसलों के लिए एक IoT आधारित AI प्लेटफॉर्म संचालित करता है।

उनकी तकनीक फार्म पर लगे मेड इन इंडिया सेंसर से रियल टाइम डाटा लेकर खेत, फसल और फसलों की अलग-अलग स्टेज के बारे में विशिष्ट जानकारी देती है और फसल एप के ज़रिए यह किसानों के फ़ोन पर उनकी मातृभाषा में भेजती है। एक्शनेबल इंटेलिजेंस में सटीक रोग प्रबंधन, कीट प्रबंधन, सिंचाई, खेत योजना और खेत वित्त प्रबंधन शामिल हैं। यह आपके खेत की स्थितियों (जलवायु, मिट्टी, सिंचाई) की निगरानी कहीं से भी और कभी भी करता है, जैसे कि आप कभी खेत से गए ही नहीं।

आनंद ने द बेटर इंडिया को बताया, “भारत में किसानी आज भी अनिश्चिताओं से घिरी है। यही वजह है कि इस सेक्टर में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग, ज्यादा लागत, कम उत्पादकता और उपज की खराब गुणवत्ता जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस कारण स्प्रे, सिंचाई और खाद पर अधिक खर्च किया जाता है। किसानों को इस तरह से समस्याओं से छुटकारा हासिल करने लिए हमने ‘फसल’ स्टार्टअप की शुरूआत की। हमारा उद्देश्य खेती के लिए ऐसे इनोवेशन बनाने का है जिससे कृषि में पूर्वानुमान और लाभप्रदता लाई जा सकते है ताकि कृषि सस्टेनेबल हो।”

आनंद कहते हैं कि साल 2018 से अब तक फसल ने छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 10,000 एकड़ में फैले सैकड़ों किसानों की मदद की है। इस स्टार्टअप के जरिए वह किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ तक खेती की लागत को कम करने में मदद करते हैं, पिछले सीजन की तुलना में प्रति एकड़ लगभग 60% अधिक उत्पादन हुआ है और जहाँ उनके सेंसर लगे हैं वहाँ पर सभी खेतों में 3 बिलियन लीटर पानी बचाया गया है।

नवंबर 2020 के अंत में, स्टार्टअप ने अपने चौथे फार्म-ऑन सेंसर का अनावरण किया, जिसका नाम ‘फसल क्रांति’ है। इस प्लग-एंड-प्ले डिवाइस को फ़ार्म पर लगाने में 5 मिनट से कम समय लगता है। यह एक आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और सेंसर आधारित प्रणाली है जो किसानों को सिंचाई, प्रजनन, बीमारी और कीट प्रबंधन के संबंध में अनुकूलित आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने में मदद करता है।

 

Fasal Kranti
Farmer with the Fasal Kranti hardware.

यह नई तकनीक 12 से अधिक सेंसर से लैस है, जो बारिश, हवा की गति, हवा की दिशा और सौर तीव्रता जैसे वृहद-जलवायु कारकों पर नजर रखने के लिए हैं। यह सूक्ष्म जलवायु कारकों जैसे तापमान, आर्द्रता, पत्ती के गीलेपन के साथ-साथ मिट्टी के तापमान, मिट्टी के विभिन्न स्तरों पर आद्रता की स्थिति जैसे पहलुओं की निगरानी रख सकती है।

‘फसल क्रांति’, कृषि स्वचालन में अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए किसी भी कृषि स्वचालन प्रणाली के साथ एकीकृत किया जा सकता है। उनके द्वारा विकसित किए गए एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए, ‘फसल क्रांति’ एक निश्चित चरण में विशिष्ट फसलों के आधार पर सिंचाई का प्रबंधन करने में मदद करता है, उन्हें जड़ों से बचाता है और फिर उपज की गुणवत्ता में सुधार करता है।

इसका उपयोग कर किसान बीमारी पता लगाने और पेस्ट मैनेजमेंट के लिए करके अपनी फसल को बचा सकते हैं और रसायनों के प्रयोग को बहुत हद तक कम कर सकते हैं। कम से कम केमिकल का प्रयोग बेहतर नतीजे देता है और दुनिया भर में किसनों की उपज को स्वीकार लिया जाता है और स्प्रे पर भी 50% तक कम लागत आती है। यह किसानों को सिंचाई के लिए पानी के उपयोग में 50% तक की कमी करने में मदद करता है।

द बेटर इंडिया के साथ बातचीत में ‘फसल’ के सह-संस्थापक शैलेंद्र कहते हैं, “फसल क्रांति को लॉन्च करने से पहले, हम अपने हार्डवेयर के पुराने संस्करण का उपयोग कर रहे थे। फैसल क्रांति हमारे हार्डवेयर का चौथा वर्जन है। हार्डवेयर के पहले तीन डिज़ाइन में चुनौतियां थीं कि उन्हें किसी को खेत में जाकर लगाना पड़ता था। इसका मतलब था कि हमें अपनी तकनीक का उपयोग शुरू करने के लिए एक किसान की भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता होती थी।”

‘फसल क्रांति’ एक प्लग एंड प्ले डिवाइस है। एक किसान इसे खेत में ले जाता है, खेत के बीच में रखता है, एक क्यूआर कोड स्कैन करता है और सिस्टम काम करना शुरू कर देता है। ‘फसल क्रांति’ के लिए विकास कार्य लगभग डेढ़ साल पहले शुरू हुआ था। इसके जरिए अब स्टार्टअप अब बेंगलुरू में बैठकर किसानों की मदद कर सकता है। सटीक खेती के समाधान को इस देश में किसी तक भी पहुँचाया जा सकता है।

इन उपकरणों को बड़े पैमाने पर खेत के बीच में तैनात किया जाता है क्योंकि अधिकांश मामलों में बीमारी या कीट खेत के केंद्र से उभरना शुरू कर सकते हैं। चार से पाँच साल की उम्र के साथ, यह डिवाइस 2 जी का उपयोग करके दूरसंचार सेलुलर नेटवर्क के माध्यम से डेटा भेजता है। आवश्यकताएँ, सलाह और अलर्ट चाहे किसान का स्मार्टफोन हो या साधारण फीचर फोन, सभी को सूचित किया जाता है।

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“यह उपकरण 15 मिनट से 2 घंटे की फ्रिक्वेंसी में काम करता है। इस समय अवधि के लिए, डिवाइस स्वचालित रूप से चालू हो जाएगा, सेंसर से सभी डाटा एकत्र करें, और नेटवर्क स्थिति को चेक करें। यदि नेटवर्क की स्थिति अच्छी है, तो डिवाइस उस डाटा को हमारे क्लाउड सर्वर में ट्रांसमिट कर देगा। यदि किसी भी कारण से नेटवर्क ठीक नहीं है, तो यह उस डाटा को डिवाइस में ही सेव करेगा। अगली बार जब यह एक निश्चित अवधि के लिए ऑन होता है, तो यह पहले डाटा को भी साथ में लोगों को भेजेगा इसके अलावा, यह उपकरण सौर ऊर्जा से चलने वाला है, और धूप न होने पर भी यह तीन से चार महीने तक काम करता रहेगा। जब सूरज होगा, तो यह डिवाइस को स्वचालित रूप से चार्ज करेगा,” शैलेंद्र कहते हैं।

एक बार जब डिवाइस से डाटा एकत्र किया जाता है, तो उस डाटा को टेलीकॉम नेटवर्क के माध्यम से क्लाउड सर्वर पर भेजा जाता है। क्लाउड सर्वर में डाटा आते ही मैजिक शुरू हो जाता है। 42-सदस्यीय फ़सल टीम द्वारा विकसित किए असंख्य एल्गोरिदम हैं।

शैलेंद्र कहते हैं, “इन सभी आंकड़ों को मापते हुए, हम एक किसान को बता सकते हैं कि शाम 4 बजे तक, उदाहरण के लिए, मिट्टी का सारा पानी सूखने वाला है और इसलिए उसे सिंचाई करने की जरूरत है।”

 

Fasal Kranti

आनंद कहते हैं कि इस डिवाइस के जरिए मौसम का पूर्वानुमान भी लगाया जाता है। उन्होंने कहा, “हम पूर्वानुमान लगाते हैं कि कब और कितनी बारिश होने वाली है। हम बहुत ही लोकल मौसम पूर्वानुमान भी करते हैं, जहाँ हम वर्षा, वर्षा की संभावना, वर्षा की मात्रा, तापमान और आर्द्रता आदि को समझ रहे हैं। सिस्टम यह जाँचता है कि क्या वर्षा की संभावना है। यदि हाँ, तो कितना? क्या यह पौधे की पानी की जरूरतों के लिए पर्याप्त है? और फिर सिस्टम किसान को निर्देश देता है कि वह एक निश्चित पौधे की सिंचाई कब और कितनी मात्रा में कर सकता है।”

ये उपकरण कीट समस्या या बीमारी की समस्या भी खोज सकते हैं। साथ ही फसल प्रणाली सलाह देती है कि क्या किया जाना चाहिए। विभिन्न राज्यों से अलग-अलग पार्ट्स लेने के बाद इन उपकरणों का अंतिम उत्पादन बेंगलुरु में होता है।

शैलेन्द्र आगे कहते हैं, “हमारे अनुमान के अनुसार, हमने सभी खेतों में 3 बिलियन लीटर से अधिक पानी बचाया है, जहाँ फसल क्रांति लगा हुआ है। यह पानी 150,000 लोगों के लिए पर्याप्त है जिसे किसानों ने बचाया है। किसानों को और प्रोत्साहित करने के लिए, हमने एक फसल वाटर क्रेडिट सिस्टम शुरू किया है। हमारा सिस्टम हर घंटे रिकॉर्ड करेगा कि पानी का स्तर एक निश्चित अत्यधिक सीमा से कम है या नहीं। जो एक महीने में कुछ घंटों के लिए इस स्तर से नीचे पानी रखेगा, उसे हम महीने की सदस्य्ता फीस रिफंड करेंगे जो हम सलाहकार के तौर पर लेते हैं। जितनी बार किसान पानी बचाता है, वह पैसे कमा पायेगा।”

किसानों के लिए सदस्यता शुल्क फसल पर निर्भर करता है, लेकिन यह 500 रुपये से 750 रुपये प्रति माह होता है। फ़सल के ऐसे ही एक लाभार्थी हैं अमोल रकीब, महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफ़ाड तालुका के एक अंगूर किसान हैं, जिनका परिवार कृषि की भारी लागतों से जूझता रहा है।

“मैंने चार चीजों के लिए फसल सेंसर का उपयोग किया है- कीट, रोग पोषण और सिंचाई प्रबंधन। इस तकनीक का उपयोग करने के कई लाभ हैं, विशेष रूप से कीट और रोग प्रबंधन में। मैं पोषण और सिंचाई प्रबंधन में छिड़काव कीटनाशकों की कटौती से समग्र रूप से लागत की मात्रा को लगभग 50% तक कम करने में सक्षम रहा हूँ। विशेष रूप से, बीमारियों के संदर्भ में, फसल ने मुझे क्रमशः पाउडर फफूंदी और हल्के फफूंद के लिए स्प्रे को 50 और 60 प्रतिशत तक कम करने में मदद की है, जिससे उपज भी साफ़ और अधिक पर्यावरण के अनुकूल उत्पादित होती है,” अमोल ने कहा।

अगर आप इस स्टार्टअप के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें

संपादन – जी. एन झा 

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक

 

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