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Vizag Farmer

ड्रैगन फ्रूट से वाइन और केक बना रहा है यह किसान, लाखों में होती है कमाई

आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा अवैध गांजे की खेती के लिए बदनाम है। लेकिन, मूल रूप से एक एडवेंचर स्पोर्ट्स टीचर जस्टिन स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, पैशनफ्रूट और ब्लैकबेरी जैसे फलों की खेती और उससे केक, वाइन जैसे कई उत्पादों को बनाकर यहाँ विकास की एक नई इबादत गढ़ रहे हैं।

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भारत के दक्षिण-पूर्वी हिस्से के साथ, आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा अवैध गांजे की खेती के लिए बदनाम है। माना जाता है कि विशाखापत्तनम का आदिवासी बहुल क्षेत्र, देश के 80% गांजे की आपूर्ति करता है। इस अवैध उत्पाद की खेती के लिए, यहाँ की आदर्श मिट्टी और जलवायु को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन, उसी इलाके में एक शख्स स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit), पैशनफ्रूट और ब्लैकबेरी जैसे फलों की खेती कर, एक नई इबादत गढ़ रहा है।

यह कहानी है जस्टिन जोसेफ की, जो न सिर्फ इन विदेशी फलों की खेती कर रहे हैं, बल्कि उसे प्रोसेस कर, केक, बन्स, रोटी, पुडिंग और यहाँ तक ​​कि वाइन भी बना रहे हैं।

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जस्टिन जोसेफ द्वारा उत्पादित ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit)

जस्टिन मूल रूप से एक एडवेंचर स्पोर्ट्स टीचर और कॉरपोरेट लीडर ट्रेनर हैं। इसके अलावा, वह आदिवासी समुदायों के उत्थान की दिशा में भी प्रयासरत हैं, लेकिन 2017 में, उन्होंने खेती में भी अपना हाथ आजमाने का फैसला किया।

वह बताते हैं, “शुरुआती दिनों में, मेरी काली मिर्च और कॉफी उगाने की योजना थी। लेकिन, कुछ शोधों के बाद, मुझे एहसास हुआ कि यह अधिक वक्त की माँग करता है। इसके बाद, मुझे ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी मिली, जिसके लिए कम रखरखाव की आवश्यकता होती है।”

जस्टिन ने खेती की शुरुआत सिर्फ 2 एकड़ जमीन से की थी, लेकिन सफलता का स्वाद चखने के बाद, उन्होंने इसका दायरा बढ़ा दिया। फिलहाल, वह 9 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं।

वह बताते हैं, “प्रति एकड़ करीब चार टन उत्पाद होता है, जो बाजार में थोक दर पर 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इस सीजन में, मुझे प्रति एकड़ 4 लाख रुपए की कमाई हुई।”

जस्टिन कहते हैं कि अच्छी कमाई के अलावा, इन फसलों के लिए रखरखाव की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है और इसमें बीमारियाँ भी कम लगती है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती में समस्या

जस्टिन को ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 

वह बताते हैं, “ड्रैगन फ्रूट मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में उगाई जाने वाली फसल है। हमारे यहाँ इसकी ज्यादा खेती नहीं होती है। जिस वजह से जरूरत पड़ने पर किसी से मदद नहीं ली जा सकती है। यही कारण है कि शुरुआती दिनों में बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी से फसल खराब हो गई थी।”

चार साल पहले, जस्टिन ने तकनीकी जानकारी के अभाव में, 2 लाख रुपये की लागत से अपने 4,000 पौधे खो दिए थे।

इसे लेकर वह कहते हैं, “फसल को बढ़ने के दौरान हर पाँच दिन में एक बार और कटाई के दौरान तीन दिन में सिंचाई की जरूरत होती है। उस साल हर दिन बारिश हुई। जिससे फसल में फंगस लग गई और मेरे पास इसका कोई समाधान नहीं था। इस तरह, चार दिन में मेरी पूरी फसल खराब हो गई।”

1 रुपए का ब्लेड था समाधान

जस्टिन कहते हैं कि पहली बार में फसल खराब होने के बाद, उन्होंने कई प्रयोग किए और इस नतीजे पर पहुँचे कि एक रुपए का ब्लेड इस समस्या का समाधान है।
वह कहते हैं, “मुझे सिर्फ इतना करना था कि पौधे के संक्रमित हिस्से को काट दिया जाए और उसे धूप में सूखने दिया जाए। इसके लिए किसी कीटनाशक की कोई जरूरत नहीं थी।”

 

ड्रैगन फ्रूट का वाइन और केक

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जस्टिन की बहन विनीता का बनाया हुआ केक

इस सफलता के बाद, जस्टिन ने फल के साथ प्रयोग करने का फैसला किया।

वह कहते हैं, “फिलीपींस में सफेद और गुलाबी ड्रैगन फ्रूट से वाइन बनाई जाती है। मैं पिछले 15 वर्षों से अनानास, अंगूर, आँवला, अमरूद और आम जैसे कई फलों से वाइन बना रहा हूँ। इसके बाद, मैंने ड्रैगन फ्रूट के साथ प्रयोग करने का फैसला किया।”

जस्टिन ने कहा कि उन्होंने इससे काफी छोटे पैमाने पर वाइन बनाई है। वाइन बनाने के बाद, उन्होंने इसे अपने दोस्तों से भी साझा किया। 

इस फल को बढ़ावा देने के लिए, जस्टिन की बहन, विनीता इससे पुडिंग, पुट्टु (पारंपरिक केक), रोटियाँ और केक भी बनातीं हैं। 

वह कहतीं हैं, “ड्रैगन फ्रूट के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। मैंने देखा कि इसकी खेती के लिए मेरे भाई ने कितनी मेहनत की है। मैंने इसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए, इससे खास उत्पादों को बनाने की कोशिश की।”

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वाइन और पुडिंग

विनीता कहती हैं कि ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) के प्राकृतिक चमकीले गुलाबी रंग का लाभ उठाते हुए, वह इससे कई मिठाईयां भी बनाती हैं।

अपने खेती कार्यों से बड़ा लाभ कमाने के अलावा, जस्टिन की कोशिश यहाँ के आदिवासी समुदाय के लोगों के जीवन में बदलाव लाना भी है।

इसे लेकर वह कहते हैं, “यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यहाँ रोजगार की काफी कमी है। इस वजह से यहाँ के लोगों को शराब की लत लग गई है। उन्हें सही राह दिखाना आसान नहीं है। पिछले 4 वर्षों में, मैंने 20 आदिवासियों को रोजगार दिया है, ताकि वह अपने जीवन में कुछ सार्थक कर पाएँ और अपने घर के लिए कुछ पैसे कमा सकें।”

जस्टिन बताते हैं कि वह पर्वतारोहण पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण लेने के लिए आठ युवाओं को भी प्रेरित करने में कामयाब रहे। इसमें से एक ने माउंट आबू में ए ग्रेड भी हासिल किया है, जिससे उन्हें अपने जीवन में एक नई दिशा मिली।

जस्टिन अंत में कहते हैं कि वह ड्रैगन फ्रूट की खेती को जारी रखते हुए, एक एडवेंचर पार्क बनाना चाहते हैं, ताकि आदिवासियों को प्रशिक्षित कर, क्षेत्र में सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

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मूल लेख – 

संपादन: जी. एन. झा

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