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किसानों की मदद के लिए छोड़ी नौकरी, सांप से बचने के लिए बनाई सौर संचालित छड़ी ‘सांप गार्ड’!

र्नाटक के नारायण सुतार ने अपने चाचा को सांप के काटने के कारण मरते देखा था। नारायण एक वीडियो में बताते हैं कि सांप के जहर के कारण उनके चाचा को मरने में चंद घंटे भी नहीं लगे थे।

लेकिन महाराष्ट्र के छोटे से गांव में खेती करने वाले नारायण ने यह पहली बार नहीं देखा था। यह भारत के बहुत से गांवों की कहानी है जहां पर सैंकड़ों किसान सांप के काटने से अपनी ज़िन्दगी खो देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सांप के काटने से 46,000 से ज्यादा लोग मर चुके हैं।

शहरों में भले ही सांप के काटते ही एम्बुलेंस पीड़ितों के लिए दौड़ पड़ती है और अस्पतालों में जहर का असर खत्म करने के लिए दवाएं समय रहते मुहैया करवा दी जाती हैं। लेकिन गांवों में ये किसान आज भी चिकित्सा सुविधाओं में कमी के चलते स्थानीय वैद व हकीमों पर निर्भर करते हैं।

बैंगलुरु स्थित प्रसादम इंडस्ट्रीज ने छड़ी के रूप में एक ‘सांप गार्ड’ विकसित किया है जिसे किसान खेतों में ले जा सकता है।

लोहे से बनी यह छड़ी सोलर ऊर्जा से चलती है और इसे सांप-प्रतिरोधक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालाँकि यह ‘सांप गार्ड’ अभी अपने परीक्षण चरण में है। इसका उद्देशय न केवल किसानो की जान बचाना है बल्कि किसानो द्वारा अपनी रक्षा हेतु मार दिए जाने वाले साँपों की जान बचाना भी है।

अक्सर बहुत से किसान खेतों में जाते समय अपने साथ एक छड़ी रखते हैं। ताकि समय पड़ने पर आत्म-रक्षा के लिए इस्तेमाल किया जा सके। सोलर बैटरी से चलने वाले इस यंत्र को 3 घंटे चार्ज करके 24 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस ‘सांप गार्ड’ के बनाने वालों का दावा है कि यदि इसे जमीन में 8 इंच की गहराई तक गाढ़ दिया जाये तो इसकी नोंक से हर 20 सेकंड में जमीन के नीचे भूकम्पीय तरंगें निकलती हैं। जिसे 50 मीटर की दुरी तक सांप व अन्य जीव महसूस कर सकते हैं। जिससे वे इससे दूर रहते हैं।

वेदोब्रोतो रॉय, वह आदमी जिसने इस नई खोज को किया। उन्होंने ने द बेटर इंडिया को बताया,

“इस डिवाइस को बनाने का उद्देश्य लोगों और सांप को एक-दूसरे से दूर रखना है। हम लोगों ने कर्नाटक और महारष्ट्र के कुछ किसानों को यह यंत्र प्रयोग करने के लिए दिया ताकि हम पायलट सर्वे कर सकें। अभी तक इसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। अब हम इसका परीक्षण अलग-अलग तरह की मिट्टी में करना चाहते हैं। इसलिए इसे कृषि विभाग भेजा गया है।”

जुलाई से बाजारों में आने के लिए तैयार सांप गार्ड की कीमत अभी 4,000-5,000 रुपये है। लेकिन रॉय की टीम इसकी लागत को कम करने के लिए काम कर रही है। ताकि इसे किसानों के लिए सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराया जा सके।

रॉय ने बताया कि कैसे उन्हें इस यंत्र को बनाने का ख्याल आया, जब उन्होंने कुछ किसानों को एक रैट सांप को पीटकर माँरते हुए देखा।

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“रैट सांप जहरीले नहीं होते। बल्कि फसलों को खराब करने वाले कीटों को मारने में सहायक होते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में सांप के काटने से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ने के कारण लोग सांप को देखते ही झुंझला जाते हैं। और उससे बचने के लिए उसे मारना शुरू कर देते हैं। इन मौतों से बचने के लिए और किसानो के साथ-साथ साँपों को अलर्ट करने के लिए भी यह सांप गार्ड डिवाइस बनाया गया है।”

रॉय ने बताया कि सांप गार्ड, जहरीले स्प्रे, पाउडर आदि के मुकाबले बहुत मामूली सा यंत्र है।

वे बताते हैं,

“मेरी दादी को जैविक खेती करने का शौक था। वे उनके बगीचे में साग-सब्ज़ी उगाती थीं। लेकिन वे घोंघे के कारण परेशान थीं, क्योंकि वे आकर हमेशा उनकी गोभी आदि खराब कर देते थे। मेरे चाचा जी और दादा जी उन्हें रासायनिक छिड़काव करने के लिए कहते लेकिन वे इसके लिए राज़ी नहीं हुईं। तो वे जब भी नाश्ता बनाती तो अंडे के छिलके रख लेती थीं। बाद में उन अंडे के छिलकों को तोड़कर बगीचे के चारों तरफ बिखेर देती थी। जब भी घोंघे आते तो उन्हें ये अंडे के छिलके उनके शरीर पर कांच के जैसे चुभते थे जिससे उनका आना एकदम बंद हो गया था। मुझे भी इसी ने सांप गार्ड बनाने के लिए प्रेरित किया।”

प्रसादम इंडस्ट्रीज के बारे में

प्रसादम को वेदोब्रोतो रॉय ने उनकी पत्नी चेतना के साथ शुरू किया था। उनकी दो साल की बेटी है। एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में 16 साल काम करने के बाद रॉय ने अपनी जॉब छोड़ दी और समाज के लिए कुछ करने की सोची।

“हमारे पास पैसा तो था, लेकिन नींद नहीं थी। हम तीन शिफ्ट में काम करते और वीकेंड पर आराम करते थे। पर ऐसा लगता था कि ज़िन्दगी में कुछ भी सार्थक नहीं किया। इसलिए हमने अपनी नौकरी छोड़ दी और कर्नाटक के सूखाग्रस्त चिक्काबल्लपुर जिले में जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदा।”

तब से यह परिवार किसान व किसान विधवाओं के लिए काम कर रहा है, जिन्होंने पिछले दस सालों में अपनी फसलों को खराब होते हुए ही देखा है। दूसरे गांवों में पलायन, बढ़ती बेरोजगारी, बीपीएल कार्ड न प्राप्त कर पाना, किसान हर तरफ से मुसीबतों से घिरा हुआ है।

प्रसादम आधुनिक तकनीकें इस्तेमाल कर इन लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है। सिंचाई के लिए मिट्टी के घड़े इस्तेमाल करना, हरे पेपर बैग बनाना और सिगरेट-फ़िल्टर पेपर बनाना जिन्हें बाद में मिट्टी में डालने पर उनसे पौधा उगाया जा सकता है आदि, इन समाधानों में शामिल हैं।

“किसानों के साथ-साथ हम यह काम अपनी 2-साल की बेटी के लिए कर रहे हैं, जिसे हम यह बता सकें कि खाना हमारी मेज पर ग्रोसरी की दुकान या मॉल से नहीं, बल्कि खेतों में किसानों की लगातार मेहनत से आता है,” रॉय कहते हैं।

अब तक प्रसादम को सांप गार्ड के लिए गोवा फेस्ट में नेशनल जियोग्राफिक गोल्ड और सिल्वर से नवाज़ा गया है। पिछले दो सालों में वे केन्या के नायरोबी में भी पेपर अलाइव नाम से एक यूनिट खोलने में सक्षम रहे हैं। अरिंदम सरकार की अध्यक्षता में, यह यूनिट महाद्वीप में प्रसादम के काम को आगे बढ़ाएगी।

हम प्रसादम को उनके काम के लिए शुभकामनायें देते हैं।

आप प्रसादम से उनके फेसबुक पेजई-मेल के जरिये जुड़ सकते हैं।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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