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हरियाणा: उत्सव व समारोह के लिए लोगों को मुफ्त स्टील के बर्तन उपलब्ध करा रहा है ‘क्रॉकरी बैंक’!

हाल ही में महाराष्ट्र में प्लास्टिक बैन की दिशा में आम लोग आगे बढ़कर काम कर रहे हैं। ऐसे में हरियाणा के गुरुग्राम में भी एक महिला ने बहुत अनोखी पहल शुरू की है।

समीरा सतीजा, गुरुग्राम के सेक्टर 14 में रहती हैं। वह कई सामाजिक दलों के साथ मिलकर कचरा प्रबंधन पर काम कर रहीं हैं। इसके अलावा वे कंपट्रोलर एंड ऑडिट जनरल ऑफ़ इंडिया के ऑडिट विभाग में काम करती हैं। समीरा ने हाल ही में एक ‘क्रॉकरी बैंक’ की शुरुआत की है।

यह अनूठा बैंक लोगों को उत्सवों व समारोह के लिए स्टील के बर्तन उधार देता है और वह भी बिना किसी पैसे के।

इस पहल का उद्देशय लोगों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे प्लास्टिक के बर्तनों की जगह स्टील के बर्तन प्रयोग में लाने को बढ़ावा देना है। ताकि शहर में प्लास्टिक कचरा कम से कम हो।

दरअसल, सिखों द्वारा लगाई गयी एक ‘मीठे पानी की छबील’ समारोह के दौरान उन्होंने देखा कि लोग पुण्य कमाने के लिए लोगों को पानी पिला रहे हैं लेकिन साथ ही प्लास्टिक गिलास इस्तेमाल करके पर्यावरण-प्रदूषण का भी कारण बन रहें हैं।

लेकिन लोगों को प्लास्टिक छोड़ कर स्टील के बर्तन खरीदने के लिए कहना भी कोई उपाय नहीं था। इसलिए उन्होंने सोचा के इसके लिए कोई ऐसा उपाय ढूँढना होगा जो कि सबके हित में हो। इसके अलावा उन्होंने प्लास्टिक के गिलास बनाने वाले एक उद्योगपति से भी बात की। जिसमें उन्हें पता चला कि एक प्लास्टिक का गिलास बनाने के लिए तीन गिलास पानी बर्बाद होता है।

बाद में, इसी गिलास में पानी पिलाकर, इसे कचरे में फेंक दिया जाता है। जो पर्यावरण को प्रदूषित करता है।

इस तरह स्टील क्रॉकरी बैंक का विचार आया। समीरा ने अपनी जेब से 10, 000 रूपये खर्च कर 100 स्टील के गिलास, 100 प्लेट और 100 छोटी प्लेट खरीदीं। धीरे-धीरे उनके क्रॉकरी बैंक में बर्तनों की संख्या 400 से भी अधिक पहुंच गयी है।

समीरा ने द बेटर इंडिया ने बताया,

“मैंने तीन संगठनों को यह स्टील के बर्तन बाँटना शुरू किया। ऐसे संगठन जो राहगीरों को मुफ्त पानी पिला उनकी प्यास बुझाते हैं। उन्हें मेरा यह सुझाव बहुत पसंद आया। उन्होंने उपयोग के बाद जब बर्तन वापिस किये तो उस के साथ बैंक के लिए 10 नए गिलास भी दान में दिए।”

समीरा क्षेत्र के सभी नागरिकों को अपने गली-मोहल्लों में इस तरह का बैंक शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं। जो लोग ऐसा नहीं कर सकते, वे उनसे उनके बैंक को बढ़ाने के लिए मदद मांगती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पहल का लाभ उठा पाएं।

बहुत से शुभ-चिंतक समीरा के कार्य में उनका भरपुर योगदान दे रहें हैं।

कैसे प्राप्त कर सकते हैं बर्तन

समीरा के इस कार्य में उनकी दोस्त डॉ आरुषि उनकी मदद कर रही हैं। उन्होंने इसके लिए एक फेसबुक पेज बनाया है।
मीठे पानी की छबील, भंडारा या अन्य किसी भी सामाजिक काम के लिए फ्री स्टील बर्तन लेने के लिए आप इस फेसबुक पेज पर जाकर अपने कार्यक्रम की तारीख, स्थान के साथ अपना मोबाइल नंबर लिख दें। इसके बाद आपके पास फोन आएगा।

आपको अपने क्षेत्र के पार्षद या आरडब्लूए के किसी पदाधिकारी से पत्र लिखवाना होगा कि आपको किस काम के लिए और कितने दिन के लिए क्रॉकरी चाहिए। यदि यह सम्भव नहीं है तो आप अपनी कोई भी दो आईडी और एड्रेस प्रूफ की फोटोकॉपी देकर क्रॉकरी प्राप्त कर सकते हैं।

बाकी उपयोग करने के बाद बर्तनों को धोकर वापिस करना न भूलें।

समीरा कहती हैं कि हम जब भी कोई पुण्य का काम करें तो साथ में याद रखें कि इसके बाद कितना कचरा होगा और उस कचरे का प्रबंधन कैसे करना है। वे ज्यादा से ज्यादा लोगों से इस बैंक मॉडल को अपने यहां शुरू करने की अपील करती हैं।

समीरा को सम्पर्क करने के लिए आप उन्हें ई-मेल कर सकते हैं simsatija@gmail.com


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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