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आंध्र प्रदेश: इंजीनियरिंग के छात्र ने बनाया ऐसा विंड टरबाइन, जिससे मिल सकता है बिजली-पानी

दुनिया के हर कोने में आज करोड़ों लोग बिजली, पानी और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। अकेले भारत में, करीब 88 मिलियन लोगों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाता है। 

इन्हीं करोड़ों लोगों में से एक हैं आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के मधु वज्रकरुर। मधु इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं और उनके यहाँ बिजली और स्वच्छ पेयजल की कोई खास सुविधा नहीं है।

23 वर्षीय (Young Engineer) मधु ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैं वज्रकरुर गाँव में पला-बढ़ा हूँ। यहाँ जलापूर्ति के मुख्य स्रोत बोरवेल और पानी के टैंकर हैं। यहाँ बोलवेल से पानी निकाला जाता है, फिर उसे गर्म कर इस्तेमाल में लाया जाता है। आलम यह है कि जब यहाँ बारिश नहीं होती है, तो भूजल स्तर काफी नीचे गिर जाता है। इसके बाद, हमें मजबूरी में, टैंकर का पानी खरीदना पड़ता है। मेरे पिता एक किसान हैं, जबकि माँ एक गृहिणी। इसलिए घर की आय कम है। कई ऐसे मौके आते हैं कि हम पानी खरीदने में समर्थ नहीं होते और कई बार हमें पड़ोसियों से पानी उधार लेना पड़ता है।”

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अपने विंड टरबाइन के साथ मधु

ऐसे में इंजीनियरिंग के इस छात्र ने इस भीषण संकट का सामना करने के लिए एक विंड टरबाइन बनाया है, जो बिजली और पीने योग्य पानी उत्पन्न कर सकता है।

यह कैसे काम करता है?

इस तकनीक में मधु ने 15 फुट लंबा विंड टरबाइन का इस्तेमाल किया है, जो वातावरण से नमी को जमा करता है और तांबे के पाइप की मदद से तीन चरणों के फिल्टर तक पहुँचता है।

मधु बताते हैं, “इस तकनीक में, हवा में मौजूद नमी को जमा करने के बाद, उसे पंखे के पीछे रखे ब्लोअर के जरिए विंड टरबाइन फ्रेम में निर्देशित किया जाता है।  एक बार जब यह ठंडी हवा लंबे फ्रेम में चली जाती है, तो नमी को कूलिंग कंप्रेसर में निर्देशित किया जाता है। यह हवा को पानी में तब्दील कर देता है। इसके बाद, पानी को तांबे के पाइप के जरिए, थ्री स्टेज फिल्टर यानी मेंबरेन फिल्टर, कार्बन फिल्टर और यूवी फिल्टर की मदद से पानी में मौजूद धूल-कणों को जमा करने के लिए निर्देशित किया जाता है। अंततः साफ पानी को  फ्रेम पर रखे एक नल के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।”

मधु बताते हैं कि पानी को 40 लीटर की क्षमता के साथ एक बाहरी टैंक में भी एकत्र किया जा सकता है। वहीं, विंड टरबाइन 30 किलोवाट क्षमता वाले एक इनवर्टर से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल वह अपने घर में बिजली के पंखे, लाइट और प्लग-पॉइंट के लिए करते हैं।

मधु ने अपने विंड टरबाइन को प्लास्टिक पाइप, लोहे की छड़ और अन्य तत्वों को ऑनलाइन खरीद कर बनाया है। उन्होंने इस कार्य को अक्टूबर 2020 के पहले सप्ताह में शुरू किया और महज 15 दिनों में इसे बना भी लिया। इसे विकसित करने में कुल 1 लाख रुपए का खर्च आया है, जिसकी पूर्ति उनके माता-पिता ने अपने सेविंग्स से की।

हालांकि रूफटॉप विंड टरबाइन बनाने वाले आर्किमिडीज ग्रीन एनर्जी के संस्थापक सूर्य प्रकाश गजाला कहते हैं, “मधु का प्रयास सराहनीय है, लेकिन उनके विंड टरबाइन की गुणवत्ता अच्छी नहीं हो सकती है। क्योंकि, 1 लाख रुपए की लागत से बना 30 केवी का विंड टरबाइन, हवा के उच्च दबाव का सामना नहीं कर सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाली विंड टरबाइन की लागत 35 लाख रुपए से कम नहीं है।”

बचपन का था सपना

मधु को दूसरी कक्षा से ही विंड टरबाइन को बनाने का सपना था, जब उन्होंने इसके बारे में पहली बार पढ़ा था। लेकिन, इसे हकीकत में बदलने के लिए उनके पास अनुभव या तकनीक नहीं थी। लेकिन, स्कूल में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनियों के लिए कार्डबोर्ड का उपयोग करके उन्होंने इसके मॉडल संस्करण बनाए थे।

वह कहते हैं, “मैंने कॉलेज के सेकेंड ईयर में सीखा कि सौर ऊर्जा ग्रिड और स्वचालित स्ट्रीट लाइट कैसे बनाई जाती है। इससे मुझे ऐसी तकनीक के साथ काम करने का व्यावहारिक ज्ञान मिला। अक्टूबर 2020 में, पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में विंड टरबाइन का जिक्र किया था, जिससे कि पानी प्राप्त हो। उन्होंने यह बताया था कि इसे दूसरे देशों में कैसे प्रसारित किया जा सकता है। इससे मुझे विंड टरबाइन को बनाने की प्रेरणा मिली। इसके बाद, मैंने  यूट्यूब के जरिए और जानकारी हासिल कर अपने विंड टरबाइन को बनाया।”

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मधु ने अपने विंड टरबाइन को प्लास्टिक पाइप, लोहे की छड़ और अन्य तत्वों को ऑनलाइन खरीद कर बनाया है।

आज, मधु को अपने विंड टरबाइन से हर दिन 80 से 100 लीटर पानी मिलता है। जिससे बोरवेल पर उनकी निर्भरता कम हुई, जिससे उनका बिजली बिल भी बच रहा है। पानी की किल्लत होने के बाद, उनके इस प्रोजेक्ट का लाभ उनके पड़ोसियों को भी मिलता है।

मधु के बचपन के दोस्त वन्नूर वली को आश्चर्य नहीं है कि उनके दोस्त ने अपनी समस्या का समाधान करने के लिए इतने अभिनव तरीकों आजमाया। 

वह कहते हैं, “मधु को स्कूल के दिनों से ही, इनोवेटिव सॉल्यूशंस को लेकर हमेशा नए प्रयोग और कोशिश करना पसंद था। मुझे बहुत खुशी है कि वह विंड टरबाइन को बनाने में सफल रहे। मुझे आशा है कि उनके प्रयासों को एक नई पहचान मिलेगी और पूरे देश में पानी की समस्या का समाधान हो सकता है।”

मधु, अपने डिजाइन का व्यवसायीकरण और जलसंकट से घिरे क्षेत्रों में लोगों को इस तरीके से विंड टरबाइन स्थापित करने में मदद करने की उम्मीद कर रहे हैं। 

यदि आप इस तकनीक के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो आप मधु से madhu.vajrakarur@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

मूल लेख – ROSHINI MUTHUKUMAR

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संपादन: जी. एन. झा

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राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।
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