in

इस पिता और बेटी ने रोका त्रिपुरा में बड़ा रेल हादसा, बची 2000 लोगों की जान!

अपने पिता स्वपन संग सोमती /फोटो:फेसबुक/मणिपुरी बाय ब्लड

पिछले कुछ महीनों से देश के किसी ना किसी कोने से रेल दुर्घटनाओं की खबरें आ रही हैं। ऐसे में एक बड़ी रेल दुर्घटना का टलना यक़ीनन बहुत बड़ी खबर है। उसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि इस रेल आपदा को टाला है एक गरीब पिता और उसकी बेटी की समझदारी ने।

आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जून को उत्तर त्रिपुरा के धंचारा गांव से ताल्लुक रखने वाले स्वपन देबबर्मा और उनकी बेटी सोमती ने एक ट्रेन दुर्घटना को होने से रोका जिसकी वजह से लगभग 2000 यात्रियों की जान बच सकी।

स्वपन और उनकी बेटी ढलाई जिले के अथारामुरा पहाड़ी पे चढ़ रहे थे, जब उन्होंने देखा कि ट्रेन जिस दिशा में बढ़ रही है वहां आगे कोई रेलवे ट्रैक नहीं है। यूएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन अगरतला से धर्मनगर की तरफ बढ़ रही थी।

ख़बरों के मुताबिक भारी बारिश और भूस्सखलन के चलते रेलवे ट्रैक हठ गए थे। खतरे को समझते हुए स्वपन पटरी पर आकर अपनी शर्ट उतारकर ड्राइवर को सिग्नल देने का प्रयास करने लगा। अपने पिता को देख सोमती भी उसकी मदद में जुट गयी।

ट्रेन ड्राइवर ने संकेत को समझ ट्रेन को रोक दिया। ट्रेन ड्राइवर सोनू कुमार मंडल ने मीडिया को बताया कि “यदि हमने सिग्नल देखकर ट्रेन नहीं रोकी होती तो यह एक बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।”

त्रिपुरा स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सुदिप रॉय बरमन के मुताबिक स्वपन और सोमती एक आदिवासी परिवार से आते हैं और अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए जंगल से लकड़ियां और बांस आदि स्थानीय बाजार में बेचते हैं।

इसी बीच त्रिपुरा विधानसभा में मुख्यमत्री बिप्लब देब ने बताया कि वे केंद्रीय रेलवे मंत्रालय से स्वपन व उनकी बेटी को इनाम व सम्मान देने की गुजारिश करेंगें। साथ ही, उत्तर रेलवे ने भी दोनों को सम्मानित करने का वादा किया है। साल की शुरुआत में ऐसी ही एक घटना में, असम के एक किसान ने ट्रेन को बिगड़े हुए ट्रैक पर जाने से रोका था और उसे 5000 रूपये का इनाम दिया गया था।

( संपादन – मानबी कटोच  )


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे।

शेयर करे

Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

हरियाणा की गोदिकां पंचायत का फैसला, ‘बेटी वहीं ब्याहेंगें, जिस घर शौचालय पायेंगें’!

एसी के रहते हुए भी कैसे करें बिजली की बचत, जानिए एनर्जी ऑडिटर अशोक के सुझाव!