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एसी के रहते हुए भी कैसे करें बिजली की बचत, जानिए एनर्जी ऑडिटर अशोक के सुझाव!

फोटो: बिज़नेस टुडे

ढ़ते तापमान की वजह से मानो भारत जल रहा है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती गर्मी के चलते जहां एक तरफ एसी (एयर कंडीशनर) का देश में इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इससे निकलने वाली ग्रीनहॉउस गैस के बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा अनियंत्रित रूप से बढ़ता ही जा रहा है।

साल 1902 में विल्लिस कैर्रिएर ने बर्फ और पंखों का इस्तेमाल कर एसी का अविष्कार किया था। लेकिन तब से अब तक टेक्नोलॉजी ने बहुत लम्बा सफर तय कर लिया है।

भारत में एक प्रसिद्द एयर कंडीशनर कंपनी के मुताबिक वर्ष 2016 में देश में लगभग 5 मिलियन एयर कंडीशनर बेचे गए थे, जो देश में 35 मिलियन यूनिट्स बिजली की खपत के जिम्मेदार हैं। अब हम उस स्थिति में नहीं है जब हमें इससे निकलने वाली हानिकारक ग्रीन हाउस गैसों पर बस बहस भर करनी है, बल्कि अब हमें किसी भी तरह पर्यावरण को बचाना है।

एस. अशोक, ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी के एनर्जी ऑडिटर का मनना है कि अब सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

फोटो: एस. अशोक

ऊर्जा क्षेत्र में तीन दशकों से भी ज्यादा का अनुभव रखनेवाले अशोक का कहना है कि एयर कंडीशनर का उपयोग ग्लोबल वार्मिंग के लिए हम सब को जिम्मेदार बनाता है – इसमें एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करनेवाले, निर्माता और सरकार शामिल है।

उन्होंने बताया कि एसी के दुष्प्रभाव उसे 18/16 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखने से शुरू होते हैं। हालाँकि वैज्ञानिक रूप से मानव शरीर के लिए 24 डिग्री तापमान ही सही है।  इसलिए यह सिर्फ ज़्यादा बिजली की खपत का जरिया बनता है, जो असल में हानिकारक है।

इसी के चलते अशोक जैसे विशेषज्ञ बिजली की कम खपत और ग्रीनहाउस गैसों के कम उत्पादन के उद्देश्य से सरकार से अपील कर रहे हैं कि एसी का न्युनतम तापमान 24 डिग्री रखने का प्रस्ताव पारित किया जाये।

ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी की रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए केंद्रीय सरकार ने बिजली मंत्रालय के कम बिजली खपत के अभियान के तहत एक प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव में सभी एयर कंडीशनर बनाने वाली कंपनियों को न्युनतम तापमान केवल 24 डिग्री सेल्सियस रखने के निर्देश दिए जायेंगें।

अगले छह महीनों में एक जागरूकता अभियान के बाद और लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए एक सर्वेक्षण के बाद, मंत्रालय इस प्रस्ताव को पारित करने पर विचार करेगा। बिजली मंत्रालय के मुताबिक, इससे अकेले एक वर्ष में 20 अरब यूनिट बिजली बचाने में मदद मिलेगी।

पर अशोक का कहना है कि बिजली की खपत में बचत और ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए सरकार को और भी कुछ पहलुओं पर काम करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं।

1. वायु अनुकूलन (एयर कंडीशनिंग) और वायु प्रसार (एयर सर्कुलेशन) दो अलग-अलग चीज़ें हैं

पंखा और एयर कंडीशनर को एक चलाये। यह हवा के प्रसार को बढ़ाने में मदद करेगा। पंखे के साथ एयर कंडीशनर चलाने से एयर कंडीशनर को अधिक कुशलता से चलाने में मदद मिलेगी क्योंकि आप ज्यादा तापमान सेटिंग में भी ठंडक महसूस करेंगे। उदाहरण के लिए, पंखे के साथ 27ºC की तापमान सेटिंग 22ºC की तरह महसूस होगी। यह अपने आप ही बिजली की खपत को कम कर देता है।

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फोटो: shuttershock

2. साफ़ एयर कंडीशनर = कम बिजली की खपत

समय-समय पर एसी की सर्विसिंग करवाने के साथ-साथ ध्यान रखे कि एयर इन्टेक फ़िल्टर के अंदर की धुल अच्छे से साफ़ की जाये। इससे एसी की कुशलता बढ़ने के साथ-साथ बिजली की खपत भी कम होगी।

3.अपने एयर कंडीशनर थर्मोस्टेट को बढ़ाएं

एयर कंडीशनर कंप्रेसर के सेचुरेशन स्तर की निगरानी रखने और उसे अनुकूल रखने के लिए बाजार से आप फिटिंग करवा सकते हैं। यह एसी के मौजूदा तापमान नियंत्रण तंत्र के पूरक के रूप में कार्य करता है। इससे आप 20% तक बिजली बचा सकते हैं।

4. एयर कंडीशनर की बिजली की खपत को मापें, निगरानी रखें और प्रबंधित करें

एक साधारण मीटर (500 रूपये के आसपास की लागत) का उपयोग करके एयर कंडीशनर की बिजली की खपत की निगरानी करके आपको एयर कंडीशनर द्वारा वास्तव में कितनी बिजली का उपभोग हो रहा है उसकी जानकारी मिलेगी। घर के लिए इकट्ठे मासिक बिलों की बजाय अलग-अलग बिल में खपत को देखते हुए आपको इस बात का एहसास होगा कि एसी को ठीक से न चलाये जाने से कितनी बिजली लग रही है, इससे घर में सभी इसकी ओर ज़्यादा ध्यान देंगे!

5. एसी निर्माताओं को पहल करनी चाहिए:

एयर कंडीशनर निर्माता और डीलर ग्राहकों के बीच बेहतर कूलिंग और कुशल उपयोग के लिए एयर कंडीशनर के साथ एक पंखे के उपयोग का प्रचार कर सकते हैं। निर्माता एयर कंडीशनर के साथ बेहतर बिजली की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एयर कंडीशनर के साथ एक स्टेबलाइज़र और एक मीटर भी पैकेज में दे सकते हैं।

यदि आपको लगता है कि इन सभी बातों पर अमल करके हम बिजली बचा सकते हैं और यदि आपके पास भी कोई उपाय हैं, जो बिजली बचाने में सहायक हैं तो आप हमारे साथ साझा कर सकते हैं।

यदि आप एस. अशोक से संपर्क करना चाहते हैं, तो उन्हें ई-मेल करें।

मूल लेख: विद्या राजा

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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