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देश की पहली ट्रांसजेंडर आईएएस बनना चाहती हैं केरल की ट्रांस्क़्वीन श्रुति सितारा!

फोटो: डेक्कन क्रॉनिकल

धीरे-धीरे ही सही पर हमारा देश ट्रांसजेंडर समुदाय को समझने व अपनाने लगा है। सरकारी नौकरियों, खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अब ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सौंदर्य प्रतियोगिताओं के दरवाज़े भी खुल रहे हैं। 18 जून, 2018 को केरल में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ‘द क्वीन ऑफ़ ध्वायह 2018’ सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का यह दूसरा आयोजन था।

श्रुति सितारा नामक एक प्रतियोगी ने यह ख़िताब जीता। वह तिरुवनंतपुरम में सामाजिक न्याय विभाग के ट्रांसजेंडर विंग में प्रोजेक्ट असिस्टेंट के तौर पर काम करती हैं। श्रुति का कहना है कि उन्होंने कभी भी उम्मीद नहीं की थी कि वे जीत जायेंगीं।

प्रतियोगिता में तीन राउंड थे, जिसमें 16 प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करते हुए पारंपरिक, डिजाइनर और पश्चिमी वस्त्र पहनने थे। अंतिम राउंड में, केवल छह प्रतियोगी थे, जिन्हें एक मिनट में एक विषय पर लिखने और इसे पढ़ने के लिए कहा गया। श्रुति ने बताया, “हम से पूछा गया कि अंतर्राष्ट्रीय ट्रांस्क़्वीन ख़िताब जीतने के बाद समाज में हमारा सबसे बड़ा योगदान क्या होगा?”

फोटो:

उन्होंनें जवाब दिया कि, “एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति होने के विशेषाधिकार के साथ मैं सभी को जीवन के प्रति दृढ़ संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने को प्रेरित करूंगीं।”

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-“यही मेरा आदर्श भी है,” उन्होंने कहा

एक साक्षात्कार के दौरान श्रुति ने बताया कि वे अपनी पहचान को लेकर हमेशा उलझन में रहती थीं। उन्होंने कक्षा XII तक कोट्टायम में पढ़ाई की और उसके बाद जब वे कॉलेज गयीं और उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के बारे में जाना तब उन्हें अहसास हुआ कि उनकी असली पहचान क्या है। इससे पहले उन्हें प्रवीण के रूप में जाना जाता था।

उन्होंने कहा कि जीवन के प्रति उनके सकारत्मक दृष्टिकोण का कारण है, उनके दोस्तों व परिवार का साथ। उन्होंने बताया कि उनके दोस्तों ने उनके माता-पिता और भाई को उनकी पहचान के बारे में बताया था। उनके परिवार ने भी बिना किसी विरोध के उनको अपनाया।

यह सब बिल्कुल भी आसान नहीं था। श्रुति बताती हैं कि लोगों का घूरना, अस्वीकृति और संदेह हमेशा रहा ,पर मुझे पता था कि धीरे-धीरे ही लोग हमें अपनाएंगें। श्रुति एक आईएएस अफ़सर बनना चाहती हैं। वे कहती हैं कि यह पहले मेरी माँ का सपना था और अब मेरा है।

श्रुति ने यूपीएससी की प्रीलिम्स परीक्षा दी है और वे परिणाम का इंतजार कर रही हैं। हालाँकि यह परीक्षा उन्होंने प्रवीण के रूप में दी है क्योंकि अभी भी यूपीएससी में ट्रांसजेंडर लोग पंजीकरण नहीं कर सकते। वे कहती हैं कि यदि वे पास नहीं हुई तो फिर से परीक्षा देंगीं और देश की पहली ट्रांसजेंडर आईएएस बन कर दिखाएंगी।

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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