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गुल्लक बच्चा बैंक : जहाँ के प्रबंधक, उपप्रबंधक और क्लर्क, सभी हैं 14-16 साल के बच्चे!

साल 2008 में बिहार सरकार ने राज्य में शिक्षा विभाग के अंतर्गत किलकारी बाल भवन की शुरुआत की। इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य गरीब तबके के बच्चों को शिक्षा व व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। किलकारी बाल भवन में बच्चों को थिएटर, संगीत, पाक कला, डांस, जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षित किया जाता हैं।

श्रीमती ज्योति परिहार, जो साल 2008 से किलकारी की निदेशक हैं, उन्होंने बताया कि किलकारी बाल भवन में 8 से लेकर 16 की उम्र तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। यहां पर बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा पर काम किया जाता है। बाल भवन की फंडिंग बिहार सरकार द्वारा की जाती है।

 

किलकारी बाल भवन ने बच्चों के उत्थान के लिए बहुत से प्रोग्राम चलाएं हैं जिसके तहत बच्चों को जीवन के विभिन्न पहलुओं को जानने-समझने की सीख मिलती हैं।

ऐसी ही एक पहल है, गुल्लक बच्चा बैंक, जिसकी शुरुआत साल 2009 में की गयी थी।

“इस बैंक की शुरुआत के पीछे हमारा मक़सद बच्चों को पैसे का महत्व समझाना है।  हमारे यहां ज्यादातर बच्चे गरीब तबकों से हैं तो , बचत करना और कैसे पैसे को मैनेज करना है, ये हम इस पहल द्वारा सीखाना चाहते थे,” जयोति ने बताया।

गुल्लक बच्चा बैंक में बच्चे न्यूनतम 1 रुपया तक जमा कर सकते हैं। इस बैंक में लगभग 3500 खाते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बाल भवन में पढ़ने वाले बच्चे ही इस बैंक को चलाते हैं। जी हाँ, इस बैंक के प्रबंधक, उपप्रबंधक हों या फिर क्लर्क, सभी लगभग 14-16 वर्ष की उम्र तक के हैं।

सुबह 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक, दो-दो घंटे की शिफ्ट में 6 बच्चे बैंक में काम करते हैं। हर साल बैंक के कर्मचारी (बच्चे) बदलते हैं, ताकि हर साल नए बच्चों को कार्य-प्रणाली सीखने को मिले।

इसी के साथ बैंक में काम करने वाले बच्चों को मासिक वेतन भी दिया जाता है।

ज्योति ने बताया कि अब तक इस गुल्लक बच्चा बैंक में लगभग 68 लाख रूपये का लेन-देन हो चूका है। पिछले साल गुल्लक बच्चा बैंक ने लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कायम किया था। साथ ही जब किसी बच्चे का खाता तीन साल तक गुल्लक बच्चा बैंक के साथ रहता है तो उस बच्चे के खाते को इंडियन ओवरसीज बैंक में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

इसके साथ ही गुल्लक बच्चा बैंक का सञ्चालन और प्रबंधन कैसे होता है, उसके ऊपर बच्चों द्वारा ही एक बुकलेट भी प्रकाशित हुई है।

गुल्लक बच्चा बैंक के साथ किलकारी बाल भवन में, बच्चों के लिए पुस्तकालय, मोबाइल लाइब्रेरी, और काउंसलिंग जैसी सुविधाएँ भी हैं। मोबाइल लाइब्रेरी के जरिये एक वैन में स्कूलों और स्लम में किताबें ले जाई जाती हैं। इस पुस्तकालय में कविताओं, कहानियों, चुटकुले, बाल समाचार पत्र इत्यादि जैसे विभिन्न विषयों पर किताबें होती हैं। साथ ही इस वैन के ड्राइवर और कॉर्डिनेटर बच्चों के लिए समय-समय पर अनेक गतिविधियां भी आयोजित करते हैं।

 

बच्चों का पुस्तकों की तरफ रुझान बढ़ाने के लिए भी प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। हर महीने बच्चों में से ‘बेस्ट रीडर’ चुना जाता है। इसके साथ ही बच्चों के मानसिक व भावनात्मक विकास को ध्यम में रखते हुए उनकी काउंसलिंग भी की जाती है।

“हमारे बच्चे कई गतिविधियां करते हैं। हर महीने हमारी मैगज़ीन निकलती हैं जिसमें बच्चो द्वारा लिखे गए लेख, कवितायेँ व कहानियां छपती हैं। हमारे यहां से बच्चों ने दशरथ मांझी जैसी फिल्मों में भी काम किया है। अभी भी हमारे बच्चे ऋतिक रोशन के साथ काम कर रहे हैं,” ज्योति ने कहा।

इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज़ में किलकारी का अभिषेक

किलकारी को अपने काम के लिए कई बार पुरुस्कृत भी किया गया। यहां के बच्चों ने भी अनेकों उपलब्धियां हासिल की हैं। हर साल बच्चों की उपलब्धियां किलकारी द्वारा निकाले गए एक कैलेंडर में छपती हैं। इसके अलावा किलकारी बाल भवन से बाल किलकारी न्यूज़लेटर, मैं हूँ किलकारी, धमा-चौकड़ी, अटकन-मटकन, अपना पटना, जैसी मागज़ीने भी प्रकाशित की जाती हैं।

हर साल किलकारी बाल भवन में समर कैंप, बाल दिवस, चिल्ड्रेन्स साइंस फेयर और गुल्लक वार्षिकोत्स्व का आयोजन होता है। पटना के अलावा भागलपुर और गया में भी किलकारी के शाखा कार्यालय हैं।

निस्संदेह, बिहार सरकार का यह कदम बिहार में बच्चों के लिए कल्याणकारी साबित हो रहा है। उम्मीद है कि किलकारी बाल भवन के माध्यम से बहुत से बच्चों का जीवन संवर रहा है।

किलकारी के बारे में और अधिक जानने के लिए आप वेबसाइट और फेसबुक देख सकते हैं। गुल्लक बच्चा बैंक पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री आप देख सकते हैं

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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